राम मंदिर दान घोटाले में बड़ी कार्रवाई की तैयारी? चंपत राय के करीबी टिन्नू यादव की हो सकती है गिरफ्तारी!

टिन्नू यादव की पत्नी पूनम यादव ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए इसे उनके पति की छवि खराब करने की साजिश बताया है। उन्होंने कहा कि उनके परिवार को पिछले कई दिनों से मानसिक तनाव झेलना पड़ रहा है और बिना किसी ठोस सबूत के तरह-तरह के आरोप लगाए जा रहे हैं

अपडेटेड Jun 20, 2026 पर 6:17 PM
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राम मंदिर दान घोटाले में बड़ी कार्रवाई की तैयारी? चंपत राय के करीबी टिन्नू यादव पर शिकंजा कसने के संकेत

अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े कथित दान चोरी मामले में बड़ी कार्रवाई की तैयारी की खबरें सामने आ रही हैं। सूत्रों के अनुसार, ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के करीबी माने जाने वाले रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव पर कानूनी शिकंजा कस सकता है।

सूत्रों का कहना है कि मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) टिन्नू यादव, दान की गिनती में शामिल कर्मचारियों और कुछ बैंक अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर सकती है। बताया जा रहा है कि उनके खिलाफ केस दर्ज होने की संभावना है और आगे चलकर गिरफ्तारी भी हो सकती है।

पत्नी ने आरोपों को बताया साजिश


टिन्नू यादव की पत्नी पूनम यादव ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए इसे उनके पति की छवि खराब करने की साजिश बताया है।

उन्होंने कहा कि उनके परिवार को पिछले कई दिनों से मानसिक तनाव झेलना पड़ रहा है और बिना किसी ठोस सबूत के तरह-तरह के आरोप लगाए जा रहे हैं।

पूनम यादव के मुताबिक, उनके पास मौजूद संपत्तियों और घर को लेकर जो दावे किए जा रहे हैं, वे पूरी तरह गलत हैं। उन्होंने कहा कि उनका घर 2008 में खरीदा गया था और 2015 में बनाया गया था, जब राम मंदिर पर फैसला भी नहीं आया था।

क्या चंपत राय ट्रस्ट से हट सकते हैं?

सूत्रों के मुताबिक, चंपत राय समेत ट्रस्ट के कुछ अन्य पदाधिकारी स्वेच्छा से अपनी जिम्मेदारियों से अलग होने पर विचार कर सकते हैं। इसमें ट्रस्ट सदस्य अनिल मिश्रा और गोपाल राव का नाम भी शामिल बताया जा रहा है।

इसके अलावा, जिन पदाधिकारियों की कथित लापरवाही के कारण दान चोरी का मामला सामने आया, उन्हें ट्रस्ट से हटाया जा सकता है।

क्या है पूरा मामला?

राम मंदिर दान चोरी मामला उन आरोपों से जुड़ा है जिनमें दावा किया गया है कि श्रद्धालुओं द्वारा दान किए गए सोने, चांदी और हीरे के आभूषणों को कथित तौर पर नकली वस्तुओं से बदल दिया गया। साथ ही नकदी में भी गड़बड़ी और चोरी के आरोप लगे हैं।

जांच एजेंसियां दान के रिकॉर्ड, आभूषणों के रखरखाव और वित्तीय लेन-देन में कथित अनियमितताओं की जांच कर रही हैं। देश के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों में से एक से जुड़े होने के कारण इस मामले ने व्यापक जनचर्चा और पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

फिलहाल मामले की जांच जारी है और अधिकारियों की ओर से अभी अंतिम निष्कर्ष या आधिकारिक आरोप तय नहीं किए गए हैं। इसलिए जांच पूरी होने तक सभी आरोपों को कथित माना जा रहा है।

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