E20 petrol Row: केंद्र सरकार ने पहली बार साफ किया है कि E20 पेट्रोल (20% इथेनॉल-ब्लेंडेड ईंधन) से BS-III कैटेगरी के कुछ पुराने वाहनों में रबर के कुछ पार्ट्स और गैस्केट बदलने की जरूरत पड़ सकती है। हालांकि, सरकार ने यह भी कहा है कि इस ईंधन से वाहन के इंजन या उसके प्रदर्शन पर कोई बड़ा नकारात्मक असर नहीं देखा गया है। सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने बुधवार (29 जुलाई) को राज्यसभा को बताया कि 2005 और 2016 के बीच बनी BS-III गाड़ियों में E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने पर कुछ रबर पार्ट्स और गास्केट बदलने पड़ सकते हैं।
साथ ही, उन्होंने कहा कि स्टडीज़ में इस ब्लेंडेड फ्यूल का गाड़ी की परफॉर्मेंस पर कोई बड़ा असर नहीं देखा गया है। 'टाइम्स ऑफ इंडिया' के मुताबिक, एक सवाल के जवाब में गडकरी ने कहा कि IOCL, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम, सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स और ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) की स्टडीज से पता चला है कि E20 फ्यूल के साथ टेस्ट करने पर भी BS-VI गाड़ियां एमिशन नॉर्म्स को पूरा करती रहीं।
गडकरी ने आगे कहा कि स्टडीज में यह भी पाया गया कि BS-VI वाहन E20 पेट्रोल के इस्तेमाल के बावजूद निर्धारित उत्सर्जन (Emission) मानकों का पालन करते हैं। यानी नए वाहनों पर E20 ईंधन का कोई बड़ा नकारात्मक प्रभाव नहीं पाया गया।
'इंजन में बदलाव की जरूरत नहीं'
गडकरी ने आगे कहा कि स्टडीज में कार और टू-व्हीलर के इंजन में बदलाव की कोई जरूरत नहीं दिखी है। केंद्रीय मंत्री ने कहा, "इन स्टडीज से पुष्टि हुई है कि पुरानी गाड़ियों की परफॉर्मेंस में भी कोई खास बदलाव नहीं आया और न ही E20 फ्यूल के साथ चलाने पर उनमें कोई असामान्य टूट-फूट देखी गई। ड्राइव करने में आसानी, स्टार्ट होने की क्षमता, मेटल कम्पैटिबिलिटी और प्लास्टिक कम्पैटिबिलिटी जैसे पैरामीटर्स में कोई समस्या नहीं पाई गई।"
हालांकि, मंत्री ने कहा कि 2016 से पहले बनी BS-III गाड़ियों के टेस्ट से संकेत मिला है कि कुछ रबर पार्ट्स और गास्केट बदलने पड़ सकते हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, गडकरी का यह बयान ऐसे समय आया है जब हाल ही में ARAI की एक रिपोर्ट में यह निष्कर्ष निकाला गया था कि E20 फ्यूल से E10 कम्पैटिबल गाड़ियों के रबर पार्ट्स को नुकसान हो सकता है।
माइलेज को लेकर क्या बोले गडकरी?
ईंधन की क्षमता (माइलेज) को लेकर जताई जा रही चिंताओं पर बात करते हुए गडकरी ने कहा कि ऑटोमोबाइल बनाने वाली कंपनियों और गाड़ियों की टेस्टिंग करने वाली एजेंसियों ने साफ किया है कि माइलेज कई चीजों पर निर्भर करता है। इसे सिर्फ E20 ईंधन के इस्तेमाल से नहीं जोड़ा जा सकता।
मंत्री ने आगे कहा कि 26 दिसंबर 2020 को नीति आयोग द्वारा बनाई गई एक अंतर-मंत्रालयी समिति ने पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने से जुड़ी गाड़ी की अनुकूलता, माइलेज और दक्षता जैसे पहलुओं की विस्तार से जांच की थी। समिति के आकलन को इंडियन ऑयल, ARAI और SIAM द्वारा की गई स्टडीज़ का समर्थन मिला था।
समिति की रिपोर्ट का शीर्षक 'भारत में इथेनॉल ब्लेंडिंग के लिए रोडमैप 2020-25' था। यह E20 ईंधन के लॉन्च से पहले जून 2021 में जारी की गई थी। इसमें ऑटोमोबाइल बनाने वाली कंपनियों, तेल मार्केटिंग कंपनियों और कृषि विशेषज्ञों से बातचीत के बाद मटीरियल की अनुकूलता, इंजन कैलिब्रेशन, फ्यूल सिस्टम, गाड़ी चलाने में आसानी, टिकाऊपन, उत्सर्जन और ईंधन की दक्षता की जांच की गई थी।
सरकार का कहना है कि माइलेज में कमी कई बातों पर निर्भर करती है। जैसे ड्राइविंग की आदतें, मेंटेनेंस (जैसे ऑयल और एयर-फिल्टर बदलना), टायर का प्रेशर, व्हील अलाइनमेंट और एयर-कंडीशनर का इस्तेमाल। गडकरी ने कहा कि इथेनॉल-ब्लेंडेड पेट्रोल (EBP) प्रोग्राम को "चरणबद्ध, कैलिब्रेटेड, वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित और सलाह-मशविरे पर आधारित तरीके" से लागू किया गया है।