National Herald case: नेशनल हेराल्ड मामले में कांग्रेस नेताओं सोनिया गांधी और राहुल गांधी की फिर से मुश्किलें बढ़ने वाली है। दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार (22 दिसंबर) को सोनिया गांधी, राहुल गांधी और अन्य से प्रवर्तन निदेशालय (ED) की याचिका पर जवाब देने को कहा। ED की याचिका में नेशनल हेराल्ड मामले में उनके खिलाफ दायर आरोपपत्र पर संज्ञान लेने से इनकार करने वाले निचली अदालत के आदेश को चुनौती दी गई है।
जस्टिस रविंदर डुडेजा ने गांधी परिवार और अन्य लोगों को मुख्य याचिका के साथ-साथ ED के उस आवेदन पर भी नोटिस जारी किया, जिसमें 16 दिसंबर के निचली अदालत के आदेश पर रोक लगाने का अनुरोध किया गया है। निचली अदालत ने कहा था कि इस मामले में एजेंसी की शिकायत का संज्ञान लेना कानूनी रूप से अस्वीकार्य है क्योंकि यह FIR (फर्स्ट इन्फॉर्मेशन रिपोर्ट) पर आधारित नहीं है।
हाई कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 12 मार्च 2026 की तारीख तय की है। इस मामले में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने ईडी का प्रतिनिधित्व किया। जबकि वरिष्ठ वकील अभिषेक सिंघवी और आर एस चीमा ने गांधी परिवार की ओर से पैरवी की।
निचली अदालत ने अपने आदेश में कहा कि प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) की अनुसूची में उल्लिखित अपराध के लिए FIR के अभाव में मनी लॉन्ड्रिंग के क्राइम से संबंधित जांच और उसके परिणामस्वरूप प्रॉसिक्यूशन शिकायत (आरोपपत्र के समकक्ष) मान्य नहीं है। अदालत ने कहा कि एजेंसी की जांच एक निजी शिकायत के आधार पर शुरू हुई थी, न कि FIR के आधार पर।
निचली अदालत ने कहा था कि बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी की तरफ से की गई शिकायत और उसके परिणामस्वरूप 2014 में जारी किए गए समन आदेश के बावजूद केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने कथित अनुसूचित अपराध के संबंध में आज तक FIR दर्ज करने से परहेज किया है।
ED ने सोनिया और राहुल गांधी के साथ-साथ कांग्रेस के दिवंगत नेताओं मोतीलाल वोरा और ऑस्कर फर्नांडीस, सुमन दुबे, सैम पित्रोदा और एक निजी कंपनी यंग इंडियन पर साजिश और मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगाया है। आरोप है कि उन्होंने एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) की लगभग 2,000 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियों का अधिग्रहण किया।
यह कंपनी 'नेशनल हेराल्ड' अखबार का प्रकाशन करती है। जांच एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया है कि गांधी परिवार की 'यंग इंडियन' में 76 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। आरोप है कि देश की सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी ने 90 करोड़ रुपये के लोन के बदले कथित तौर पर धोखाधड़ी से एजेएल की संपत्तियों पर कब्जा कर लिया।