Delhi: अमेरिका से लौटे डॉक्टर कपल से 15 करोड़ की ठगी, 17 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट में रखा

24 दिसंबर से 10 जनवरी की सुबह तक, ठगों ने दंपती को लगातार वीडियो कॉल के जरिए निगरानी में रखा। पुलिस इस तरीके को “डिजिटल अरेस्ट” कह रही है। इस दौरान आरोपियों ने दबाव बनाकर डॉ. इंदिरा तनेजा से अलग-अलग खातों में पैसे ट्रांसफर करवाए। राशि कभी 2 करोड़ रुपये तो कभी 2.10 करोड़ रुपये से ज्यादा थी

अपडेटेड Jan 11, 2026 पर 3:51 PM
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दिल्ली में रहने वाले एक बुज़ुर्ग एनआरआई डॉक्टर दंपती के साथ बड़ी साइबर ठगी का मामला सामने आया है।

दिल्ली में रहने वाले एक बुजुर्ग एनआरआई डॉक्टर दंपती के साथ बड़ी साइबर ठगी का मामला सामने आया है। साइबर ठगों ने उन्हें करीब दो हफ्ते से ज़्यादा समय तक डिजिटल अरेस्ट में रखाइस दौरान ठगों ने उनसे कुल 14.85 करोड़ रुपये ठग लिए पीड़ित दंपती की पहचान डॉ. ओम तनेजा और उनकी पत्नी डॉ. इंदिरा तनेजा के रूप में हुई है। दोनों ने करीब 48 साल अमेरिका में बिताए थे और संयुक्त राष्ट्र (यूएन) से जुड़े कामों में अपनी सेवाएं दी थीं। रिटायरमेंट के बाद वे साल 2015 में भारत लौटे थे।

15 दिन रखा डिजिटल अरेस्ट

भारत लौटने के बाद से यह डॉक्टर दंपती समाजसेवा और चैरिटी के कामों से जुड़ा हुआ था। पुलिस अब इस पूरे साइबर फ्रॉड मामले की जांच कर रही है और ठगों तक पहुंचने की कोशिश में जुटी हुई है। शिकायत के अनुसार, इस साइबर ठगी की शुरुआत 24 दिसंबर 2025 को हुईउस दिन डॉक्टर दंपती को साइबर अपराधियों का फोन आया, जिन्होंने खुद को कानून लागू करने वाली एजेंसियों का अधिकारी बताया। कॉल करने वालों ने गिरफ्तारी वारंट और झूठे आपराधिक मामलों की धमकी दी। उन्होंने मनी लॉन्ड्रिंग और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े आरोप लगाए और PMLA जैसे कानूनों का हवाला देकर दंपती को डराया।

अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कराए पैसे

24 दिसंबर से 10 जनवरी की सुबह तक, ठगों ने दंपती को लगातार वीडियो कॉल के जरिए निगरानी में रखा। पुलिस इस तरीके को “डिजिटल अरेस्ट” कह रही है। इस दौरान आरोपियों ने दबाव बनाकर डॉ. इंदिरा तनेजा से अलग-अलग खातों में पैसे ट्रांसफर करवाए। राशि कभी 2 करोड़ रुपये तो कभी 2.10 करोड़ रुपये से ज्यादा थी। इस तरह आठ अलग-अलग बैंक खातों में पैसे भेजवाए गए और कुल रकम 14.85 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। पुलिस अब पूरे मामले की जांच कर रही है और ठगों की पहचान करने की कोशिश में जुटी है।


मामले की जांच में जुटी पुलिस

77 वर्षीय डॉ. इंदिरा तनेजा ने पुलिस को बताया कि ठग उनकी हर गतिविधि पर कड़ी नजर रखे हुए थे। जब भी वह घर से बाहर निकलतीं या किसी को फोन करने की कोशिश करतीं, तो ठग तुरंत उनके पति के फोन पर वीडियो कॉल शुरू कर देते थे, ताकि वह किसी को सच्चाई न बता सकें।हर बार बैंक जाने से पहले ठग उन्हें एक झूठी कहानी रटवा देते थे, जिसे जरूरत पड़ने पर बैंक कर्मचारियों को बताना होता था। जब एक बैंक मैनेजर ने इतनी बड़ी रकम ट्रांसफर करने पर सवाल किया, तब भी उन्होंने वही बात दोहराई, जो ठगों ने सिखाई थी।

यह पूरा धोखाधड़ी का मामला 10 जनवरी को सामने आया। उस दिन ठगों ने उन्हें अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन जाने को कहा और दावा किया कि अब Reserve Bank of India (आरबीआई) उनकी रकम वापस कर देगा और पुलिस को पहले ही जानकारी दे दी गई है। डॉ. इंदिरा तनेजा वीडियो कॉल पर रहते हुए ही पुलिस स्टेशन पहुंचीं और ठगों को स्टेशन हाउस ऑफिसर से बात करने की भी इजाजत दे दी। अपने बयान में उन्होंने बताया कि कॉल करने वाले लोग पुलिसकर्मियों से भी बदतमीजी से बात कर रहे थे। इसी दौरान पुलिस को शक हुआ और पूरा मामला उजागर हो सका।

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