भुवनेश्वर: आज के दौर में जहां लोग 10 रुपये दान करने से पहले 10 बार सोचते हैं, वहीं ओडिशा के एक पोस्टमास्टर ने इंसानियत की ऐसी मिसाल पेश की है जिसे सुनकर हर कोई सलाम कर रहा है। ना उनके पास स्मार्टफोन है, ना डिजिटल वॉलेट... लेकिन दिल सोने से भी खरा है।
कौन हैं ये पोस्टमास्टर बिमल और क्या है त्रिशिका की कहानी?
बिमल कुमार साहू 58 साल के हैं और ढेंकानाल जिले के गांदिया ब्लॉक स्थित पिंगुआ सब-पोस्ट ऑफिस में पोस्टमास्टर हैं। रिटायरमेंट में कुछ ही दिन बाकी हैं और उनकी मासिक सैलरी 26,304 रुपये है। वहीं, जाजपुर जिले की 2 साल की त्रिशिका रे एक दुर्लभ बीमारी स्पाइनल मस्कुलर एट्रॉफी (एसएमए) टाइप-2 से जूझ रही है। डॉक्टरों ने उसके इलाज के लिए जोल्जेन्स्मा इंजेक्शन की सलाह दी है, जिसकी कीमत करीब 16 करोड़ रुपये बताई गई है। त्रिशिका के पिता क्राउडफंडिंग के जरिए इलाज के लिए पैसे जुटा रहे हैं। अब तक करीब 6 करोड़ रुपये जुटाए जा चुके हैं, जबकि अभी भी करीब 10 करोड़ रुपये की जरूरत है।
टीवी पर देखी खबर, फिर स्कूटर में पेट्रोल भरकर निकल पड़े
बिमल साहू ने टीवी पर त्रिशिका की खबर देखी। उन्होंने सोचा कि ऑनलाइन कैसे भेजूं, इससे अच्छा है खुद जाकर दे आऊं। उन्होंने अपने स्कूटर में पेट्रोल भरवाया और सीधे भुवनेश्वर के लिए निकल पड़े। रास्ता पूछते-पूछते वह News18 के ऑफिस पहुंचे और बोले - मुझे त्रिशिका की मदद करनी है। वहीं पर त्रिशिका के परिवार को बुलाया गया और बिमल जी ने अपनी पूरे महीने की सैलरी उनके हाथ में रख दी।
बोले- मैं तो बस गिलहरी जैसा योगदान दे रहा हूं
पैसे देते हुए बिमल साहू ने कहा, "मैं इस बच्ची को जितने पैसों की जरूरत है उतना तो नहीं दे सकता, लेकिन क्या मैं गिलहरी की तरह अपना छोटा सा योगदान भी नहीं दे सकता?" उनका यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
बिमल साहू की यह कहानी सिर्फ दान की नहीं, बल्कि सोच की है। एक तरफ जहां लोग मदद के नाम पर सोशल मीडिया पर सिर्फ पोस्ट शेयर करके अपनी जिम्मेदारी खत्म समझ लेते हैं, वहीं 58 साल के इस पोस्टमास्टर ने बिना किसी दिखावे के वह कर दिया जो बड़े-बड़े दानवीर भी नहीं कर पाते। उनकी सैलरी भले ही 26 हजार हो, लेकिन उनका दिल करोड़ों का है। रिटायरमेंट से ठीक पहले दिया गया उनका यह योगदान यह बताता है कि इंसानियत आज भी जिंदा है। सोशल मीडिया पर अब हर कोई कह रहा है - टेक्नोलॉजी नहीं, नियत बड़ी होनी चाहिए।