प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी विदेशी आक्रमणकारियों के बार-बार हमलों के बाद पुनर्निर्मित सोमनाथ मंदिर का 11 जनवरी को दौरा करेंगे। इससे एक दिन पहले PM मोदी ने सोमवार को लिखे एक ब्लॉग में गुजरात के सोमनाथ मंदिर को भारत की सभ्यता की दृढ़ता और निरंतरता का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि यह मंदिर कई हमलों के बाद भी आज तक खड़ा है, जो भारत की अटूट भावना को दिखाता है।
मोदी ने लिखा कि साल 2026 में सोमनाथ मंदिर पर हुए पहले हमले को 1000 साल पूरे हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि बार-बार हुए हमलों के बावजूद यह मंदिर फिर से खड़ा हुआ। यह भारत माता के उन अनगिनत पुत्रों की वीरता की कहानी है, जिन्होंने हमारी संस्कृति और सभ्यता की रक्षा की।
उन्होंने लिखा, “सोमनाथ हमारी सभ्यता के उस जज्बे का सबसे बड़ा उदाहरण है, जो कभी हार नहीं मानी। कठिनाइयों और संघर्षों के बावजूद यह आज भी गर्व के साथ खड़ा है।”
मोदी ने कहा कि सोमनाथ का महत्व सिर्फ धार्मिक नहीं था, बल्कि यह समुद्र तट पर स्थित होने के कारण भारत के व्यापार और समृद्धि का भी प्रतीक था। लेकिन उन्होंने जोर देते हुए कहा कि सोमनाथ की कहानी विनाश की नहीं, बल्कि पुनर्निर्माण की है- यह करोड़ों भारतीयों की हिम्मत का प्रतीक है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि जैसे सोमनाथ बार-बार खड़ा हुआ, वैसे ही भारत ने भी सदियों की गुलामी और बाहरी आक्रमणों के बाद आज फिर दुनिया में अपनी पहचान बनाई है। आज भारत को आशा और विश्वास से देखा जा रहा है, और दुनिया हमारे युवाओं में निवेश करना चाहती है। भारतीय संस्कृति, योग, आयुर्वेद और त्योहारों को दुनिया भर में सम्मान मिल रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग सोमनाथ पर हमला करने आए थे, वे अब इतिहास के “धूलकण” बन चुके हैं, जबकि सोमनाथ आज भी जगमगा रहा है और हमें याद दिलाता है कि सच्ची आस्था कभी खत्म नहीं होती।
मोदी ने कहा कि सोमनाथ हमें यह सिखाता है कि नफरत और कट्टरता से कुछ समय के लिए विनाश हो सकता है, लेकिन विश्वास और अच्छाई सदा कायम रहती है। उन्होंने कहा, “जब मंदिर इतनी बार नष्ट होकर भी दोबारा खड़ा हो सकता है, तो हम भी अपने देश को फिर से वही महानता दिला सकते हैं, जो एक हजार साल पहले थी।”
उन्होंने ‘विकसित भारत’ के विजन का जिक्र करते हुए कहा कि भारत अब अपने प्राचीन ज्ञान और आधुनिक सोच के साथ आगे बढ़ रहा है।
इतिहास में सोमनाथ मंदिर पर कई बार हमले हुए, जिनमें सबसे प्रसिद्ध हमला 1024 ईस्वी में महमूद गजनवी ने किया था। आजादी के बाद सरदार वल्लभभाई पटेल ने इस मंदिर के पुनर्निर्माण का बीड़ा उठाया।
दीवाली 1947 में सोमनाथ यात्रा के दौरान पटेल ने घोषणा की कि मंदिर को दोबारा बनाया जाएगा। उनका यह सपना 11 मई 1951 को पूरा हुआ, जब राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने नए मंदिर का उद्घाटन किया।
मोदी ने कहा कि पटेल इस कार्यक्रम तक जिंदा नहीं रहे, लेकिन उनका सपना साकार हुआ। उन्होंने यह भी बताया कि उस समय के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू इस उद्घाटन को लेकर बहुत उत्साहित नहीं थे और चाहते थे कि राष्ट्रपति इसमें शामिल न हों, लेकिन राजेंद्र प्रसाद डटे रहे और वही इतिहास बन गया।