पहलगाम के आतंकी हमले के बाद जब पीएम अपना विदेश दौरा बीच में छोड़ कर वापस लौटे तो तय था कि इस बार भारत कुछ गंभीर कार्रवाई के मूड में है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से पीएम मोदी की लगातार मुलाकाते चलतीं रहीं। तीनों सेनाओं के सेनाध्यक्ष भी राजनाथ सिंह से लगातार मुलाकात करते रहे। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल की भी रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की मुलाकातें हुई। राजनाथ सिंह हर मुलाकात के बात रणनीति का ब्योरा पीएम मोदी तक पहुंचाते रहे। खास बात ये कि सेना की तैयारियों और तैनाती ऊपर भी मंथन लगातार जारी रहा। इस बीच सुरक्षा मामलों की कैबिनेट कमिटी की भी दो बैठकें हुईं।
इन 14 दिनों में राजनाथ सिंह ने भी जनता के बीच बोलते हुए ये सीधा आश्वासन भी दे दिया था कि जो देश की जनता जो चाहती है वो अवश्य होगा। राजनाथ सिंह ने कहा ये पीएम मोदी का नेतृत्व है इसलिए पाकिस्तान से बदला जरूर लिया जाएगा। पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों पर हमले से पहले भी रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह तीनों सेनाध्यक्षों से मिले। एनएसए अजीत डोवाल भी रक्षा मंत्री से मिलने उनसे घर पहुंचे थे। करीब एक घंटे चली थी दोनों की मुलाकात। जाहिर है रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह इस मौके पर पूरी तरह से चौकस और सजग थे ताकि सेनाओं की रणनीति को अंजाम तक पहुंचते देख सकें।
ऑपरेशन सिंदूर के पूरा होने के बाद भी रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने देर रात तीनों सेनाध्यक्षों के साथ इस बात पर मंथन किया कि अगर पाकिस्तान इस हमले के बाद जवाब देने की कारवाई करता है तो उसके लिए हमारी सेना के तीनों अंग और सीमा पर मौजुद जवान कितने मुस्तैद हैं। जाहिर है पीएम मोदी से लेकर रक्षा मंत्री सब जानते हैं की पाकिस्तान इतनी आसानी से सुधरने वाला नहीं है। इसलि बदले की कारवाई में 14 दिनों का समय जरूर लिया लेकिन इस समय में अपनी आतंरिक सुरक्षा को भी इतना चाक चौबंद कर दिया है कि पाकिस्तान को अब जवाबी हमले के लिए सोचना पड़ेगा। फिर अभी तो उसे पानी से लेकर अर्थव्यवस्था और अंतर्राष्ट्रीय मंच पर अपनी आतंकी छवि को भी दुरुस्त है जो कि आसान साबित नहीं होगा।