प्रसिद्ध गीतकार मजरूह सुल्तानपुरी का शेर आपने जरूर सुना होगा, "मैं अकेला ही चला था जानिब-ए-मंज़िल मगर,लोग साथ आते गए और कारवां बनता गया।" यह पटना के शुभम कुमार पर सटीक बैठता है। शुभम ने 2018 में अकेले पटना के दीघा से गंगा के घाटों की सफाई की शुरुआत की थी। उनकी यह कोशिश आज एक जनअभियान का रूप ले चुकी है। उनकी संस्था 'बीइंग हेल्पर फाउंडेशन'से आज 1,100 से ज्यादा लोग जुड़े हैं, जिनमें ज्यादातर युवा हैं।
