छात्रों को धमकी, महिला प्रदर्शनकारी को थप्पड़...NEET Protest के बीच इन तीन अफसरों पर क्यों हुआ एक्शन?

CJP Protests: मुंबई पुलिस के कांस्टेबल पवन सांगले को एक वायरल वीडियो सामने आने के बाद निलंबित कर दिया गया। इस वीडियो में वह कथित तौर पर छात्र प्रदर्शनकारियों को धमकी देते नजर आ रहे हैं। वीडियो में दावा किया गया है कि हिरासत में लिए गए छात्रों से पवन सांगले ने कहा कि अगर वे दोबारा प्रदर्शन करने आए, तो उनके बैग में ड्रग्स रखकर उन्हें झूठे मामले में फंसा दिया जाएगा

अपडेटेड Jul 24, 2026 पर 3:31 PM
राजधानी दिल्ली के जंतर मंतर पर नीट परीक्षा पेपर लीक को लेकर छात्रों का प्रदर्शन जारी है।

राजधानी दिल्ली के जंतर मंतर पर नीट परीक्षा पेपर लीक को लेकर छात्रों का प्रदर्शन जारी है। इन प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा बलों के व्यवहार पर भी लोगों की नजर रही। दिल्ली और मुंबई में हुए प्रदर्शनों के कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद कुछ सुरक्षा अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठे और उनके खिलाफ कार्रवाई भी की गई। पिछले कुछ दिनों में तीन अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई हुई है। इनमें मुंबई पुलिस के कांस्टेबल पवन सांगले, दिल्ली पुलिस के अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (एडिशनल डीसीपी) संदीप लांबा और रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) की सहायक कमांडेंट सोनिया सहरावत शामिल हैं।

इन तीनों पर प्रदर्शन के दौरान हुई अलग-अलग घटनाओं को लेकर कार्रवाई की गई है। हालांकि तीनों मामले अलग-अलग हैं, लेकिन ये घटनाएं बताती हैं कि विरोध प्रदर्शनों और भीड़ को नियंत्रित करने के दौरान सुरक्षा अधिकारियों के हर कदम पर जनता और संबंधित विभागों की कड़ी नजर रहती है।

पवन सांगले: वायरल वीडियो के बाद निलंबित


मुंबई पुलिस के कांस्टेबल पवन सांगले को एक वायरल वीडियो सामने आने के बाद निलंबित कर दिया गया। इस वीडियो में वह कथित तौर पर छात्र प्रदर्शनकारियों को धमकी देते नजर आ रहे हैं। वीडियो में दावा किया गया है कि हिरासत में लिए गए छात्रों से पवन सांगले ने कहा कि अगर वे दोबारा प्रदर्शन करने आए, तो उनके बैग में ड्रग्स रखकर उन्हें झूठे मामले में फंसा दिया जाएगा। वायरल क्लिप में वह कथित तौर पर यह कहते भी सुनाई देते हैं कि छात्रों के बैग में "50-50 ग्राम पाउडर" रखकर उन्हें पूरी जिंदगी जेल भिजवाया जा सकता है। वीडियो वायरल होने के बाद मामले ने तूल पकड़ा और उनके खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई।

सोशल मीडिया पर यह वीडियो तेजी से वायरल हुआ, जिसके बाद पवन सांगले के कथित बयानों की जमकर आलोचना हुई। कई लोगों ने पुलिस की ताकत के गलत इस्तेमाल पर सवाल उठाए। मुंबई पुलिस ने बताया कि पवन सांगले मोटर ट्रांसपोर्ट यूनिट में ड्राइवर के पद पर तैनात थे और शहर की वरिष्ठ कमान का हिस्सा नहीं थे। इसके बावजूद उन्हें तुरंत निलंबित कर दिया गया और मामले की विभागीय जांच शुरू कर दी गई।

संदीप लांबा: महिला प्रदर्शनकारी को थप्पड़ मारने का वीडियो वायरल

दिल्ली में अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (उत्तर-पूर्व) संदीप लांबा को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की ड्यूटी से हटा दिया गया। यह फैसला उस समय लिया गया, जब सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ। वीडियो में वह कथित तौर पर "संसद चलो" प्रदर्शन के दौरान हुई झड़प के बीच एक महिला प्रदर्शनकारी को थप्पड़ मारते हुए दिखाई दिए। यह घटना उस समय हुई, जब पुलिस संसद की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश कर रही थी। वायरल वीडियो में संदीप लांबा कथित तौर पर धक्का-मुक्की के दौरान एक महिला प्रदर्शनकारी को थप्पड़ मारते हुए दिखाई दिए। इस घटना की विपक्षी नेताओं और कई सामाजिक संगठनों ने कड़ी आलोचना की।

दिल्ली पुलिस ने माना कि तनावपूर्ण माहौल में वरिष्ठ अधिकारी अपना संयम खो बैठे थे। हालांकि पुलिस ने यह भी कहा कि प्रदर्शन के दौरान हिंसा हुई थी, लेकिन मामले की जांच पूरी होने तक संदीप लांबा को जंतर-मंतर की ड्यूटी से हटा दिया गया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि उनका व्यवहार भीड़ को नियंत्रित करने के तय नियमों के अनुरूप नहीं था। वहीं, प्रदर्शन के आयोजकों ने संदीप लांबा पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग करने का आरोप लगाया। इसके बाद उनके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग और तेज हो गई।

यह विवाद उस समय सामने आया, जब आधिकारिक बयान में कहा गया कि प्रदर्शन के दौरान हिंसक भीड़ को नियंत्रित करने की कोशिश में सोनिया सहरावत घायल हो गई थीं। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) के जवान पत्थरबाजी और अन्य हिंसक घटनाओं के बीच प्रदर्शनकारियों का सामना करते दिखाई दिए। अधिकारियों के अनुसार, इस कार्रवाई के दौरान कई सुरक्षाकर्मी भी घायल हुए।

तीन मामले, लेकिन सवाल एक ही

हालांकि तीनों अधिकारियों के मामले अलग-अलग हैं, लेकिन इन सभी में एक बात समान है—सार्वजनिक प्रदर्शन के दौरान पुलिस और सुरक्षा बलों की जवाबदेही। मुंबई पुलिस के कांस्टेबल पवन सांगले पर छात्र प्रदर्शनकारियों को कथित तौर पर धमकाने का आरोप लगा, जिसके बाद उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई। वहीं, दिल्ली पुलिस के संदीप लांबा को एक प्रदर्शनकारी के साथ कथित हाथापाई का वीडियो वायरल होने के बाद प्रदर्शन की ड्यूटी से हटा दिया गया। दूसरी ओर, सोनिया सहरावत के मामले में यह जांच की जा रही है कि प्रदर्शन के बाद सोशल मीडिया पर उनकी गतिविधियां सुरक्षा बलों के अधिकारियों के तय आचार नियमों के अनुरूप थीं या नहीं। ये तीनों घटनाएं इस बात का संकेत हैं कि अब पुलिस और सुरक्षा बलों के जवानों की जवाबदेही सिर्फ प्रदर्शन के दौरान की गई कार्रवाई तक सीमित नहीं है। उनके व्यवहार और आचरण पर प्रदर्शन से पहले, उसके दौरान और उसके बाद भी लगातार नजर रखी जा रही है।

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