मुंबई: नाना पाटेकर... एक ऐसा नाम जो गुस्से, सादगी और सच्चाई का प्रतीक था। आज वह हमारे बीच नहीं हैं, नाना पाटेकर के जाने से अभिनय के एक युग का अंत हो गया है। वह ऐसे अभिनेता थे, जो अपनी आंखों से भी डायलॉग बोल दिया करते थे। लेकिन उनकी जिंदगी की कहानी किसी फिल्म से कम नहीं है। 13 साल की उम्र में 35 रुपये महीना कमाने वाले लड़के से 80 करोड़ की संपत्ति के मालिक बनने तक का सफर बेहद प्रेरणादायक है।
35 रुपये और एक वक्त के खाने से की शुरुआत
नाना पाटेकर का जन्म एक सम्पन्न परिवार में हुआ था, लेकिन पिता के एक करीबी ने धोखे से उनका पूरा बिजनेस हड़प लिया। परिवार सड़क पर आ गया। 13 साल की उम्र में नाना को काम करना पड़ा। वह स्कूल के बाद 8 किलोमीटर पैदल चलकर चुनाभट्टी में फिल्मों के पोस्टर पेंट करते थे, जिसके लिए उन्हें महीने के सिर्फ 35 रुपये और एक वक्त का खाना मिलता था। उन्होंने खुद एक इंटरव्यू में बताया था कि उनके पिता अक्सर कहते थे - "बच्चों के खाने के दिन हैं और मेरे पास कुछ नहीं है।" इसी सदमे में जब नाना 28 साल के थे, उनके पिता का हार्ट अटैक से निधन हो गया।
पहली सैलरी 750 रुपये, आज 1 फिल्म के 2-3 करोड़
जब उन्होंने 1978 में 'गमन' से एक्टिंग शुरू की तो पहली सैलरी सिर्फ 750 रुपये थी। तब उनकी पत्नी नीलकांति बैंक में नौकरी करके 2000 रुपये कमाती थीं और घर चलाती थीं। आज उनकी नेटवर्थ करीब 80 करोड़ रुपये (लगभग 9-10 मिलियन डॉलर) आंकी जाती है।
करोड़पति होकर भी फकीरों जैसी जिंदगी
नाना पाटेकर की सबसे बड़ी खासियत उनकी सादगी थी। 80 करोड़ होने के बाद भी वह लग्जरी लाइफ से दूर रहे। 2015 में जब महाराष्ट्र में सूखा पड़ा, तो उन्होंने बिना किसी प्रचार के लातूर और विदर्भ के 100 से ज्यादा किसान परिवारों को चेक बांटे थे। इसके लिए उन्होंने 'नाम फाउंडेशन' भी बनाया। कहते हैं, असली अमीरी बैंक बैलेंस में नहीं, सोच में होती है और नाना पाटेकर इसका सबसे बड़ा उदाहरण थे।