नोएडा में इन दिनों श्रमिक असंतोष का दायरा लगातार बढ़ता नजर आ रहा है। पहले प्राइवेट कंपनियों के कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर मोर्चा खोला था, और अब हाउसिंग सोसाइटी में काम करने वाली घरेलू सहायिकाएं भी सड़कों पर उतर आई हैं। सेक्टर-137 की कई बड़ी सोसाइटी के बाहर जुटी इन मेड्स ने एकजुटता दिखाते हुए अपनी आवाज बुलंद की है। उनका कहना है कि लंबे समय से चली आ रही समस्याओं को अब अनदेखा नहीं किया जा सकता।
धीरे-धीरे ये विरोध सिर्फ एक जगह तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि आसपास की सोसाइटी में भी इसका असर दिखने लगा है। कामगारों की ये एकजुटता साफ संकेत दे रही है कि अब वो अपने हक और बेहतर कामकाजी हालात के लिए खुलकर सामने आने को तैयार हैं।
वेतन और नियमों को लेकर नाराजगी
प्रदर्शन कर रही मेड्स का कहना है कि उन्हें काम के मुताबिक सही मेहनताना नहीं मिल रहा। साथ ही काम के घंटे भी तय नहीं हैं, जिससे उनकी दिनचर्या प्रभावित होती है। इसके अलावा सोसाइटी के सख्त नियम—जैसे एंट्री-एग्जिट पर पाबंदी, आईडी कार्ड की अनिवार्यता और लिफ्ट इस्तेमाल पर रोक—उन्हें लगातार परेशान कर रहे हैं।
सम्मान की मांग भी बनी बड़ी वजह
कुछ कामगारों ने ये भी आरोप लगाया कि कई जगहों पर उनके साथ सम्मानजनक व्यवहार नहीं किया जाता। उनका कहना है कि वो सिर्फ बेहतर वेतन ही नहीं, बल्कि सम्मान और सुविधाजनक कामकाज का माहौल भी चाहती हैं।
वहीं सोसाइटी प्रबंधन का कहना है कि ये नियम सुरक्षा के लिहाज से बनाए गए हैं। हर कर्मचारी की पहचान सुनिश्चित करना जरूरी है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वे बातचीत के जरिए इस विवाद का समाधान निकालने के लिए तैयार हैं।
सुरक्षा के बीच जारी प्रदर्शन
स्थिति को काबू में रखने के लिए सोसाइटी के गार्ड और प्रबंधन टीम के साथ-साथ पुलिस बल भी मौके पर तैनात है। प्रशासन इस बात का ध्यान रख रहा है कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण बना रहे।
प्राइवेट कर्मचारियों का आंदोलन भी जारी
दूसरी ओर, नोएडा में प्राइवेट कंपनियों के कर्मचारी भी पिछले कई दिनों से विरोध कर रहे हैं। उनकी मांग है कि न्यूनतम वेतन 20 हजार रुपये किया जाए। सरकार ने हाल ही में करीब 3000 रुपये की बढ़ोतरी का ऐलान किया है, लेकिन कर्मचारी इससे संतुष्ट नहीं हैं।
सेक्टर-63 में विरोध के बीच कर्मचारियों ने काम भी शुरू कर दिया है, हालांकि कुछ जगहों पर तनाव की स्थिति बनी रही। वहीं ग्रेटर नोएडा में एक निजी यूनिवर्सिटी के कर्मचारी भी वेतन और ओवरटाइम को लेकर धरने पर बैठे हैं। कुल मिलाकर नोएडा में इन दिनों कामगारों की आवाज लगातार बुलंद होती जा रही है।