Middle East Conflict: मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और तनाव के बीच भारत सरकार अपने नागरिकों को सुरक्षित निकालने के प्रयासों में लगी हुई है। मंगलवार, 17 मार्च को एक अंतर-मंत्रालयी ब्रीफिंग में विदेश मंत्रालय (MEA) ने बताया कि 28 फरवरी को संघर्ष शुरू होने के बाद से अब तक करीब 2.44 लाख भारतीय सुरक्षित स्वदेश लौट चुके हैं। युद्ध के बीच फंसे हुए भारतीयों को वापस लाने के लिए बड़े स्तर पर प्रयास जारी है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि भारतीयों को निकालने के लिए वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल किया जा रहा है। लगभग 700 भारतीय नागरिक ईरान से जमीनी रास्ते के जरिए आर्मेनिया और अजरबैजान पहुंच चुके हैं, जहां से वे भारत लौट रहे हैं। ईरान गए 284 तीर्थयात्री सफलतापूर्वक आर्मेनिया पहुंच गए हैं, जिनमें से 130 लोग आज दिल्ली पहुंच जाएंगे। इराक के बसरा में एक हादसे के बाद रेस्क्यू किए गए 15 भारतीय क्रू मेंबर्स फिलहाल एक सुरक्षित होटल में ठहरे हुए हैं। मिशन की टीम उनकी जल्द भारत वापसी के लिए इराकी अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में है।
मंत्रालय का कंट्रोल रूम 24 घंटे काम कर रहा है। राहत की बात यह है कि अब मदद के लिए आने वाले कॉल्स और ईमेल की संख्या में काफी कमी आई है।
हवाई सेवाओं की क्या है स्थिति?
हवाई क्षेत्र बंद होने के बावजूद सीमित स्तर पर विमानों का संचालन जारी है। यूएई से भारत के लिए रोजाना 65-70 उड़ानें ऑपरेट हो रही हैं। ओमान से भी उड़ानें जारी हैं। कतर का एयरस्पेस आंशिक रूप से खुला है, जहां से कतर एयरवेज की कुछ उड़ानें चल रही हैं। वहीं, कुवैत का एयरस्पेस 28 फरवरी से पूरी तरह बंद है।
अब तक 5 भारतीयों की गई जान
युद्ध की विभीषिका के बीच कुछ परेशान करने वाली खबरें भी सामने आई हैं। युद्ध के दौरान अब तक 5 भारतीय नागरिकों की मौत हो चुकी है, जबकि एक नागरिक अभी भी लापता है। ओमान के सोहार शहर में जान गंवाने वाले दो भारतीयों के पार्थिव शरीर मंगलवार को जयपुर पहुंचे, जिन्हें उनके परिवारों को सौंप दिया गया है। इराक में जान गंवाने वाले एक अन्य भारतीय के शव को वापस लाने की प्रक्रिया जारी है।
BRICS और वैश्विक कूटनीति पर भारत का रुख
ब्रिक्स समूह के स्टैंड पर पूछे गए सवाल पर विदेश मंत्रालय ने कहा, 'ब्रिक्स में ईरान, यूएई और मिस्र जैसे देश भी शामिल हैं, जो इस संघर्ष में सीधे तौर पर प्रभावित हैं। इस वजह से सदस्य देशों के बीच एक साझा राय बनाना मुश्किल हो रहा है। वहीं विदेश मंत्री एस जयशंकर ने हाल ही में ब्रुसेल्स में यूरोपीय संघ के नेताओं से मुलाकात की। वहां उन्होंने कहा कि, 'युद्ध का अंत केवल संवाद और कूटनीति से ही संभव है'।