PM Modi 7 Appeals: एयरलाइंस से लेकर गोल्ड तक... पीएम मोदी की अपील के बाद इन 5 सेक्टर्स में हड़कंप

PM Modi 7 Appeals: पश्चिम एशिया में लंबे समय से चल रहे संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य के आस-पास पैदा हुई रुकावटों को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीयों से अपील की है कि वे कोरोना महामारी के समय की 'वर्क-फ्रॉम-होम' की आदतों को फिर से अपनाए। साथ ही कहा कि गैर-जरूरी विदेश यात्राओं को टाल दें। पेट्रोल और डीजल का इस्तेमाल कम करें और एक साल तक सोना खरीदने से बचें

अपडेटेड May 11, 2026 पर 4:37 PM
Story continues below Advertisement
PM Modi 7 Appeals: एयरलाइंस से लेकर सोने तक पीएम मोदी की अपील के बाद 5 सेक्टर में हड़कंप मच गया है

PM Modi 7 Appeals: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीयों से अपील की है कि वे अगले एक साल तक सोना खरीदने से बचें। इसके साथ ही पीएम मोदी ने रविवार (10 मई) को विदेशी करेंसी बचाने के लिए पेट्रोल और डीजल का कम उपयोग करने, शहरों में मेट्रो रेल सेवाओं का उपयोग, कार पूलिंग, इलेक्ट्रिक गाड़ियों का अधिकतम इस्तेमाल, पार्सल भेजने के लिए रेल सेवाओं का उपयोग और घर से काम करने यानी वर्क फ्रॉम होम (WFH) जैसे उपायों का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि युद्ध के कारण पेट्रोल और उर्वरक की कीमतों में काफी वृद्धि हुई है।

पीएम मोदी की यह अपील देश के विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने के बड़े प्रयास का एक हिस्सा है। यह अपील ऐसे समय में की गई है, जब पश्चिम एशिया में तनाव के कारण वैश्विक तेल की कीमतें बढ़ रही हैं। भारत की अर्थव्यवस्था पर इसका दबाव पड़ रहा है। ईरान-अमेरिका में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास व्यवधान के कारण वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर लगभग 126 डॉलर प्रति बैरल हो गई हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के नागरिकों से विवेकाधीन खर्चों पर पुनर्विचार करने की भी अपील की, क्योंकि देश बढ़ती वैश्विक ऊर्जा लागतों से आर्थिक दबाव का सामना कर रहा है। पीएम मोदी ने नागरिकों से खाद्य तेल की खपत कम करने और किसानों से विदेशों से आयातित रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने की अपील की। पीएम मोदी की इस अपील के बाद कई प्रमुख सेक्टर्स में हलचल तेज हो गई है।


1. एविएशन, पर्यटन और विदेश यात्रा

PM मोदी की 'गैर-जरूरी विदेश यात्रा' टालने और 'वर्क फ्रॉम होम' को फिर से शुरू करने की अपील सीधे तौर पर एविएशन और ट्रैवल सेक्टर पर बढ़ रहे दबाव की ओर इशारा करती है। किसी भी तेल संकट का सबसे पहला शिकार एयरलाइंस ही होती हैं। एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) उनकी कुल ऑपरेटिंग लागत का लगभग 35-45 प्रतिशत होता है।

भारतीय एयरलाइंस को विमानों का किराया (लीज रेंटल), रखरखाव के कॉन्ट्रैक्ट और बीमा का भुगतान भी डॉलर में करना पड़ता है। न्यूज एजेंसी 'रॉयटर्स' की रिपोर्ट के अनुसार, इसका मतलब है कि कमजोर रुपया और महंगा कच्चा तेल मिलकर लागत पर भारी दबाव डालते हैं।

पीएम मोदी की अपील से ऐसा लगता है कि उसे ATF की कीमतों में और बढ़ोतरी, हवाई टिकटों के किराए में वृद्धि, गैर-जरूरी यात्राओं की मांग में कमी एवं कॉर्पोरेट यात्राओं में कटौती की आशंका है। PM मोदी के संबोधन का असर तुरंत देखने को मिला।

