विदेश मंत्रालय ने सोमवार को कहा कि भारत सिंधु जल संधि को तब तक स्थगित रखेगा, जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देना बंद नहीं कर देता। नई दिल्ली ने पहलगाम आतंकी हमले के ठीक एक दिन बाद 23 अप्रैल को सुरक्षा मुद्दों से जुड़ी कैबिनेट समिति की बैठक के दौरान सिंधु जल संधि को निलंबित करने का निर्णायक कदम उठाया था। इस हमले में 26 लोगों की जान चली गई थी।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, "अब 23 अप्रैल को सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (CCS) के निर्णय के अनुसार, भारत तब तक संधि को स्थगित रखेगा, जब तक कि पाकिस्तान विश्वसनीय और अपरिवर्तनीय रूप से सीमा पार आतंकवाद के लिए अपने समर्थन को त्याग नहीं देता। कृपया यह भी ध्यान रखें कि जलवायु परिवर्तन, जनसांख्यिकीय बदलाव और तकनीकी बदलावों ने जमीन पर नई वास्तविकताएं पैदा की हैं।"
उन्होंने कहा कि सिंधु जल संधि पर 1960 में सद्भावना और मित्रता की भावना से हस्ताक्षर किए गए थे, जैसा कि इसकी प्रस्तावना में लिखा है। हालांकि, पाकिस्तान ने दशकों से सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देकर इन सिद्धांतों को कमजोर किया है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने भारत की लॉन्ग-स्टैंडिंग पॉजिशन की भी पुष्टि की कि जम्मू और कश्मीर से जुड़े किसी भी मुद्दे को भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय रूप से हल किया जाना चाहिए, और इस नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है।
जायसवाल ने कहा, "हमारा लंबे समय से राष्ट्रीय रुख रहा है कि केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर से जुड़े किसी भी मुद्दे को भारत और पाकिस्तान को द्विपक्षीय रूप से सुलझाना होगा। इस नीति में कोई बदलाव नहीं आया है। लंबित मामला पाकिस्तान की ओर से अवैध रूप से कब्जाए गए भारतीय इलाके को खाली करना है।"
पानी और खून एक साथ नहीं बह सकते: PM मोदी
इससे पहले, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सिंधु जल संधि के बारे में बोलते हुए कहा कि “पानी और खून एक साथ नहीं बह सकते”। भारत ने पाकिस्तान पर अपनी कूटनीतिक कार्रवाई के तहत संधि को निलंबित कर दिया था।
प्रधानमंत्री मोदी ने एक दिन पहले राष्ट्र के नाम संबोधन में कहा था, "आतंकवाद और व्यापार एक साथ नहीं चल सकते, पानी और खून एक साथ नहीं बह सकते।’’
भारत ने सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया, जो वर्ल्ड बैंक की मध्यस्थता में 1960 में पाकिस्तान के साथ साइन किया एक ऐतिहासिक जल-बंटवारा समझौता था।
संधि के लागू होने के बाद यह पहली बार है कि भारत ने औपचारिक रूप से इसके लागू होने पर रोक लगाई है, जो उसके कूटनीतिक रुख में बड़ा बदलाव दर्शाता है।