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NEET-PG 2025: अब माइनस स्कोर वाले भी बन सकेंगे स्पेशलिस्ट डॉक्टर! NEET-PG की कट-ऑफ में ऐतिहासिक गिरावट; जानिए क्या है असली वजह?

NEET-PG 2025 Cutoff Controversy: इस फैसले ने सोशल मीडिया और मेडिकल जगत में एक नई बहस छेड़ दी है। आलोचकों का मानना है कि यह कदम चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता को नुकसान पहुंचाएगा। लोगों का तर्क है कि जो डॉक्टर प्रवेश परीक्षा में न्यूनतम अंक भी नहीं ला पा रहे, उन्हें स्पेशलिस्ट बनाना मरीजों के जीवन के साथ खिलवाड़ हो सकता है

Curated By: Abhishek Guptaअपडेटेड Jan 14, 2026 पर 3:24 PM
NEET-PG 2025: अब माइनस स्कोर वाले भी बन सकेंगे स्पेशलिस्ट डॉक्टर! NEET-PG की कट-ऑफ में ऐतिहासिक गिरावट; जानिए क्या है असली वजह?
केंद्र सरकार ने मेडिकल कॉलेजों में खाली पड़ी 9,000 से अधिक पीजी सीटों को भरने के उद्देश्य से NEET-PG 2025 के क्वालिफाइंग कट-ऑफ में भारी कमी की है

NEET-PG Cutoff 2025: अक्सर हमने सुन हैं कि डॉक्टर बनने के लिए खूब पढ़ाई करनी पड़ती है और मुश्किल एग्जाम निकलना पड़ता है। लेकिन केंद्र सरकार और नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशंस (NBEMS) ने एक ऐसा फैसला लिया है जो इसके बिल्कुल उलट प्रतीत होता है। एंट्रेंस एग्जाम में माइनस में नंबर पाने वाले अभ्यर्थी भी NEET-PG में दाखिला लेने के लिए एलीजिबल है। दरअसल NBEMS ने NEET-PG 2025 के लिए क्वालिफाइंग कट-ऑफ को लगभग खत्म कर दिया है। इस फैसले के बाद अब वे उम्मीदवार भी MD और MS की सीटों के लिए काउंसलिंग में भाग ले सकेंगे, जिनका स्कोर नेगेटिव (-40) तक चला गया है। इस फैसले की सोशल मीडिया पर खूब चर्चा हो रही है।

कट-ऑफ में क्या हुआ बदलाव?

केंद्र सरकार ने मेडिकल कॉलेजों में खाली पड़ी 9,000 से अधिक पीजी सीटों को भरने के उद्देश्य से NEET-PG 2025 के क्वालिफाइंग कट-ऑफ में भारी कमी की है। इस संशोधित नीति के तहत सामान्य/EWS श्रेणी के लिए पर्सेंटाइल को 50th से घटाकर 7th और विकलांग श्रेणी (Gen-PwBD) के लिए 45th से घटाकर 5th कर दिया गया है। सबसे चौंकाने वाला बदलाव SC, ST और OBC श्रेणियों के लिए है, जहां पर्सेंटाइल को 40 से घटाकर सीधे 0 (शून्य) कर दिया गया है, जिसका अर्थ है कि नेगेटिव मार्किंग के कारण अब -40 अंक पाने वाले उम्मीदवार भी काउंसलिंग के लिए पात्र माने जाएंगे। सरकार और NBEMS का तर्क है कि यह कदम रेजिडेंट डॉक्टरों की कमी को दूर करने और देश के कीमती मेडिकल संसाधनों को बर्बाद होने से बचाने के लिए उठाया गया है, हालांकि विशेषज्ञ चिकित्सा शिक्षा के गिरते मानकों को लेकर इसकी तीखी आलोचना कर रहे हैं।

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