सोमवार को शुरुआती कारोबार में इंडिगो की मूल कंपनी इंटरग्लोब एविएशन के शेयर 4 प्रतिशत से ज्यादा गिर गए। 11 मई को सुबह 9:46 बजे इंटरग्लोब एविएशन के शेयर 4,339.50 रुपये पर कारोबार कर रहे थे, जो 183.20 रुपये यानी 4.05 प्रतिशत की गिरावट दर्शाता है। यह गिरावट तब आई जब प्रधानमंत्री ने यात्राओं, विशेष रूप से विदेश में घूमने-फिरने के लिए की जाने वाली यात्राओं के मामले में सावधानी बरतने की अपील की।

2. ऑयल मार्केटिंग, ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स

भारत हर दिन लगभग 5.5 मिलियन बैरल तेल इस्तेमाल करता है। इसका ज्यादातर हिस्सा भारत दूसरे देशों से आयात करता है। कच्चे तेल की कीमतों में हर लगातार बढ़ोतरी से इंपोर्ट बिल तेजी से बढ़ता है और फॉरेक्स रिजर्व पर दबाव पड़ता है। PM मोदी ने बार-बार जोर देकर कहा, "हमें इंपोर्टेड पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल सिर्फ जरूरत के हिसाब से ही करना चाहिए।"

उन्होंने मेट्रो का इस्तेमाल, कारपूलिंग, EV अपनाने और रेल से माल ढुलाई करने की भी अपील की। ​​ये कोई रैंडम लाइफस्टाइल सुझाव नहीं हैं। ये ट्रांसपोर्ट में तेल की डिमांड कम करने की खास कोशिशें हैं, जो भारत का सबसे ज्यादा फ्यूल इस्तेमाल करने वाला सेक्टर है। 'इंडिया टुडे' के मुताबिक, तेल कंपनियों को हर महीने लगभग 30,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। पेट्रोल की अंडर-रिकवरी लगभग 24 रुपये/लीटर है। जबकि डीजल की अंडर-रिकवरी लगभग 30 रुपये/लीटर है।

इसका मतलब है कि ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को जल्द ही कीमतें बढ़ाने, नुकसान उठाने या सरकारी मदद लेने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। इनमें से हर ऑप्शन ग्रोथ को नुकसान पहुंचाता है। डीजल की बढ़ी कीमतों का असर ट्रकिंग, डिलीवरी कंपनियों, ई-कॉमर्स लॉजिस्टिक्स, बस ऑपरेटर, कैब सर्विस, शिपिंग और FMCG डिस्ट्रीब्यूशन पर भी पड़ता है।

3. फर्टिलाइजर, खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था

प्रधानमंत्री मोदी के भाषण में सबसे कड़ी चेतावनियों में से एक फर्टिलाइजर के बारे में थी। उन्होंने कहा, "हमें केमिकल फर्टिलाइज़र का इस्तेमाल आधा कर देना चाहिए।" यह राजनीतिक रूप से ज़रूरी है क्योंकि फर्टिलाइजर भारत के सबसे सेंसिटिव सब्सिडी सेक्टर में से एक है। भारत बड़ी मात्रा में यूरिया, DAP, पोटाश और फर्टिलाइजर का कच्चा माल इंपोर्ट करता है।

फर्टिलाइजर का प्रोडक्शन नैचुरल गैस की कीमतों, ग्लोबल एनर्जी मार्केट और शिपिंग कॉस्ट से बहुत अधिक जुड़ा हुआ है। जैसे-जैसे तेल की कीमतें बढ़ती हैं फर्टिलाइजर सब्सिडी भी बढ़ती जाती है। PM मोदी ने फर्टिलाइजर इंपोर्ट को साफ तौर पर फॉरेन एक्सचेंज स्ट्रेस से जोड़ा। उन्होंने कहा, "एक और सेक्टर जो फॉरेन करेंसी खर्च करता है, वह है हमारी खेती...।"

अगर फर्टिलाइजर की कीमतें बढ़ती हैं या सब्सिडी देना मुश्किल हो जाता है, तो खेती की लागत बढ़ जाती है। खेती का मार्जिन कम हो जाता है। खाने की चीजों की महंगाई बढ़ जाती है। साथ ही गांवों में मांग कम हो जाती है। किसानों को सिंचाई के लिए डीजल की ज्यादा लागत, महंगे ट्रांसपोर्ट और बढ़ती इनपुट कीमतों का भी सामना करना पड़ता है। इससे ट्रैक्टर की मांग, खेती के सामान की बिक्री, गांवों के FMCG और दोपहिया बाजारों पर असर पड़ सकता है।

