राम मंदिर में चढ़ावा विवाद की जांच के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम यानी SIT अयोध्या पहुंच चुकी है। SIT की टीम सोमवार 15 जून को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात करने के बाद अयोध्या पहुंची है। अब तक सामने आई जानकारी के मुताबिक, SIT के ये टीम श्रीराम मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों, मंदिर के कर्मचारियों और चिह्नित संदिग्ध लोगों से पूछताछ करेगी। वहीं राम मंदिर में चढ़ावा विवाद में अब तक क्या-क्या हुआ है आइए जानते हैं विस्तार से।
बता दें कि, सपा सरकार में मंत्री रह चुके पवन पांडेय ने रविवार 7 जून को दावा किया था कि राम मंदिर से करोड़ों रुपए तक की चोरी की गई। वहीं समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी इस मुद्दे को उठाया था। सपा प्रमुख ने कहा कि, इस मामले पर सरकार की चुप्पी संदिग्ध है। कोर्ट को मामला देखना चाहिए। वहीं इस विवाद के सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने बड़ा फैसला लिया।
योगी सरकार ने लिया बड़ा फैसला
बता दें कि, उत्तर प्रदेश सरकार ने राम जन्मभूमि मंदिर को मिले दान में कथित गड़बड़ी की जांच के लिए एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम का गठन किया है। बताया गया कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से जांच की मांग किए जाने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एसआईटी का गठन किया था। वहीं राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने SIT जांच के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा एसआईटी का गठन करना उसकी गंभीरता और तत्परता को दर्शाता है। उनके मुताबिक, मामले की निष्पक्ष जांच के लिए यह एक महत्वपूर्ण कदम है।
SIT टीम में कौन-कौन और क्या करेगी चांज
जानकारी के मुताबिक, जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि अब तक दान में मिली राशि का हिसाब-किताब कैसे रखा गया और कथित अनियमितताओं में किन लोगों की भूमिका रही। एसआईटी पैसों के पूरे लेन-देन की जांच करेगी। इसमें यह देखा जाएगा कि रकम किसने निकाली, पैसा कहां भेजा गया, किन लोगों तक पहुंचा और उसका इस्तेमाल किस तरह किया गया। वहीं इस स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम में लखनऊ मंडल के आयुक्त विजय विश्वास पंत, पुलिस महानिरीक्षक (IG) किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन को शामिल किया गया है।
विवाद पर हमलावर है समाजवादी पार्टी
वहीं अयोध्या से समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने कहा कि जांच पूरी होने तक ट्रस्ट के सभी मौजूदा सदस्यों को उनके पदों से हटा दिया जाना चाहिए। उनका कहना है कि अगर सदस्य अपने पदों पर बने रहते हैं, तो वे जांच प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं या उसमें हस्तक्षेप कर सकते हैं। अवधेश प्रसाद ने यह भी मांग की कि मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा न्यायाधीशों की निगरानी में गठित एक स्वतंत्र समिति से कराई जाए, ताकि पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी रहे।
पूर्व भाजपा सांसद ने भी उठाए सवाल
वहीं, राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े प्रमुख नेताओं में रहे और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के पूर्व सांसद विनय कटियार ने कहा कि मंदिर को मिले दान में गड़बड़ी के आरोप बेहद गंभीर हैं। उन्होंने कहा कि राम मंदिर आंदोलन के लिए अनेक लोगों ने संघर्ष किया और बलिदान दिए हैं। उन्होंने याद दिलाया कि उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह, वह स्वयं और कई अन्य लोग इस आंदोलन के दौरान जेल भी गए थे। कटियार ने कहा कि ऐसे में मंदिर के दान कोष से जुड़ी किसी भी अनियमितता की पूरी और निष्पक्ष जांच होना बहुत जरूरी है।