Noida Protest: राजधानी दिल्ली से सटे उत्तर प्रदेश के नोएडा में सैलरी बढ़ोतरी की मांग को लेकर तीन दिनों से चल रहा श्रमिकों का विरोध-प्रदर्शन सोमवार (13 अप्रैल) को हिंसक हो गया। नोएडा पुलिस और मजदूरों के बीच झड़प हुई। इस दौरान मजदूरों ने गाड़ियों में जमकर तोड़फोड़ और आगजनी की। इसके बाद पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागकर स्थिति को कंट्रोल किया। नोएडा के फेज 2 में सोमवार सुबह उस समय हिंसा भड़क उठी, जब मजदूर अपनी सैलरी बढ़ोतरी की मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन करने के लिए तीसरे दिन इकट्ठा हुए।
विरोध प्रदर्शन के दौरान गाड़ियों में तोड़फोड़ की गई। कई गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया गया। इस दौरान पत्थरबाजी भी हुई। इससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और हालात पर काबू पाने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया।
विरोध-प्रदर्शन कर रहे मजदूरों ने कई मांगें रखी हैं। इनमें बोनस का भुगतान, साप्ताहिक अवकाश, ओवरटाइम की सैलरी और समय पर वेतन मिलना शामिल था। उन्होंने यौन उत्पीड़न निवारण समिति, शिकायत निवारण सेल के गठन और सैलरी पर्ची जारी करने की भी मांग की है।
तीन दिन से जारी है प्रदर्शन
शनिवार को थाना फेस-2, फेस-3 और ईकोटेक-3 क्षेत्रों में श्रमिकों ने उग्र प्रदर्शन किया था। कई स्थानों पर पथराव की घटनाएं हुईं, जिसमें कुछ पुलिसकर्मी घायल हुए। पुलिस कार्रवाई में भी कुछ लोगों के घायल होने की सूचना है। जबकि एक महिला के गंभीर रूप से घायल होने की चर्चा है, जिसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है। प्रशासन, श्रम विभाग और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी लगातार श्रमिकों और उद्योगपतियों से संवाद कर स्थिति को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने का प्रयास कर रहे हैं।
गौतम बुद्ध नगर में पिछले तीन दिनों से जारी श्रमिकों के उग्र आंदोलन को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस पूरी तरह सतर्क हो गए हैं। जिलाधिकारी मेधा रूपम ने रविवार को उद्योगपतियों और विभिन्न औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर स्थिति की समीक्षा की। जिलाधिकारी ने बताया कि संभावित प्रदर्शन को देखते हुए सेक्टर, जोनल और 'स्टेटिक मजिस्ट्रेट' की तैनाती की गई है। कुछ संवेदनशील क्षेत्रों को चिन्हित कर वहां विशेष रूप से अधिकारियों को तैनात किया गया है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।
नौकरी से नहीं निकाला जाएगा
उन्होंने सभी कंपनियों को निर्देश दिए हैं कि प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों को नोटिस बोर्ड पर अनिवार्य रूप से चस्पा किया जाए, जिससे श्रमिकों में किसी प्रकार का भ्रम न रहे। बैठक में स्पष्ट किया गया कि किसी भी श्रमिक को अनावश्यक रूप से नौकरी से नहीं निकाला जाएगा। ओवरटाइम और रविवार को कार्य कराने पर दोगुना भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा। इसके अलावा साप्ताहिक अवकाश, समय पर वेतन भुगतान (हर माह की 10 तारीख तक), सैलरी पर्ची तथा 30 नवंबर तक बोनस का भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रशासन ने यह भी कहा कि कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न रोकथाम समिति का गठन अनिवार्य होगा, जिसकी अध्यक्ष महिला होगी। शिकायत पेटी की व्यवस्था कर श्रमिकों के साथ सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित किया जाएगा। आंदोलन में शामिल किसी भी श्रमिक के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई न करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
जिलाधिकारी ने कहा कि श्रमिकों के अधिकारों का हनन किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। संबंधित विभागों को नियमित निरीक्षण कर अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि जिले में औद्योगिक शांति बनी रहे। साथ ही, जो श्रमिक काम करना चाहते हैं, उन्हें किसी प्रकार की असुविधा न हो, यह भी सुनिश्चित किया जाएगा।
कानून-व्यवस्था की समीक्षा
इस बीच, पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने भी थाना फेस-2 में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर कानून-व्यवस्था की समीक्षा की। अपर पुलिस आयुक्त (कानून-व्यवस्था) राजीव नारायण मिश्र ने बताया कि स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है। ड्रोन के जरिए निगरानी की जा रही है।