4. गोल्ड और इंपोर्टेड कंज्यूमर गुड्स

प्रधानमंत्री मोदी के भाषण का सबसे खास हिस्सा भारतीयों से यह उनकी अपील थी कि वे एक साल तक शादियों के लिए सोना (Gold) न खरीदें। भारत में यह एक अनोखी अपील है क्योंकि सोने की खरीदारी भारतीयों की सांस्कृतिक रूप से जुड़ी हुई है। भारत दुनिया के सबसे बड़े सोने के इंपोर्टर में से एक है। सोने के इंपोर्ट में अरबों डॉलर खर्च होते हैं। इससे करंट अकाउंट डेफिसिट बढ़ता है और फॉरेक्स रिज़र्व पर दबाव पड़ता है। इंडस्ट्रियल इंपोर्ट के उलट सोना सीधे तौर पर प्रोडक्टिव कैपेसिटी को नहीं बढ़ाता है।

ये भी पढ़ें- WFH की अपील और पेट्रोल बचाने वाली बात पर अब अश्विनी वैष्णव ने अंडरलाइन की ये चीजें, मामला कितना गंभीर है समझिए

PM मोदी के भाषण के एक दिन बाद सोमवार 11 मई को टाइटन, सेंको गोल्ड और दूसरे ज्वेलरी स्टॉक्स में 10 प्रतिशत तक की गिरावट आई। हमारे सहयोगी 'मनीकंट्रोल' के मुताबिक, 11 मई को सुबह 9.50 बजे, टाइटन के शेयर्स 7 परसेंट गिरकर निफ्टी के टॉप लूजर बन गए। मार्च तिमाही के नतीजों के बाद शुक्रवार को अपने ऑल-टाइम हाई लेवल को छूने के बाद स्टॉक में गिरावट आई। कल्याण ज्वैलर्स, सेंको गोल्ड, PC ज्वैलर जैसे दूसरे ज्वेलरी स्टॉक्स 5 फीसदी से 10 परसेंट नीचे ट्रेड कर रहे थे।

अगर परिवार अपनी मर्जी से इंपोर्ट कम करते हैं, तो ज्वेलरी रिटेल, लग्जरी फैशन, इंपोर्टेड इलेक्ट्रॉनिक्स, प्रीमियम अप्लायंसेज, हाई-एंड कारों और लग्जरी मॉल्स पर दबाव बढ़ सकता है। कई कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर्स सेमीकंडक्टर, बैटरी, डिस्प्ले पैनल और विदेशों से सोर्स किए गए कंपोनेंट्स की वजह से बहुत ज्यादा इंपोर्ट पर निर्भर हैं। न्यूज एजेंसी 'रॉयटर्स' का कहना है कि कमजोर रुपया उनकी लैंडेड कॉस्ट को तेजी से बढ़ाता है।

5. मैन्युफैक्चरिंग, MSME और इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन

बड़ी मैन्युफैक्चरिंग इकॉनमी पर लंबे समय तक दबाव रह सकता है, क्योंकि लगभग हर इंडस्ट्रियल सेक्टर इम्पोर्टेड एनर्जी पर निर्भर है। तेल और गैस की ऊंची कीमतें बिजली, माल ढुलाई, केमिकल्स, प्लास्टिक, पैकेजिंग, मेटल्स और इंडस्ट्रियल ट्रांसपोर्ट पर असर डालती हैं। MSME खास तौर पर कमजोर हैं। छोटे मैन्युफैक्चरर्स आमतौर पर कम मार्जिन, लिमिटेड प्राइसिंग पावर और महंगे वर्किंग कैपिटल पर काम करते हैं।

ये भी पढ़ें- 'ये उपदेश नहीं, नाकामी के सबूत हैं...'; पीएम मोदी की सात अपील पर राहुल गांधी का पलटवार

इसलिए बढ़ती फ्यूल की कीमतें, लॉजिस्टिक्स कॉस्ट, इम्पोर्टेड रॉ मटेरियल की कीमतें और इंटरेस्ट रेट्स प्रॉफिटेबिलिटी को तेजी से कम कर सकती हैं। ईरान युद्ध के कारण 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' संकट भी दुनिया भर में शिपिंग रूट्स और माल ढुलाई की लागत में रुकावट डाल रहा है। इससे फार्मास्यूटिकल्स, केमिकल्स, ऑटो कंपोनेंट्स, इंजीनियरिंग गुड्स और टेक्सटाइल्स के लिए संकट पैदा हो सकता है।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।