जम्मू-कश्मीर के पहलगाम का बैसरन इलाका हमेशा सैलानियों से खचाखच भरा रहता है। देश-विदेश से सैलानी यहां घूमने आते हैं। यहां का स्थानीय रोजगार भी पर्यटन पर निर्भर है। लोग जश्न में डूबे हुए थे। तभी अचानक आतंक के छरें घाटी को चीरने लगे। आतंकवादी सैलानियों को कीड़े-मकोड़ों की तरह गोलियों से भून रहे थे। यह मंजर ऐसा था कि जिसने भी देखा उसकी रूह कांप उठी। इस ठिकाने पर केरल का एक परिवार भी पहुंचने वाला था। लेकिन लंच करने की जिद ने उन्हें इस घटना स्थल से दूर कर दिया और चावल में नमक क्या ज्यादा हुआ, उनकी जिंदगी ही बच गई।
दरअसल, केरल के कन्नूर में रहने वाली लावण्या अपने परिवार के साथ जम्मू-कश्मीर घूमने गई थी। कई दिनों तक घूमने की वजह से वो ढंग से लंच भी नहीं कर पा रहीं थी। फिर 22 अप्रैल को वो पहलगाम घूमने के लिए अपने होटल से निकल चुकीं थी। तभी पहलगाम पहुंचने के 15 मिनट पहले लंच करने के लिए रुक गए। इसके बाद जब वो पहलगाम पहुंची तो वहां सैलानियों के जश्न की जगह भागदौड़, चीख पुकार ही सुनी। इसके बाद लावण्या ने वहां फौरन लौटना ही बेहतर समझा।
चावल में नमक ज्यादा, बच गई जान
मामला कुछ यूं है कि लावण्या जब अपने परिवार के साथ होटल में लंच कर रहीं थी। उन्होंने फ्राई राइस का ऑर्डर किया था। इसके बाद जो राइस मिला, उसमें नमक की मात्रा ज्यादा थी। लिहाजा होटल से शिकायत की गई। होटल के मालिक ने इस बात को समझ लिया और खेद प्रकट किया। इसके बाद दोबारा फ्राई राइस बनाकर देने की बात कही गई। ऐसे में दोबारा फ्राई राइस आने में करीब एक घंटा लग गया। लिहाजा पहलगाम में पहुंचने में उन्हें देरी हो गई। फिर लावण्या जैसे ही अपने परिवार के साथ पहलगाम पहुंची, उन्हें आभास हो गया कि कुछ गड़बड़ है। चारो तरफ चीख पुकार मची हुई थी। जिसे जहां जगह मिल रही थी भाग रहे थे। ऐसे में चावल में नमक ज्यादा होना, लंच में दोरी होने उनकी जिंदगी बच गई।
लावण्या ने सोशल मीडिया में शेयर किया अनुभव
लावण्या ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर यह अपना अनुभव शेयर किया। उन्होंने बताया कि बैसरन जाने के कुछ दूर पहले उन्होंने देखा कि टैक्सी, घोड़े सब तेजी से नीचे की ओर आ रहे हैं। सब लोग चिल्ला रहे थे। लेकिन बैसरन को स्थानीय भाषा समझ में नहीं आ रही थी। एक गुजराती परिवार, जो कार से आ रहा था। उन्होंने बताया कि नीचे जाना सही नहीं है। केंद्रीय सुरक्षा बलों और पर्यटकों के बीच झड़प हो गई है। हमने वापस लौटने का फैसला किया है।
बैसरन नहीं पहुंच पाने का अफसोस
ऐसे में लावण्या को बैसरन नहीं पहुंच पाने का अफसोस हुआ। लिहाजा वो एक झील के पास फोटों खिंचाने लगीं। इसके बाद उनके फोन की घंटियां बजने लगीं। उन्हें पता चला कि वहां आतंकी हमला हो गया। तब लावण्या को पता चला कि जिस जगह जाना था। आतंकी हमला हुआ है। जो अफसोस था, वो अब खुशी में बदल गया। लावण्या और उनके परिवार को एक नया जीवनदान मिला।