Pahalgam Attack: "तू बाहर आ जा" पहलगाम में आतंकी ने मेरे पिता को कलमा पढ़ने को कहा, फिर मार दी गोली, बेटी ने सुनाई खौफनाक दास्तान
Pahalgam Terror Attack: बेटी असावरी ने उस हैवानियत के पल को याद करते हुए बताया, उन्होंने एक पहाड़ी से कुछ लोगों को उतरते हुए देखा, जो 'लोकल पुलिस के जैसे कपड़े पहने हुए थे'। साथ ही उन्होंने गोलीबारी की आवाज भी सुनी। वह, उसकी मां प्रगति और पिता संतोष दूसरे पर्यटकों के साथ पास के एक टेंट में पहुंचे। उन्हें कि बाहर से आ रही गोलियों की आवाज हमलावरों और सुरक्षा बलों के बीच मुठभेड़ है
Pahalgam Attack: "तू बाहर आ जा" पहलगाम में आतंकी ने मेरे पिता को कलमा पढ़ने को कहा, फिर मार दी गोली, बेटी ने सुनाई खौफनाक दास्तान
पुणे के कारोबारी संतोष जगदाले और उनका परिवार जम्मू-कश्मीर के पहलगाम के टूरिस्ट स्पॉट पर मौजूद थे। आतंकी हमले के दौरान पूरे इलाके में मदद के लिए चीख-पुकार मच गई और गोलियों की आवाज गूंज रही थी, ऐसे में जान बचाने के लिए जगदाले और उनका परिवार एक तंबू के अंदर छिपे हुए थे। उनकी बेटी असावरी ने उस हैवानियत के पल को याद करते हुए बताया, उन्होंने एक पहाड़ी से कुछ लोगों को उतरते हुए देखा, जो 'लोकल पुलिस के जैसे कपड़े पहने हुए थे'। साथ ही उन्होंने गोलीबारी की आवाज भी सुनी।
वह, उसकी मां प्रगति और पिता संतोष दूसरे पर्यटकों के साथ पास के एक टेंट में पहुंचे। उन्हें कि बाहर से आ रही गोलियों की आवाज हमलावरों और सुरक्षा बलों के बीच मुठभेड़ है। हमलावरों की आवाज नजदीक आती गई, क्योंकि उन्होंने पास के ही एक टेंट पर गोलियां चलाई थीं।
इसके बाद बाहर से एक डराने वाली आवाज आई "चौधरी, तू बाहर आ जा।" हमलावरों ने उसके पिता को टेंट से बाहर खींच लिया और इसके बाद हमलावरों ने उन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का समर्थन करने का आरोप लगाया।
असावरी ने बताया कि वहां कई पर्यटक मौजूद थे, लेकिन आतंकवादियों ने खास तौर पर पुरुषों को निशाना बनाया और पूछा कि क्या वे हिंदू हैं या मुसलमान।
26 साल की लड़की ने बताया, "इसके बाद उन्होंने मेरे पिता से एक इस्लामी आयत (शायद कलमा) सुनाने को कहा। जब वह ऐसा नहीं कर पाए, तो उन्होंने उन्हें तीन गोलियां मार दीं, एक सिर पर, एक कान के पीछे और एक पीठ में।" उन्होंने बताया कि इसके बाद बंदूकधारी उनके चाचा की ओर मुड़े और उन्हें लगातार गोलियां मारीं। उन्होंने बताया कि पुलिस और सुरक्षा बल 20 मिनट बाद घटनास्थल पर पहुंचे।
उसे ये नहीं पता था कि उसके पिता या चाचा जिंदा हैं भी या नहीं, इस बीच असावरी, उनकी मां प्रगति और रिश्तेदारों को स्थानीय लोगों और सुरक्षा बलों ने पहलगाम की बैसरन घाटी से निकाल लिया।
जगदाले महाराष्ट्र के उन 26 लोगों में से एक थे, जो मंगलवार को पहलगाम में हुए आतंकी हमले में मारे गए। पांच लोग अतुल माने, संजय लेले और हेमंत जोशी थे, जो सभी ठाणे के निवासी थे, पुणे के कौस्तुभ गणबोटे और नवी मुंबई के दिलीप दोसाले भी थे।
45 साल के माने सेंट्रल रेलवे में सीनियर सेक्शन इंजीनियर थे। उनके दोस्त विवेकानंद सामंत को याद है कि वे दोनों लोकल ट्रेन में साथ-साथ सफर करते थे और उन्होंने साथ-साथ पहलगाम घूमने की योजना बनाई थी।
डोसाले नवी मुंबई के 39 टूरिस्ट के ग्रुप का हिस्सा थे, जो जम्मू और कश्मीर की एक संगठित यात्रा में शामिल हुए थे।
नागपुर के एक दंपत्ति और उनका बेटा भाग गए और पीछे मुड़कर नहीं देखा, बैसरन घास के मैदान पर हमला शुरू होने से ठीक पहले भाग निकले। उस व्यक्ति ने ANI को बताया "यह घटना तब हुई, जब हम घटनास्थल से निकले ही थे। हम काफी देर तक गोलीबारी की आवाज सुनते रहे। हर कोई उस जगह से भागने की कोशिश कर रहा था।"
जब कई लोग लगभग 4 फीट चौड़े एक ही गेट से बाहर निकलने की कोशिश कर रहे थे, तो उनकी पत्नी गिर गईं और उनके दो फ्रैक्चर हो गए, जिनमें से एक पैर में था। जो लोग भाग नहीं पाए, उन्हें खुली जगह में छिपने के लिए कोई जगह नहीं मिली।
बैसरन घाटी में, जिसे अक्सर 'मिनी स्विटजरलैंड' कहा जाता है, हमलावरों ने पर्यटकों के मौज-मस्ती में व्यस्त होने पर गोलीबारी की। घायलों को घास के मैदान से निकालने के लिए हेलिकॉप्टरों को तैनात किया गया, जहां केवल पैदल ही पहुंचा जा सकता है। स्थानीय लोगों ने भी निकासी में मदद की, और प्रभावितों को अपने टट्टुओं पर सुरक्षित जगह पर पहुंचाया।