पीएम मोदी की जनधन योजना के 12 साल पूरे- योजना बनी आर्थिक सशक्तिकरण की बड़ी मिसाल

पीएम जन धन योजना (पीएम-जेडीवाई) 2014 में शुभारंभ होने के बाद से भारत की वित्तीय समावेशन यात्रा की आधारशिला के रूप में उभरी है। 12 वर्षों में इस अभियान ने वंचित समुदायों के लिए औपचारिक बैंकिंग, ऋण, बीमा, पेंशन और डिजिटल भुगतान तक पहुंच का विस्तार किया है।

अपडेटेड Aug 27, 2026 पर 8:23 PM
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पीएम मोदी की जनधन योजना के 12 साल पूरे

पीएम जन धन योजना (पीएम-जेडीवाई) 2014 में शुभारंभ होने के बाद से भारत की वित्तीय समावेशन यात्रा की आधारशिला के रूप में उभरी है। 12 वर्षों में इस अभियान ने वंचित समुदायों के लिए औपचारिक बैंकिंग, ऋण, बीमा, पेंशन और डिजिटल भुगतान तक पहुंच का विस्तार किया है। 2015 में पीएमजेडीवाई खातों की संख्या 14.72 करोड़ थी जो 19 अगस्त 2026 तक बढ़ कर 59.09 करोड़ पहुंच गई है, जिसमें 32.92 करोड़ महिला लाभार्थी हैं। जमा राशि में भी लगातार वृद्धि हुई है और यह औपचारिक वित्तीय प्रणाली में मजबूत भागीदारी को दर्शाती है। वित्तीय समावेशन के लिए भारत के राष्ट्रीय मिशन के रूप में यह योजना, वित्तीय पहुंच को अधिक सुरक्षा, अवसर और आर्थिक सशक्तीकरण में बदल रही है।

खास बात ये  है कि भारत का वित्तिय समावेशन सूचकांक जो 2018 में  53.9 था, वो 2026 तक बढ़कर 67 हो गया।  यह आंकड़ा  ऋण, बीमा, बचत और डिजिटल भुगतान तक मजबूत पहुंच को दर्शाता है।

शायद ये कम ही लोगों को याद होगा कि जनवरी 2015 में गिनीज वर्लड रिकार्ड्स  ने पीएमजेडीवाई के तहत चल रहे  आर्थिक समावेश  के अभियान  की व्यापकता को मान्यता दी थी। साथ ही आईएमएफ और विश्व बैंक ने औपचारिक  बैंकिंग सेवाओ तक विस्तार करने और औपचारिक वित्तिय प्रणाली मे  अधिक लोगों को शामिल करने में योजना की भूमिका का उल्लेख किया है।


दुनिया की सबसे बड़ी वित्तीय समावेशन पहल के रूप में, पीएम-जेडीवाई लाखों वंचित नागरिकों के लिए बैंकिंग तक पहुंच को फिर से परिभाषित कर रही है। इस योजना की शुरुआत में ही मोदी सरकार ने हर घर को बैंक खाता प्रदान करने पर पूरा ध्यान केंद्रीत किया। साल 2018 पूरा ध्यान ये सुनिश्चित करने पर लगाया गया कि बैंक खात रहित प्रत्येक वयस्क के पास बैंक खाते की पहुंच हो, जिससे वित्तीय समावेशन की पहुंच बढ़ सके। यह वंचित और कम आय वाले समूहों को बुनयादी बैंकिंग सेवाएं, आवश्यकता-आधारित ऋण, प्रेषण, बीमा और पेंशन प्रदान करती है।

सभी भारतीय नागरिक पीएम-जेडीवाई खाता खोलने के पात्र हैं, जिनकी कोई ऊपरी आयु सीमा नहीं है। बैंक खाते से रहित व्यक्ति के लिए एक बुनियादी बचत बैंक खाता खोला जाता है। न्यूनतम शेष राशि बनाए रखने की कोई आवश्यक्ता नहीं होती है। पीएम जेडीवाई के तहत कोई भी व्यक्ति किसी भी बैंक शाखा या फिर बैंक मित्र आउटलेट पर जाकर खाता खोल सकता है। आवश्यक केवाईसी दस्तावेजों के साथ खाता खोलने का फॉर्म जमा करना होगा।

सत्यापन के बाद, खाता बैंक द्वारा सक्रिय किया जाता है। खास बात ये कि एक संयुक्त खाता भी खोला जा सकता है। बचत खातों  पर बैंकों के द्वारा लागू व्याज दर पीएमजेडीवाई योजना के तहत खोले गए खातों पर लागू होगी। खास बात ये है कि खाता धारकों को रुपे डेबिट कार्ड, दुर्घटना बीमा कवर जिसका कोई प्रीमियम लाभार्थी से नहीं लिया जाता । जानकारी के लिए बता दें कि अगर खाते का संतोषजनक संचालन किया जाता है तो लाभार्थी को 10000 रुपये के ओवरड्राफ्ट की सुविधा भी दी जाएगी।

इन 12वर्षों  में जमा धनराशि 20 गुना बढ़ गयी है जो मार्च 2015 में 15,670 करोड़ से बढ़कर 19 अगस्त 2026 तक 3,16,514 करोड़ रुपयों तक पहुंच गयी है। जाहिर है मोदी सरकार की वित्तिय समावेश पर की गयी पहल की ये अनुठी मिसाल है जिसमें कम आय वाले परिवारों के बीच बचत की बढ़ती आदत, औपचारिक बैंकिंग में बढ़ते विश्वास और वित्तिय प्रणाली में हर वर्ग की मजबूत भागीदारी को दर्शाती है। पीएमजेडीवाई योजना का प्रभाव बढ़ते खातों और बढ़ती जमा राशि से परे है। यह न केवल औपचारिक वित्तिय पहुंच को मजबूत बना रहा है बल्कि वंचित,-शोषित समाज के लोगों तक आर्थिक विश्वास को बढावा दे रहा है।

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