Project Cheetah: प्रोजेक्ट चीता के चौथे चरण में हुई राधा की एंट्री, इस मादा चीता की कहानी जानिए

Project Cheetah: मध्य प्रदेश के गांधी सागर वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी में प्रोजेक्ट चीता के चौथे चरण में बोत्सवाना से लाई गई तीन साल की मादा चीता राधा को शामिल किया गया है। राज्य के मुख्यमंत्री मोहन यायव ने चीता CCB-2 को राधा नाम दिया और उसे सैंक्चुअरी के एक सुरक्षित बाड़े में छोड़ दिया

अपडेटेड Sep 21, 2026 पर 10:52 AM
  • Follow Us On Google
  • Add as a Preferred Source on Google
बोत्सवाना से लाई गई तीन साल की मादा चीता CCB-2 को गांधी सागर वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी में छोड़ा।

Project Cheetah: प्रोजेक्ट चीता का चौथा चरण एक नए सदस्य के शामिल होने के साथ ही शुरू हो चुका है। हाल में इस प्रोजेक्ट के चार साल पूरे हुए हैं। इसके दिन एक अन्य मादा चीता द्वारा चार शावकों को जन्म देने से प्रोजेक्ट से जुड़े सभी सदस्य खासे उत्साहित हैं। इस बीच राज्य के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने देश में चीतों की आबादी बढ़ाने के लिए बोत्सवाना से लाई गई तीन साल की मादा चीता CCB-2 को गांधी सागर वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी में छोड़ा।

सीएम मोहन यादव ने इस मादा चीता को राधा नाम दिया और फिर उसे सैंक्चुअरी के एक सुरक्षित बाड़े में छोड़ दिया। राधा के आने के साथ, गांधी सागर वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी में अब चार अफ्रीकी चीते हैं – दो नर और दो मादा। अधिकारियों ने कहा कि यह कदम प्रोजेक्ट चीता की लंबी योजना का हिस्सा है। इसका मकसद चीतों की आबादी को सिर्फ कुनो नेशनल पार्क में इकट्ठा करने के बजाय कई जगहों पर बसाने का है। राधा को कुनो नेशनल पार्क से शिफ्ट किया गया, जो ट्रांसलोकेशन प्रोजेक्ट के तहत भारत में चीतों का पहला घर है, और उसे गांधी सागर वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी में पहले से मौजूद तीन साउथ अफ्रीकी चीतों से अलग एक बाड़े में छोड़ दिया गया।

सैंक्चुअरी में दूसरे चीते नर प्रभास और पावक, और मादा धीरा हैं। प्रभास और पावक को अप्रैल 2025 में कुनो नेशनल पार्क से गांधी सागर वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी में शामिल किया गया था, जबकि धीरा को सितंबर 2025 में सैंक्चुअरी में लाया गया था। अधिकारियों ने कहा कि चारों चीतों को अलग-अलग बाड़ों में रखा जा रहा है, राधा का बाड़ा साउथ अफ्रीकी चीतों वाले बाड़े से दूर है। अधिकारियों ने कहा कि गांधी सागर वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी में दक्षिण अफ्रीका और बोत्सवाना के चीतों की मौजूदगी अलग-अलग जेनेटिक लाइन के जानवरों के बीच ब्रीडिंग के जरिए जेनेटिक डाइवर्सिटी बनाए रखने में मदद करेगी।


उन्होंने कहा कि भारत में अब चीतों की आबादी 56 हो गई है। इनमें से चार चीते गांधी सागर वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी में हैं। कुनो नेशनल पार्क में 52 अफ्रीकी चीते और उनके भारत में जन्मे बच्चे शामिल हैं। मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड इलाके में एक और जगह, वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व, को भी चीतों को रखने के लिए पांच सुरक्षित बाड़ों के साथ तैयार किया गया है। सात दशक पहले देश में चीतों के खत्म हो जाने के बाद, भारत में इस प्रजाति को फिर से विकसति करने के लिए सितंबर 2022 में इंटरकॉन्टिनेंटल चीता प्रोग्राम शुरू किया गया था।

इस प्रोजेक्ट के तहत, सितंबर 2022 में नामीबिया से आठ चीते लाए गए, इसके बाद फरवरी 2023 में दक्षिण अफ्रीका से 12 चीते लाए गए। इस साल 28 फरवरी को बोत्सवाना से नौ चीतों का तीसरा बैच कुनो नेशनल पार्क पहुंचा, और राधा का गांधी सागर वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी में जाना, प्रोजेक्ट को कुनो से आगे बढ़ाने की दिशा में सबसे नया कदम है।

‘हनुमान अंश’ का जलवा बरकरार, 45वें दिन 13.75 करोड़ की कमाई से बॉक्स ऑफिस पर मचाई हलचल!

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।