PM Modi Gujarat Visit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार (31 मार्च) को महावीर जयंती के अवसर पर गांधीनगर के कोबा गांव में जैन विरासत और अहिंसा के मूल्यों को समर्पित नवनिर्मित 'सम्राट संप्रति म्यूजियम' का उद्घाटन किया। प्रधानमंत्री ने जैन संतों के साथ महावीर जयंती के अवसर पर म्यूजियम का उद्घाटन किया। श्री महावीर जैन आराधना केंद्र में स्थित इस म्यूजियम का नाम सम्राट संप्रति महाराज (224-215 ईसा पूर्व) के नाम पर रखा गया है। वे सम्राट अशोक के पोते और मौर्य वंश के एक शासक थे। उन्होंने जैन धर्म और अहिंसा के सिद्धांत का प्रचार-प्रसार किया।
एक सरकारी बयान में कहा गया है कि म्यूजियम में सदियों पुरानी दुर्लभ जैन कलाकृतियां और पारंपरिक विरासत वस्तुएं हैं। इनमें जटिल रूप से गढ़ी गई पत्थर और धातु की मूर्तियां, लघु चित्र, चांदी के रथ, सिक्के और प्राचीन पांडुलिपियां शामिल हैं। विज्ञप्ति में कहा गया है कि इस म्यूजियम में कई विशाल हॉल हैं जिनमें 2,000 से अधिक वस्तुएं रखी गई हैं। यह म्यूजियम विजिटर्स को जैन धर्म के विकास और इसके गहन सांस्कृतिक प्रभाव के बारे में कालानुक्रम आधारित समझ प्रदान करता है।
इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने महावीर जयंती के अवसर पर देशवासियों को शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि सत्य, सद्भाव, सद्व्यवहार और समानता पर आधारित भगवान महावीर के संदेशों में अद्भुत प्रेरणा है और उनके महान विचार सदैव मानवता के पथ-प्रदर्शक बने रहेंगे। उन्होंने कहा कि भगवान महावीर के आदर्श आध्यात्मिक रूप से उत्थानकारी हैं। पीएम ने कहा कि आज के समय में भी बेहद प्रासंगिक हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "महावीर जयंती के पावन पर्व पर मुझे इस पवित्र जैन तीर्थ आने का सौभाग्य मिला है। मैं कोबा तीर्थ से सभी को महावीर जयंती की शुभकामनाएं देता हूं।" इस मौके पर गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल और उपमुख्यमंत्री हर्ष सांघवी भी मौजूद रहे।
पीएम मोदी ने कहा मुझे खुशी है कि हजारों वर्ष की भारतीय विरासत, जैन धर्म का समयातीत ज्ञान, हमारी धरोहरें और उनसे मिलने वाली प्रेरणाएं। उन्हें आने वाली सदियों तक अमर बनाने के लिए, उन्हें नए और आधुनिक रूप में अगली पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए हमारे संतों ने इस जैन हेरिटेज म्यूजियम की संकल्पना की।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज यह संकल्पना एक भव्य रूप में साकार हो रही है। यह सम्राट संप्रति संग्रहालय, जैन दर्शन, भारतीय संस्कृति और हमारी प्राचीन धरोहर का एक पवित्र केंद्र बना है। मैं इस अद्वितीय प्रयास के लिए हमारे सभी जैन संतों का अभिनंदन करता हूं।