मुंबई-अहमदाबाद ही नहीं 7 नई बुलेट ट्रेन परियोजनाएं भी होंगी एक जैसे डिजाइन पर! 350 किमी/घंटा स्पीड वाले नेटवर्क पर बिग अपडेट
Bullet Train Network: देश में तेज रफ्तार रेल नेटवर्क को बढ़ावा देने के लिए सरकार नई तैयारी में जुटी है। मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट से मिले अनुभवों को आधार बनाकर रेल मंत्रालय अब 7 नई बुलेट ट्रेन परियोजनाओं के लिए एक ऐसा साझा डिजाइन तैयार कर रहा है, जिससे काम ज्यादा आसान और तेज हो सके।
मुंबई-अहमदाबाद ही नहीं 7 नई बुलेट ट्रेन परियोजनाएं भी होंगी एक जैसे डिजाइन पर!
Bullet Train Network: देश में हाई-स्पीड रेल कनेक्टिविटी को विस्तार देने के लिए रेल मंत्रालय एक बड़े और इंटिग्रेटेड प्लान पर काम कर रहा है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक देश के पहले हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट से मिले सबकों के आधार पर सरकार अब आने वाली 7 नई बुलेट ट्रेन परियोजनाओं के लिए एक कॉमन डिजाइन फ्रेमवर्क तैयार कर रही है। इस मानक डिजाइन फ्रेमवर्क के तहत देश के पूरे हाई-स्पीड रेल नेटवर्क का ढांचा एक समान तकनीकी मापदंडों पर विकसित किया जाएगा।
राज्यसभा में एक सवाल का जवाब देते हुए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने जानकारी दी कि नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) ने भविष्य के हाई-स्पीड कॉरिडोर के लिए साझा डिजाइन और टेक्निकल स्पेसिफिकेशन विकसित करना शुरू कर दिया है।
क्या-क्या शामिल होगा कॉमन डिजाइन फ्रेमवर्क में?
रिपोर्ट के मुताबिक रेल मंत्रालय द्वारा तैयार की जा रही इस कॉमन डिजाइन लाइब्रेरी में मुख्य बुनियादी ढांचे को स्टैंडडराइज किया जाएगा। इसमें वायडक्ट्स, पुल, सुरंगें और स्टेशन भवन जैसी जरूरी चीजें शामिल हैं। यह डिजाइन लाइब्रेरी भारत हाई स्पीड रेल प्रोग्राम के तहत तैयार की जा रही है, जिसमें आईआईटी (IITs) जैसे देश के प्रमुख तकनीकी संस्थानों को भी शामिल किया गया है। इसके साथ ही 350 किमी/घंटा तक की गति को संभालने में सक्षम ट्रेन कंट्रोल सिस्टम के लिए भी स्पेसिफिकेशन तैयार किए जा रहे हैं, जिसमें 'मेक इन इंडिया' घटकों पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
केंद्रीय बजट 2026-27 में घोषित 7 नए कॉरिडोर
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने केंद्रीय बजट 2026-27 में लगभग 4,000 किलोमीटर में फैले 7 नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की घोषणा की थी। इनमें मुंबई-पुणे, पुणे-हैदराबाद, हैदराबाद-बेंगलुरु, हैदराबाद-चेन्नई, चेन्नई-बेंगलुरु, दिल्ली-वाराणसी और वाराणसी-सिलीगुड़ी कॉरिडोर शामिल हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि बजट घोषणा के बाद इन सभी नए कॉरिडोर के लिए प्रोजेक्ट कॉस्ट को अपडेट करने, अलाइनमेंट को अंतिम रूप देने और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPRs) तैयार करने का काम तेजी से शुरू हो चुका है।
प्रस्तावित नए रूटों पर यात्रा का समय
रिपोर्ट के मुताबिक, प्रस्तावित नए हाई-स्पीड रेल नेटवर्क के शुरू होने से प्रमुख शहरों के बीच यात्रा का समय घटकर कुछ ही घंटों का रह जाएगा। इस पूरे नेटवर्क पर दिल्ली-वाराणसी मार्ग सबसे लंबा कॉरिडोर होगा, जिस पर यात्रा का अनुमानित समय 3 घंटे 50 मिनट रहेगा। वहीं मुंबई-पुणे कॉरिडोर सबसे छोटा रूट होगा, जहां सफर महज 48 मिनट में पूरा हो जाएगा।
इसके अलावा वाराणसी-पटना-सिलीगुड़ी और चेन्नई-हैदराबाद कॉरिडोर पर यात्रा में 2 घंटे 55 मिनट का समय लगेगा। बेंगलुरु-हैदराबाद रूट पर 2 घंटे, पुणे-हैदराबाद रूट पर 1 घंटा 55 मिनट और चेन्नई-बेंगलुरु कॉरिडोर पर लगभग 1 घंटा 13 मिनट का समय लगने का अनुमान है।
मानकीकरण की नीति से क्या होगा फायदा?
सुरक्षा, गुणवत्ता, कॉस्ट इफिशियंसी और परियोजनाओं के तेजी से पूरा करने के लिए कॉमन और मॉड्यूलर डिजाइन बेहद जरूरी हैं। इस व्यवस्था से हर नए कॉरिडोर के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर को अलग से डिजाइन करने की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी। इससे नेटवर्क भर में निर्माण और रखरखाव के मानकों को एक समान रखते हुए काम में तेजी लाने में मदद मिलेगी। यह दृष्टिकोण भारत की घरेलू इंजीनियरिंग क्षमता को मजबूत करते हुए स्वदेशी हाई-स्पीड रेल मानकों की नींव रखेगा और निर्माण लागत में भी कमी लाएगा।
मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल (MAHSR) प्रोजेक्ट का अपडेट
देश के पहले बुलेट ट्रेन कॉरिडोर (मुंबई-अहमदाबाद) पर 508 किलोमीटर लंबे ट्रैक का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। सरकार का लक्ष्य इसके प्रायोरिटी सेक्शन को अगस्त 2027 तक चालू करने का है। इस कॉरिडोर पर ट्रेनें 320 किमी/घंटा की परिचालन गति से चलेंगी जबकि इसकी डिजाइन स्पीड 350 किमी/घंटा रखी गई है।
MAHSR कॉरिडोर का निर्माण जापानी शिंकानसेन तकनीक और परिचालन पद्धतियों के आधार पर किया जा रहा है। इसमें शिंकानसेन-स्टाइल कैंटिलीवर डिजाइन पर आधारित 20,000 से अधिक ओवरहेड इलेक्ट्रिफिकेशन मास्ट लगाए जाएंगे। इसके अलावा पूरे कॉरिडोर पर 30 सबस्टेशन बनाए जा रहे हैं, जिनमें 12 ट्रैक्शन सबस्टेशन, 2 डिपो ट्रैक्शन सबस्टेशन और 16 डिस्ट्रीब्यूशन सबस्टेशन शामिल हैं।
इस परियोजना के माध्यम से भारत में पहली बार बैलास्टलेस 'J-Slab' ट्रैक तकनीक पेश की जा रही है, जिसके लिए रेल्स, ट्रैक स्लैब और मशीनरी के भंडारण व रखरखाव हेतु समर्पित बेस तैयार किए गए हैं। गुजरात के साबरमती व सूरत और महाराष्ट्र के ठाणे में तीन रोलिंग स्टॉक डिपो का निर्माण भी किया जा रहा है।