लोकसभा की कार्यवाही में आज ओम बिरला एक बार फिर स्पीकर (अध्यक्ष) की कुर्सी पर लौट आए। विपक्षी दलों की तरफ से उनके खिलाफ लाया गया 'अविश्वास प्रस्ताव' (No-confidence motion) खारिज होने के अगले ही दिन उन्होंने सदन की कमान संभाली। अपनी वापसी के साथ ही उन्होंने निष्पक्षता पर सवाल उठाने वालों को कड़ा जवाब दिया। उन्होंने कहा, "दो दिन की चर्चा पर मैं भी अपना विचार रखूंगा।"
संसद के निचले सदन यानी लोकसभा में पिछले कुछ दिनों से चल रहा तनाव आज तब कम होता दिखा, जब ओम बिरला वापस अपनी कुर्सी पर बैठे। उन पर पक्षपात के आरोप लगाते हुए विपक्ष ने उन्हें हटाने का प्रस्ताव दिया था, जो बुधवार को सदन में गिर गया।
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने कहा, "आजाद भारत के संसदीय इतिहास में तीसरी बार लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा हुई। मैंने हमेशा यह पक्का करने की कोशिश की है कि सदन में हर सदस्य नियमों और प्रक्रियाओं के अंदर मुद्दों पर अपनी राय रखे।"
कुर्सी संभालते ही ओम बिरला ने साफ शब्दों में कहा कि उन पर लगाए गए आरोप बेबुनियाद हैं।
बिरला ने कहा, "कुछ लोगों ने मुझ पर आरोप लगाया कि मैं सांसदों को बोलने नहीं देता। मैं साफ कर दूं कि मैं हर सांसद को बोलने का मौका देता हूं, लेकिन सब कुछ नियम और कायदे के दायरे में होना चाहिए।"
उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकसभा नियमों से चलती है और ये नियम सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों के लिए बिल्कुल एक जैसे हैं।
बुधवार को जब अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा और वोटिंग होनी थी, तब ओम बिरला सदन में मौजूद नहीं थे। उनकी जगह जगदंबिका पाल सदन की कार्यवाही संभाल रहे थे।
विपक्ष के भारी शोर-शराबे और नारेबाजी के बीच जगदंबिका पाल ने प्रस्ताव को वोटिंग के लिए रखा।
विपक्षी सांसद अपनी सीटों पर नहीं लौटे, जिसके बाद 'ध्वनि मत' (Voice Vote) के जरिए प्रस्ताव को खारिज कर दिया गया। इसके तुरंत बाद सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी गई थी।
क्यों लाया गया था अविश्वास प्रस्ताव?
कांग्रेस के उप-नेता गौरव गोगोई ने 10 फरवरी को संविधान के अनुच्छेद 94 (c) के तहत ओम बिरला को हटाने का नोटिस दिया था।
जैसे ही कांग्रेस ने यह कदम उठाया, ओम बिरला ने एक बड़ा नैतिक फैसला लिया। उन्होंने तय किया कि जब तक उनके खिलाफ लाए गए प्रस्ताव पर फैसला नहीं हो जाता, तब तक वे सदन की कार्यवाही में शामिल नहीं होंगे।
नियम के मुताबिक, जब स्पीकर के खिलाफ प्रस्ताव पर चर्चा हो रही हो, तब वे कुर्सी पर नहीं बैठ सकते, लेकिन अन्य कार्यवाहियों के लिए उन पर कोई रोक नहीं थी। फिर भी बिरला ने चर्चा पूरी होने तक सदन से दूर रहना ही बेहतर समझा।
ओम बिरला की वापसी के बाद अब उम्मीद जताई जा रही है कि बजट सत्र की बाकी कार्यवाही सुचारू रूप से चल पाएगी। हालांकि, विपक्ष के तेवरों को देखकर लगता है कि आने वाले दिनों में भी सदन में गर्मागर्मी बनी रहेगी।