बिहार सरकार का बड़ा फैसला, NEET आंदोलन से जुड़े छात्रों पर दर्ज केस होंगे वापस

बिहार बंद के दौरान सिवान जिले में एक पुलिसकर्मी द्वारा AK-47 राइफल से फायरिंग किए जाने के आरोप के बाद मामला और गरमा गया। इस घटना को लेकर राजनीतिक विवाद भी तेज हो गया। बिहार पुलिस ने बताया कि सिवान शहर के जेपी चौक पर तैनात कांस्टेबल अभिषेक कुमार को निलंबित कर दिया गया है। पुलिस के मुताबिक, बंद समर्थकों ने सुरक्षाकर्मियों को घेर लिया था

अपडेटेड Jul 27, 2026 पर 10:27 PM
बिहार में NEET आंदोलन से जुड़े छात्रों पर दर्ज केस होंगे वापस

बिहार सरकार ने सोमवार को बड़ा फैसला लेते हुए NEET पेपर लीक मामले को लेकर हुए हालिया प्रदर्शन में शामिल छात्रों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने का आदेश दिया है। साथ ही आंदोलन के दौरान हिरासत में लिए गए सभी लोगों को तुरंत रिहा करने के निर्देश भी दिए हैं। गृह विभाग की ओर से जारी अधिसूचना में कहा गया है कि 26 जुलाई 2026 की शाम 6 बजे तक बिहार में कहीं भी हुए प्रदर्शन में शामिल किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कोई दंडात्मक या बदले की भावना से कार्रवाई नहीं की जाएगी।

सरकार ने यह भी आदेश दिया है कि तय समय सीमा से पहले जिन लोगों को इन मामलों में गिरफ्तार किया गया था या हिरासत में लिया गया था, उन्हें बिना देरी के तुरंत रिहा किया जाए।

बिहार में कई दिनों तक चला छात्रों का प्रदर्शन


यह फैसला 20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर के पास प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई के बाद लिया गया। इस घटना के बाद बिहार में छात्र संगठनों ने कई दिनों तक लगातार विरोध प्रदर्शन किए। आंदोलन तेज होने पर 25 जुलाई को पूरे राज्य में बिहार बंद भी बुलाया गया। इससे पहले बिहार पुलिस ने बताया कि बंद लागू कराने की कोशिश के दौरान 694 लोगों को हिरासत में लिया गया था। इनमें करीब आधे नाबालिग थे। पुलिस के अनुसार, कई जगहों पर प्रदर्शन हिंसक हो गए थे। इन घटनाओं में 91 पुलिसकर्मी और सरकारी कर्मचारी, दो प्रशासनिक अधिकारी तथा 13 आम नागरिक घायल हुए।

AK-47 से फायरिंग के आरोप पर बढ़ा विवाद

बिहार बंद के दौरान सिवान जिले में एक पुलिसकर्मी द्वारा AK-47 राइफल से फायरिंग किए जाने के आरोप के बाद मामला और गरमा गया। इस घटना को लेकर राजनीतिक विवाद भी तेज हो गया। बिहार पुलिस ने बताया कि सिवान शहर के जेपी चौक पर तैनात कांस्टेबल अभिषेक कुमार को निलंबित कर दिया गया है। पुलिस के मुताबिक, बंद समर्थकों ने सुरक्षाकर्मियों को घेर लिया था। इसके बाद कांस्टेबल ने हवा में चार राउंड फायरिंग की। इस घटना के बाद विपक्ष ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया। विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने सवाल उठाया कि ऐसी स्थिति में AK-47 का इस्तेमाल क्यों किया गया। उन्होंने पूरे मामले पर सरकार से जवाब मांगा और जिम्मेदारी तय करने की मांग की।

तेजस्वी यादव ने बड़े आंदोलन की दी चेतावनी 

विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने पहले ही मांग की थी कि आंदोलन के दौरान हिरासत में लिए गए सभी छात्रों को रिहा किया जाए और उनके खिलाफ दर्ज सभी मुकदमे वापस लिए जाएं। उन्होंने चेतावनी भी दी थी कि अगर सरकार ने ऐसा नहीं किया, तो विपक्ष बड़ा आंदोलन शुरू करेगा। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर किए गए एक पोस्ट में तेजस्वी यादव ने सरकार पर लोकतांत्रिक मूल्यों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि देश में पहली बार प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर AK-47 से फायरिंग की गई। तेजस्वी यादव ने यह भी आरोप लगाया कि छात्र प्रतिनिधियों से सहमति बनने के बावजूद हजारों छात्रों को हिरासत में लिया गया, उनके खिलाफ मामले दर्ज किए गए और उनके परिवारों को परेशान किया गया। उन्होंने कहा कि अगर छात्रों को जल्द रिहा नहीं किया गया, तो एनडीए सरकार को इसका राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ेगा।

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