Noida Startup: सेना के लिए हाई-टेक ड्रोन और सैटेलाइट्स बना रहा नोएडा का ये स्टार्टअप! US से इंडिया आए इस कपल ने किया कमाल

Noida Space Tech Startup: नोएडा के सेक्टर-80 की एक साधारण सी बिल्डिंग में भारतीय सेना और वायुसेना के लिए सबसे हाई-टेक ड्रोन और 3D मैपिंग सैटेलाइट्स बनाए जा रहे हैं। MIT और कार्नेगी मेलॉन से पढ़कर लौटे आकाश और ज्योति सिन्हा का यह स्टार्टअप चंद्रयान के प्रज्ञान रोवर के लिए सॉफ्टवेयर बना चुका है और अब रक्षा मंत्रालय के iDEX फंड की मदद से अंतरिक्ष में सैटेलाइट भेजने की तैयारी कर रहा है। पढ़िए इस अनोखे स्टार्टअप की पूरी कहानी

अपडेटेड Sep 15, 2026 पर 12:33 PM
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इससे पहले उन्होंने अमेरिका में यूएस आर्मी के लिए रोबोट्स और एडवांस्ड गैजेट्स बनाए है

Noida Startup is Building Drones and Satellites: नोएडा के सेक्टर-80 की इंडस्ट्रियल गलियों के बीच एक साधारण सी कांच और क्रोम की इमारत है। लेकिन देश के डिफेंस सेक्टर के लिए यह बिल्डिंग बेहद खास है। बाहर से देखने पर कोई अंदाजा भी नहीं लगा सकता कि इस इमारत के अंदर हाई-टेक डिफेंस व स्पेस-टेक काम चल रहा है। इस बिल्डिंग के अंदर दर्जनों युवा इंजीनियर, भारतीय थल सेना और वायु सेना के लिए देश के सबसे स्मार्ट ड्रोन और सैटेलाइट्स तैयार कर रहे हैं।

इस स्टार्टअप का नाम है ओमनीप्रेजेंट रोबोट टेक्नोलॉजीज। आइए आपको बताते हैं कि अमेरिका से लौटे आकाश सिन्हा और ज्योति सिन्हा की जोड़ी कैसे भारत के रक्षा क्षेत्र की तस्वीर बदल रही है।

US से वापसी और स्टार्टअप की शुरुआत


इस कंपनी के फाउंडर्स आकाश सिन्हा और ज्योति सिन्हा हैं। दोनों ने दिल्ली कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग (DCE) से पढ़ाई की और फिर अमेरिका की मशहूर यूनिवर्सिटीज- कार्नेगी मेलॉन और एमआईटी से अपनी मास्टर्स पूरी की। अमेरिका में उन्होंने यूएस आर्मी के लिए रोबोट्स और एडवांस्ड गैजेट्स बनाए। वहां 12 साल से ज्यादा समय बिताने के बाद वे भारत लौट आए।

भारत में उन्होंने नोएडा की एक प्राइवेट यूनिवर्सिटी में पढ़ाना शुरू किया। लेकिन जब केंद्र सरकार ने रक्षा क्षेत्र को प्राइवेट कंपनियों और स्टार्टअप्स के लिए खोला, तो उन्होंने अपना स्टार्टअप शुरू करने का फैसला किया।

रक्षा मंत्रालय और iDEX स्कीम का सहारा

आकाश सिन्हा बताते हैं कि 5-6 साल पहले भारत में स्थिति कठिन थी, लेकिन सरकार की iDEX (Innovations for Defence Excellence), ADITI और RDI जैसी स्कीमों ने सब कुछ बदल दिया। अब भारत का फंडिंग इकोसिस्टम बिल्कुल अमेरिका जैसा हो गया है।

क्या है iDEX स्कीम?

2018 में शुरू की गई इस स्कीम के तहत रक्षा क्षेत्र में स्टार्टअप्स को प्रोटोटाइप बनाने के लिए आर्थिक मदद दी जाती है। मार्च 2026 तक iDEX के तहत 676 स्टार्टअप्स जुड़े हैं और 551 कॉन्ट्रैक्ट्स साइन हो चुके हैं। इसके तहत ₹2,400 करोड़ से ज्यादा के प्रोक्योरमेंट को मंजूरी मिली है।

रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह के अनुसार, अगर कोई स्टार्टअप रक्षा बलों की जरूरतों के हिसाब से सही प्रोटोटाइप तैयार कर लेता है, तो सरकार उसे तय अवधि के लिए रिपीट ऑर्डर देने का आश्वासन देती है। इससे निवेशकों को भी भरोसा मिलता है।

चंद्रयान मिशन से लेकर बॉर्डर मैपिंग तक...अपने नाम किए कई बड़े कारनामे

ओमनीप्रेजेंट रोबोट टेक्नोलॉजीज के नाम कई बड़ी उपलब्धियां दर्ज हैं। चंद्रयान मिशन के दौरान प्रज्ञान रोवर जिस मैपिंग और नेविगेशन सॉफ्टवेयर के जरिए चांद की सतह पर चला था, उसे इसी स्टार्टअप ने तैयार किया था। सौमित्रा मिशन के तहत कंपनी ने अपने 3D मैपिंग ड्रोन से भारत के 10,000 से ज्यादा गांवों की मैपिंग की।

रक्षा मंत्रालय की फंडिंग से यह कंपनी दुनिया का सबसे हाई-रेजोल्यूशन (1 मीटर से कम रेजोल्यूशन) वाला 3D मैपिंग सैटेलाइट कांस्टेलेशन बना रही है, जो अगले साल अंतरिक्ष में लॉन्च हो सकता है। यह दुर्गम पहाड़ी और सीमावर्ती इलाकों का सटीक जीपीएस डेटा देगा।

एयरफोर्स स्टेशनों पर पक्षियों के टकराने से होने वाले हादसों को 80% तक कम करने के लिए बर्ड एक्स तकनीक विकसित की गई है, जिसका ट्रायल एक प्रमुख एयर बेस पर हो चुका है।

बिना जीपीएस वाली परिस्थितियों में भी दुश्मन के ठिकाने को खोजकर खुद को ब्लास्ट करने वाले कामिकेजी ड्रोन्स की स्वदेशी तकनीक पर भी काम चल रहा है।

रिवर्स ब्रेन ड्रेन: ट्रंप की नीतियों से भारत को फायदा

जब फाउंडर्स से पूछा गया कि नोएडा में इतना हाई-टेक टैलेंट कहां से मिलता है, तो उन्होंने बताया कि उनके पास IIT दिल्ली, IIT कानपुर और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ स्पेस टेक्नोलॉजी (IIST) के बेहतरीन इंजीनियर्स काम कर रहे हैं।

इसके अलावा अमेरिका में ट्रंप द्वारा वर्क वीजा पर की जा रही सख्ती के कारण 'रिवर्स ब्रेन ड्रेन' हो रहा है। आकाश और ज्योति ने बताया कि उन्होंने अमेरिका की कार्नेगी मेलॉन यूनिवर्सिटी से एआई (AI) टॉपर तक को सीधे भारत में अपने इस नोएडा स्टार्टअप के लिए हायर किया है। कई मिड-लेवल प्रोफेशनल्स भी वापस भारत लौटकर काम करना चाहते हैं।

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