PM Modi: मिडिल ईस्ट जंग के बीच PM मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति से की बात, कहा- डायलॉग और डिप्लोमेसी से हो समाधान
PM Modi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से फोन पर बात की और मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि भारत शांति और बातचीत का समर्थन करता है। पिछले महीने ईरान संघर्ष शुरू होने के बाद से दोनों नेताओं के बीच यह पहली सीधी बातचीत थी।
मिडिल ईस्ट जंग के बीच PM मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति से की बात
PM Modi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से फोन पर बात की और मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि भारत शांति और बातचीत का समर्थन करता है। पिछले महीने ईरान संघर्ष शुरू होने के बाद से दोनों नेताओं के बीच यह पहली सीधी बातचीत थी।
प्रधानमंत्री मोदी ने देर रात X पर एक पोस्ट में कहा, "क्षेत्र में गंभीर स्थिति पर चर्चा करने के लिए ईरानी राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजेश्कियन से बातचीत की। तनाव बढ़ने, नागरिकों की जान जाने और नागरिक बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान पर गहरी चिंता व्यक्त की।"
उन्होंने आगे कहा, "भारतीयों की सुरक्षा और सामान व ऊर्जा की सप्लाई बिना रुकावट जारी रहना भारत की सबसे बड़ी प्राथमिकता बनी हुई है। उन्होंने शांति और स्थिरता के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया और सभी पक्षों से बातचीत और कूटनीति का आग्रह किया।"
Had a conversation with Iranian President, Dr. Masoud Pezeshkian, to discuss the serious situation in the region.
Expressed deep concern over the escalation of tensions and the loss of civilian lives as well as damage to civilian infrastructure. The safety and security of… — Narendra Modi (@narendramodi) March 12, 2026
प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले 10 दिनों में कई पश्चिम एशियाई देशों के नेताओं से बात की है। यह बातचीत उस हमले के बाद हुई है, जो अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान के खिलाफ किया था। इस हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की 28 फरवरी को हत्या कर दी गई, जिसके बाद मिडिल ईस्ट में युद्ध छिड़ गया।
ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए खाड़ी क्षेत्र में इजरायल और अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया, जिनमें दुनिया के बड़े बिजनेस और एविएशन हब दुबई और दोहा भी शामिल थे।
विश्व के करीब पांचवें हिस्से का तेल और लिक्विड नेचुरल गैस (LNG) के परिवहन का केंद्र रहे होर्मुज स्ट्रेट में और उसके आसपास जहाजों की आवाजाही लगभग ठप्प पड़ी है। संयुक्त अरब अमीरात और इराक के तट के पास खाड़ी में तीन और जहाजों पर हमले हुए हैं।
भारत लिक्विड पेट्रोलियम गैस (LPG) का विश्व का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार है, जिसका 90 प्रतिशत हिस्सा होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरता है, जहां यातायात लगभग ठप्प हो गया है।
मिडिल ईस्ट से दूर भारत में भी इस युद्ध का असर दिखने लगा है। कई रेस्टोरेंट में कुकिंग गैस की कमी महसूस की जा रही है।
बुधवार को प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि "घबराने की कोई जरूरत नहीं है।" सरकार ने कुकिंग गैस की सप्लाई बढ़ाने के लिए उद्योग जगत की अपीलों की समीक्षा के लिए एक समिति का गठन किया है।
ईरान के एक शीर्ष सैन्य अधिकारी ने कल चेतावनी दी कि देश एक लंबा युद्ध छेड़ सकता है जो विश्व अर्थव्यवस्था को "नष्ट" कर देगा, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने जोर देकर कहा कि ईरान जल्द हार का सामना करने वाला है।
भारत की कूटनीतिक पहल
प्रधानमंत्री ने इससे पहले ओमान, कुवैत, बहरीन, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, जॉर्डन, इजरायल और कतर के नेताओं से बात की और उनके देशों पर हुए हमलों पर चिंता व्यक्त की तथा कुछ देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के उल्लंघन की निंदा की।
लगभग 1 करोड़ भारतीय खाड़ी और पश्चिम एशिया में रहते हैं। इनमें से लगभग 10,000 भारतीय नागरिक ईरान में रहते, पढ़ते और काम करते हैं, जबकि 40,000 से अधिक इजरायल में रहते हैं।
विदेश मंत्रालय ने एक प्रेस ब्रीफिंग में बताया कि इससे पहले दिन में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से जहाजों की सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति की स्थिति पर चर्चा की।
यह प्रेस ब्रीफिंग होर्मुज स्ट्रेट में हाल ही में हुए कई हमलों के बाद की गई। यह जलमार्ग ईरान और ओमान के बीच स्थित है और दुनिया में तेल व्यापार के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण रास्ता माना जाता है।
विदेश मामलों के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि चर्चा का मुख्य केंद्र जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना और क्षेत्र में स्थिर ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखना था।
जायसवाल ने कहा, "विदेश मंत्री और ईरान के विदेश मंत्री के बीच हाल के दिनों में तीन बार बातचीत हुई है। आखिरी बातचीत में जहाजों की सुरक्षा और भारत की ऊर्जा सुरक्षा से संबंधित मुद्दों पर चर्चा हुई। इससे आगे कुछ कहना मेरे लिए जल्दबाजी होगी।"
मंत्रालय ने यह भी पुष्टि की कि छात्रों, नाविकों, प्रोफेशनल्स, कारोबारियों और तीर्थयात्रियों सहित लगभग 9,000 भारतीय नागरिक वर्तमान में ईरान में हैं और देश में सुरक्षा चिंताओं के मद्देनजर उन्हें सहायता प्रदान की जा रही है।