मुंबई में तरबूज खाने के बाद चार लोगों की मौत के मामले ने एक तरफ जहां पूरे देश को हैरान कर दिया है तो वहीं दूसरी तरफ इस मामले में लगातार जांच जारी है। दक्षिण मुंबई के मुंबई के पायधोनी इलाके में बीते 26 अप्रैल को एक परिवार के चार लोगों की रहस्यमयी मौत ने सभी को हैरान कर दिया। 26 अप्रैल की रात अब्दुल्ला डोकाडिया, उनकी पत्नी नसरीन और उनकी दो बेटियां आयशा व जैनब ने तरबूज खाया था। इसके करीब 12 घंटे के भीतर ही चारों की मौत हो गई। अब्दुल्ला डोकाडिया की उम्र 40 साल थी, जबकि उनकी पत्नी नसरीन 35 साल की थीं। उनकी बेटियां आयशा 16 और जैनब 13 साल की थीं।
वहीं इस मामले की शुरुआत में जांचकर्ताओं को शक था कि तरबूज ही मौत की वजह हो सकता है। कई हफ्तों तक यही जांच का मुख्य आधार बना रहा।हालांकि, अब जांच में यह संभावना लगभग खत्म हो गई है। पुलिस और जांच एजेंसियों का कहना है कि तरबूज को अब मौत का कारण नहीं माना जा रहा है। दरअसल, उसी रात परिवार के साथ खाना खाने वाले पांच अन्य रिश्तेदार पूरी तरह स्वस्थ हैं। उन्होंने भी वही खाना खाया था, लेकिन उन्हें किसी तरह की तबीयत खराब नहीं हुई। इस वजह से जांचकर्ताओं का मानना है कि डोकाडिया परिवार की मौत की वजह खाने की मेज पर मौजूद कोई चीज नहीं थी।
पुलिस कर रही इस रिपोर्ट का इंतजार
अब पुलिस इस मामले की पूरी सच्चाई जानने के लिए फोरेंसिक जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं किसी रसायन या जहरीले पदार्थ की वजह से परिवार की मौत तो नहीं हुई। साथ ही आत्महत्या की साजिश समेत कई दूसरे पहलुओं की भी जांच की जा रही है। हालांकि, पुलिस का कहना है कि फिलहाल आत्महत्या की संभावना मजबूत नहीं लग रही है। जानकारी के मुताबिक, अब्दुल्ला डोकाडिया अंधेरी इलाके में मोबाइल एक्सेसरीज की दुकान चलाते थे। इसके अलावा परिवार को किराए पर दी गई संपत्तियों से भी अच्छी आय होती थी। पुलिस के अनुसार, परिवार किसी आर्थिक परेशानी से जूझता हुआ नहीं दिख रहा था। इसी वजह से जांचकर्ता फिलहाल यह मानकर नहीं चल रहे हैं कि परिवार के मुखिया ने किसी मजबूरी या तनाव में ऐसा कदम उठाया होगा।
थायरॉयड की बीमारी से जूझ रही पत्नी
जांच के दौरान यह भी पता चला कि अब्दुल्ला डोकाडिया को किडनी से जुड़ी समस्या थी, जबकि उनकी पत्नी नसरीन थायरॉयड की बीमारी से पीड़ित थीं। हालांकि, जांच अधिकारियों ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि दोनों की स्वास्थ्य समस्याएं इतनी गंभीर नहीं थीं कि परिवार किसी बड़ा कदम उठाने के बारे में सोचे। परिवार के रिश्तेदारों और आसपास रहने वाले लोगों के मुताबिक, अब्दुल्ला और नसरीन बेहद खुशमिजाज और मिलनसार स्वभाव के थे। वे अक्सर परिवार के कार्यक्रमों और समारोहों की योजना बनाने में सबसे आगे रहते थे। जानने वालों का कहना है कि बाहर से देखने पर परिवार की जिंदगी बिल्कुल सामान्य और खुशहाल नजर आती थी।
परिवार को दिया जा रहा था स्लो पॉइजन?
पुलिस ने इस संभावना की भी जांच की कि कहीं परिवार को लंबे समय तक थोड़ी-थोड़ी मात्रा में जहर तो नहीं दिया जा रहा था। इस तरीके को “स्लो पॉइजनिंग” कहा जाता है, जिसमें किसी व्यक्ति को समय-समय पर कम मात्रा में जहरीला पदार्थ दिया जाता है ताकि शक न हो। हालांकि, जांचकर्ताओं ने इस आशंका को फिलहाल खारिज कर दिया है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, एक अधिकारी ने कहा कि अगर ऐसा मामला होता, तो परिवार के चारों लोगों की मौत एक ही दिन में नहीं होती। अधिकारी के अनुसार, शुरुआती जांच से ऐसा लग रहा है कि मौत की वजह कोई अचानक और तत्काल असर करने वाली चीज हो सकती है।
मौत से पहले डायरी में लिखी थी ये बात
इस पूरे मामले की सबसे दर्दनाक बात परिवार की एक बेटी की डायरी मानी जा रही है। बताया जा रहा है कि बेटियों में से एक रोज डायरी लिखती थी। उसकी आखिरी एंट्री 25 अप्रैल की थी, यानी मौत से ठीक एक दिन पहले। उस डायरी में उसने सिर्फ इतना लिखा था कि उसने घर पर एक्सरसाइज किया। उसमें किसी डर, तनाव या झगड़े का कोई जिक्र नहीं था। न कोई उदासी दिखाई दी और न ही किसी तरह का अलविदा। वह बस एक सामान्य दिन जैसा लिखा गया नोट था — एक लड़की जिसने घर पर एक्सरसाइज की, परिवार के साथ तरबूज खाया और फिर अगली सुबह कभी नहीं उठ सकी। अब पुलिस पूरी तरह फोरेंसिक जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रही है, ताकि यह पता चल सके कि आखिर किस रसायन या जहरीले पदार्थ की वजह से परिवार की मौत हुई।