आईआईटी में पढ़ाई का सपना टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में करियर बनाने के इच्छुक ढेरों युवाओं का होता है। इसके लिए छात्र जेईई एडवांस्ड की तैयारी करते हैं, जिसे देश की सबसे मुश्किल प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक माना जाता है। आमतौर पर छात्र और अभिभावक सोचते हैं कि JEE एडवांस्ड की तैयारी का मतलब सबसे अच्छी कोचिंग, शांत स्टडी रूम या बिना रुकावट इंटरनेट एक्सेस होना है। लेकिन मुंबई के अभिषेक शर्मा के लिए ये सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं। इसके बावजूद उन्होंने जेईई एडवांस्ड में ऑल इंडिया रैंक 2,456 हासिल की, जिसमें OBC-NCL रैंक 415 थी। वह अब आईआईटी दिल्ली से बीटेक कर रहे हैं।
मोबाइल डेटा खत्म होने के बाद पड़ोसी के वाईफाई से की पढ़ाई
अभिषेक की कामयाबी की चर्चा होना इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि उन्होंने साबित किया है कि देश की सबसे प्रतियोगी प्रवेश परीक्षा में सफल होने के लिए पैसा हो या न हो, सही सोच जरूरी है। उनका परिवार मुंबई के एक स्लम एरिया लोकमान्य तिलक नगर में किराए के घर में रहता था, जहां वे हर महीने ₹3,000 किराया देते थे। उनके पिता एक स्टील फैब्रिकेशन कंपनी में मजदूर के तौर पर काम करते थे और परिवार के पास पैसे कम थे। जेईई एडवांस्ड की तैयारी कर रहे कई छात्रों के लिए, किताबें, कोचिंग, स्टेबल इंटरनेट और पढ़ाई के लिए एक खास जगह तक पहुंच उनकी तैयारी का एक जरूरी है। शर्मा के पास उस स्तर की सुविधाएं नहीं थीं। इसके बजाय, उन्होंने अपने आस-पास जो भी सुविधाएं मौजूद थीं, उन पर भरोसा किया और मुश्किलों के बावजूद पढ़ाई जारी रखी।
कम सहूलियों के बावजूद शर्मा ने कैसे की तैयारी ?
अभिषेक के लिए जेईई एडवांस्ड की तैयारी के रास्ते की सबसे बड़ी मुश्किल थी इंटरनेट एक्सेस। फोन का मोबाइल डेटा जब खत्म हो जाता था, तो वह छत पर जाते थे और अपने पड़ोसी के Wi-Fi से कनेक्ट करते थे ताकि वह अपनी पढ़ाई जारी रख सकें। उनके घर का माहौल भी परिवार के वित्तीय हालात से अलग नहीं था। उनका परिवार महंगी कोचिंग सुविधा और तैयारी के दूसरे महंगे स्रोत उपलब्ध नहीं करा सकता था। इसके बावजूद अभिषेक ने इन मुश्किलों को अपने इरादे कमजोर करने नहीं दिया। उन्होंने एग्जाम की तैयारी जारी रखी और आखिरकार ऐसी रैंक हासिल की जिससे भारत के सबसे बड़े इंजीनियरिंग इंस्टीट्यूशन में से एक में एडमिशन मिल गया।
जब JEE एडवांस्ड के रिजल्ट घोषित हुए, तो अभिषेक का नाम ऑल इंडिया रैंक 2,456 और OBC-NCL रैंक 415 के साथ आया। यह रिजल्ट उनके करियर का वह पहला कदम था जहां से IIT दिल्ली की यात्रा शुरू होनी थी। शर्मा अब आईआईटी दिल्ली से बीटेक कर रहे हैं। उनका सफर दिखाता है कि एक ही परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों के हालात कितने अलग हो सकते हैं। अभिषेक की सक्सेस स्टोरी दिखाती है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के दौरान पैसों की तंगी किस तरह की मुश्किलें पैदा कर सकती है।