ओएनजीसी ने 30 मार्च को बताया कि उसने 29 मार्च से अरब सागर में अपने दमन अपसाइड डेवलपमेंट प्रोजेक्ट के तहत प्लेटफॉर्म B-12-24P से गैस की व्यावसायिक सप्लाई शुरू कर दी है। यह प्रोजेक्ट मुंबई से करीब 180 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम और पिपावाव, गुजरात से लगभग 80 किलोमीटर दक्षिण में स्थित है। इस प्रोजेक्ट पर करीब 1 अरब डॉलर का निवेश किया गया है। ओएनजीसी ने बताया कि प्लेटफॉर्म को सफलतापूर्वक चालू कर दिया गया है और वहां से गैस हजीरा प्लांट भेजी जा रही है।
कंपनी के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट को तय समय से भी कम, यानी दो साल से कम अवधि में पूरा कर लिया गया। उन्होंने कहा कि यह सफलता बेहतर योजना, नई तकनीक के इस्तेमाल और ड्रिलिंग व प्रोडक्शन टीमों के शानदार काम की वजह से संभव हो पाई है। ओएनजीसी के दमन अपसाइड डेवलपमेंट प्रोजेक्ट से गैस की सप्लाई शुरू होना एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है। इससे इस प्रोजेक्ट से कमाई (मॉनेटाइजेशन) की शुरुआत हो गई है। कंपनी ने बताया कि सभी कुओं से गैस उत्पादन धीरे-धीरे बढ़ाया जाएगा।
यह विकास इसलिए भी अहम है, क्योंकि बढ़ते वैश्विक तनाव के बीच भारत अपनी घरेलू ऊर्जा उत्पादन को बढ़ाने पर जोर दे रहा है। ऐसे हालात में देश की ऊर्जा सप्लाई पर दबाव बढ़ रहा है। फिलहाल भारत अपनी प्राकृतिक गैस की करीब आधी जरूरतें आयात के जरिए पूरी करता है, इसलिए ऐसे प्रोजेक्ट देश के लिए काफी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। ओएनजीसी ने पहले जनवरी में बताया था कि वह अपने पश्चिमी अपतटीय तेल क्षेत्रों के लिए तकनीकी विशेषज्ञों को नियुक्त करने पर विचार कर रही है।
कंपनी के निदेशक (उत्पादन) पंकज कुमार के मुताबिक, इस उद्देश्य से जनवरी के पहले हफ्ते में एक टेंडर जारी किया गया था। इसके तहत कंपनी ने शेल, एक्सॉनमोबिल, टोटलएनर्जीज़ और शेवरॉन सहित 10 वैश्विक कंपनियों से संपर्क कर उनसे बोलियां मांगी थीं। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए ओएनजीसी ने 22 मिलियन टन कच्चे तेल के उत्पादन का लक्ष्य रखा है। कंपनी को उम्मीद है कि अगले वित्त वर्ष में उत्पादन में थोड़ी बढ़ोतरी होगी।
ओएनजीसी ने कहा है कि आने वाले समय में वह पूर्वी तट पर एक्सप्लोरेशन की गतिविधियों पर ज्यादा ध्यान देगी। इसमें महानदी बेसिन, केजी बेसिन, कावेरी बेसिन और अंडमान क्षेत्र शामिल हैं। जनवरी में ओएनजीसी ने रिलायंस इंडस्ट्रीज़ के साथ एक समझौता किया था। इस समझौते का मकसद भारत के पूर्वी तट पर, खासकर कृष्णा गोदावरी बेसिन और अंडमान के अपतटीय इलाकों में गहरे पानी में होने वाले अन्वेषण और उत्पादन (E&P) कार्यों के लिए संसाधनों को साझा करना है। इसका उद्देश्य जटिल गहरे पानी वाले प्रोजेक्ट्स की लागत कम करना, काम को तेजी से पूरा करना और संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल सुनिश्चित करना है।