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40 लग्जरी विला, 6.16 करोड़ रुपये का निवेश और हर साल ₹1.80 करोड़ किराया, IAS-IPS पति-पत्नी पर भ्रष्टाचार का शिकंजा!

Rajasthan IAS-IPS Couple News: राजस्थान सरकार ने सरकारी पद के दुरुपयोग और एक निजी कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाने के आरोप में भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के अधिकारी शिखर अग्रवाल, उनकी IPS पत्नी प्रशाखा माथुर और अन्य लोगों के खिलाफ जांच को मंजूरी दे दी है। एक अधिकारी ने बताया कि भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ABC) इस मामले की विस्तृत जांच करेगा

Akhilesh Nath Tripathiअपडेटेड Nov 01, 2026 पर 9:35 AM
40 लग्जरी विला, 6.16 करोड़ रुपये का निवेश और हर साल ₹1.80 करोड़ किराया, IAS-IPS पति-पत्नी पर भ्रष्टाचार का शिकंजा!
Rajasthan IAS-IPS Couple News: राजस्थान की भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ABC) इस मामले की विस्तृत जांच करेगा

Rajasthan IAS-IPS Couple News: राजस्थान में वरिष्ठ IAS अधिकारी शिखर अग्रवाल और उनकी IPS पत्नी प्रशाखा माथुर से जुड़ा 40 लग्जरी विला और कॉटेज खरीदने का मामला इन दिनों सोशल मीडिया पर सुर्खियों में है। आरोप है कि IAS अधिकारी और उनके परिवार के सदस्यों ने दो बड़े रिसॉर्ट में करीब 6.16 करोड़ रुपये में 40 संपत्तियां खरीदीं। फिर उन्हीं संपत्तियों को बेचने वाली कंपनी को वापस लीज पर दे दिया। इस लीज व्यवस्था के तहत कपल को हर साल 1.80 करोड़ रुपये किराया मिलने की बात सामने आई है। मामला सामने आने के बाद राजस्थान सरकार ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) को विस्तृत जांच की मंजूरी दे दी है। दोनों वरिष्ठ अधिकारियों को फिलहाल अवेटिंग पोस्टिंग ऑर्डर्स (APO) पर रखा गया है।

क्या है पूरा मामला?

यह पूरा मामला राजस्थान के उदयपुर और अलवर में स्थित दो लग्जरी रिसॉर्ट से जुड़ा है। इन रिसॉर्ट का संचालन 'गोयल फैशंस प्राइवेट लिमिटेड' नाम की कंपनी करती है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, IAS अधिकारी शिखर अग्रवाल, उनकी IPS पत्नी प्रशाखा माथुर और परिवार के अन्य सदस्यों ने कंपनी से लगभग ढाई साल के दौरान बड़ी संख्या में कॉटेज और विला खरीदे।

बताया जा रहा है कि इन संपत्तियों की खरीदारी का कुल कीमत लगभग 6.16 करोड़ रुपये था। इस सौदे की सबसे अहम बात यह है कि संपत्तियां खरीदने के तुरंत बाद इन्हें उसी कंपनी को वापस लीज पर दे दिया गया, जिससे इन्हें खरीदा गया था। इस डील के तहत हर साल कुल 1.80 करोड़ रुपये किराए के रूप में मिलने का प्रावधान बताया गया है। इसी असामान्य खरीद और लीज व्यवस्था ने जांच एजेंसियों का ध्यान खींचा है।

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