Noorjahan Mango: एक आम की कीमत ₹3,800...आखिर नूरजहां मैंगो में क्या होता है खास? दुनियाभर के लोग हैं दीवाने

Noorjahan Mango: 'आमों की मलिका' कही जाने वाली ‘नूरजहां’ आम की फसल इन दिनों सुर्खियों में है। किसानों का कहना है कि ‘नूरजहां’ के पेड़ों पर लगे कुछ बड़े फलों का वजन इस महीने के आखिर तक चार किलोग्राम तक पहुंच सकता है। मौजूदा मौसम में आम की इस दुर्लभ प्रजाति के अब तक के सबसे बड़े फल का वजन 3.30 किलोग्राम रहा जिसे 3,800 रुपये में बेचा गया है

अपडेटेड Jun 16, 2026 पर 4:25 PM
Noorjahan Mango: मध्य प्रदेश में 3.30 किलोग्राम का ‘नूरजहां’ आम 3,800 रुपये में बिका

Noorjahan Mango: मध्य प्रदेश के आलीराजपुर जिले के कट्ठीवाड़ा क्षेत्र में ‘आमों की मलिका’ कही जाने वाली ‘नूरजहां’ किस्म की फसल इन दिनों सुर्खियों में है। उत्पादकों के मुताबिक मौजूदा मौसम में आम की इस दुर्लभ प्रजाति के अब तक के सबसे बड़े फल का वजन 3.30 किलोग्राम रहा जिसे 3,800 रुपये में बेचा गया है। 'नूरजहां' आम भारत की सबसे चर्चित और विशाल आकार वाली आम की किस्मों में से एक है। यह मुख्य रूप से मध्य प्रदेश के आलीराजपुर जिले के कट्ठीवाड़ा क्षेत्र में पाया जाता है।

किसानों का कहना है कि ‘नूरजहां’ के पेड़ों पर लगे कुछ बड़े फलों का वजन इस महीने के आखिर तक चार किलोग्राम तक पहुंच सकता है। इंदौर से करीब 250 किलोमीटर दूर कट्ठीवाड़ा क्षेत्र के आम उत्पादक भरतराज सिंह जादव ने मंगलवार (16 जून) को पीटीआई को बताया, "इस मौसम में नूरजहां आम की फसल संतोषजनक रही है। मेरे बाग में अब तक का सबसे बड़ा नूरजहां आम 3.30 किलोग्राम वजन का रहा जिसे मैंने 3,800 रुपये में बेचा।"

उन्होंने कहा कि उनके बाग में 'नूरजहां' आम के पेड़ों पर अभी कई फल लगे हैं जिनका अंतिम वजन तोड़े जाने के बाद ही पता चलेगा। जादव ने बताया कि उनके बाग में 'नूरजहां' आम के दो पुराने और 11 नs ‘ग्राफ्टेड’ (कलम लगाकर तैयार किए गए) पेड़ हैं। उन्होंने कहा कि नये पेड़ों पर भी फल आने शुरू हो गए हैं और भविष्य में उत्पादन बढ़ने की उम्मीद है।


UAE पहुंचीं 'आमों की मलिका'

जादव के अनुसार, इन दिनों 'नूरजहां' आम की मांग मध्य प्रदेश के साथ ही राजस्थान, महाराष्ट्र और गुजरात से आ रही है। आम उत्पादक ने बताया कि हाल ही में तमिलनाडु से भी इसके फलों के बारे में पूछताछ हुई है। उन्होंने कहा कि इस मौसम में उनके बाग के 'नूरजहां' आम संयुक्त अरब अमीरात (UAE), अमेरिका और स्पेन तक भी पहुंचे हैं। हालांकि, इन्हें सीधे निर्यात नहीं किया गया। बल्कि लोग अपने परिचितों के माध्यम से इन्हें विदेश ले गए।

सुरक्षाकर्मी कर रहे हैं आमों की सुरक्षा

जादव ने बताया कि उनके बाग में अलग-अलग किस्मों के आमों के करीब 2,500 पेड़ हैं। उन्होंने कहा कि बाग की सुरक्षा के लिए 10 गार्ड तैनात किए गए हैं क्योंकि 'नूरजहां' आम की कीमत अधिक होने के कारण इसकी विशेष निगरानी रखनी पड़ती है।

जादव ने कहा, "हम नूरजहां आम की खेती में रासायनिक पदार्थों का इस्तेमाल नहीं करते। हम जंगल और प्राकृतिक स्रोतों से मिलने वाले जैविक अवशेषों का उपयोग पेड़ों की देखभाल में करते हैं।" कट्ठीवाड़ा में आमों के एक अन्य उत्पादक शिवराज जादव ने बताया कि उनके बाग में 'नूरजहां' के छह पेड़ हैं।

रोचक तथ्य

उन्होंने बताया, "इन पेड़ों पर फिलहाल करीब तीन किलोग्राम वजन के कई फल लगे हुए हैं और कुछ बड़े फल अभी पूरी तरह तैयार नहीं हुए हैं। मुझे उम्मीद है कि कुछ आमों का वजन चार किलोग्राम तक पहुंच सकता है।"

आम उत्पादकों ने बताया कि 'नूरजहां' के पेड़ों पर जनवरी से बौर आने शुरू होते हैं और इसके फल जून तक पककर बिक्री के लिए तैयार हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि कुछ दशक पहले 'नूरजहां' आम का अधिकतम वजन 4.50 किलोग्राम तक हुआ करता था जो अब घटकर आमतौर पर 3.50 से 3.80 किलोग्राम के बीच रह गया है।

नूरजहां आम को अक्सर 'आमों की रानी' या 'जायंट मैंगो' कहा जाता है क्योंकि इसका आकार लोगों को सबसे ज्यादा आकर्षित करता है। यह आम देखने में ही इतना बड़ा होता है कि एक फल पूरे परिवार के लिए पर्याप्त हो सकता है।

नूरजहां आम की बड़ी खासियत

  • नूरजहां आम का आकार सामान्य आमों से कई गुना बड़ा होता है।
  • एक नूरजहां आम का वजन आमतौर पर 2 से 4 किलोग्राम तक हो सकता है। जबकि कुछ फलों का वजन इससे भी अधिक दर्ज किया गया है।
  • इसकी लंबाई लगभग 10–14 इंच तक पहुंच सकती है।
  • यह आम स्वाद बेहद मीठा और गूदा अधिक होता है।

नाम की कहानी

माना जाता है कि यह किस्म अफगानिस्तान क्षेत्र से भारत आई थी। इसका नाम मुगल सम्राट Nur Jahan के नाम पर पड़ा है।

आम की कीमत

  • नूरजहां आम की मांग काफी अधिक रहती है।
  • मौसम और उत्पादन के अनुसार एक फल की कीमत सैकड़ों से लेकर हजारों रुपये तक पहुंच सकती है।
  • कई बार इसकी अग्रिम बुकिंग भी की जाती है।

उत्पादन डिटेल्स

  • यह आम सीमित क्षेत्र में ही अच्छी तरह उगता है।
  • मौसम में बदलाव, गर्मी और वर्षा का सीधा असर इसके उत्पादन पर पड़ता है।
  • इसलिए हर साल इसकी उपलब्धता अलग-अलग हो सकती है।

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