उत्तराखंड के टूरिज्म प्रोजेक्ट के लिए बोली लगाने वाली सभी तीन कंपनियों में रामदेव के सहयोगी बालकृष्ण की हिस्सेदारी, जानिए क्या है यह पूरा मामला

उत्तराखंड के टूरिज्म प्रोजेक्ट के लिए जिन तीन कंपनियों ने बोली लगाई थीं, उनमें प्रकृति ऑर्गेनिक्स इंडिया और भारुवा एग्री साइंस में बालकृष्ण की 99 फीसदी से ज्यादा हिस्सेदारी है। तीसरी कंपनी राजस एयरोस्पोर्ट्स में प्रोजेक्ट के लिए बोली लगाने के वक्त बालकृष्ण की हिस्सेदारी 25.01 फीसदी थी। लेकिन, बाद में यह बढ़कर 69.43 फीसदी तक पहुंच गई

अपडेटेड Sep 12, 2025 पर 10:20 PM
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बालकृष्ण को रामदेव का काफी करीबी माना जाता है। वह पतंजलि आयुर्वेद के को-फाउंडर और मैनेजिंग डायरेक्टर हैं।

उत्तराखंड सरकार के टूरिज्म बोर्ड ने दिसंबर 2022 में टेंडर इश्यू किया था। इसे मसूरी के नजदीक जॉर्ज एवरेस्ट एस्टेट में एडवेंचर टूरिज्म शुरू करन के लिए लॉन्च किया था। इस टेंडर के लिए तीन कंपनियों ने बोली लगाई थीं। इन तीनों कंपनियों के शेयरहोल्डर में एक नाम शामिल था। वह था आचार्य बालकृष्ण का जो बाबा रामदेव के सहयोगी हैं। इंडियन एक्सप्रेस ने यह खुलासा किया है। बालकृष्ण को रामदेव का काफी करीबी माना जाता है। वह पतंजलि आयुर्वेद के को-फाउंडर और मैनेजिंग डायरेक्टर हैं।

यह प्रोजेक्ट मसूरी के नजदीक 142 एकड़ में फैला है

पंतजलि आयुर्वेद एक एफएमसीजी कंपनी है, जिसकी वैल्यूएशन 6,199 करोड़ रुपये है। इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, मसूरी के नजदीक यह एडवेंचर प्रोजेक्ट 142 एकड़ में फैला है। इसमें पार्किंग, हैलीपैड, लकड़ी के पांच हट्स, एक कैफे और दो म्यूजियम हैं। इस प्रोजेक्ट को चलाने का कॉन्ट्रैक्ट करने वाली कंपनी को उत्तराखंड सरकार को सालाना 1 करोड़ रुपये की फीस चुकानी थी। बताया जाता है कि इस प्रोजेक्ट का इंफ्रास्ट्रक्चर पहले से बना था। कंपनी को सिर्फ इसे ऑपरेट करना था।


बोली लगाने वाली तीनों कंपनियों में बालकृष्ण की हिस्सेदारी

जिन तीन कंपनियों ने इस प्रोजेक्ट के लिए बोली लगाई थीं, उनमें प्रकृति ऑर्गेनिक्स इंडिया और भारुवा एग्री साइंस में बालकृष्ण की 99 फीसदी से ज्यादा हिस्सेदारी है। तीसरी कंपनी राजस एयरोस्पोर्ट्स में प्रोजेक्ट के लिए बोली लगाने के वक्त बालकृष्ण की हिस्सेदारी 25.01 फीसदी थी। लेकिन, बाद में यह बढ़कर 69.43 फीसदी तक पहुंच गई। इस कंपनी को प्रोजेक्ट का टेंडर मिलने के कई महीनों के दौरान उनकी कंपनी में यह हिस्सेदारी बढ़ी।

बोली लगाने वाली कंपनियों के बीच सांठगांठ की मनाही थी

प्रकृति ऑर्गेनिक्स और भारुवा एग्रो ने अक्टूबर 2023 में राज एयरोस्पोर्ट्स में 17.43 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी। इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, अलग से बालकृष्ण की चार कंपनियों-भारुवा एग्रो, भारुवा सॉल्यूशंस, फिट इंडिया ऑर्गेनिक और पतंजलि रिवोल्यूशन ने राजन एयरोस्पोर्ट्स में 33.25 फीसदी हिस्सेदारी खरीदा। इस टेंडर में एक शर्त थी, जिस पर बोली लगाने वाली कंपनियों ने हस्ताक्षकर किए थे। इसमें यह कहा गया था कि इस टेंडर के लिए बोली लगाने के लिए कंपनियों ने आपस में सांठगांठ नहीं की है।

उत्तराखंड के अधिकारियों ने निविदा प्रक्रिया को पारदर्शी बताया

टेंडर की शर्तों में यह भी गया था कि अगर उत्तराखंड टूरिज्म डेवलपमेंट बोर्ड को पता चलता है कि ऑपरेटर ने प्रोजेक्ट को हासिल करने के लिए किसी तरह के गलत तरीके का इस्तेमाल किया है तो कॉन्ट्रैक्ट रद्द हो सकता है। उत्तराखंड टूरिज्म के अधिकारियों का कहना है कि टेंडर की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी थी और यह टेंडर सभी के लिए ओपन था। टूरिज्म डिपार्टमेंट के एडवेंटर टूरिज्म विंग के डिप्टी डायरेक्टर अमित लोहानी ने कहा कि यह टेंडर ओपन था और कोई कंपनी इसके लिए बोली लगा सकती थी। उन्होंने यह भी कहा कि किसी एक व्यक्ति की शेयरहोल्डिंग दूसरी कंपनी में होना असामान्य बात नहीं है।

कंपनी ने भी मिलीभगत के आरोपों को खारिज किया

उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रोजेक्ट से राज्य को दो सालों में जीएसटी से 5 करोड़ रुपये से ज्यादा मिले हैं। उत्तराखंड टूरिज्म डेवलपमेंट बोर्ड के एडिशनल सीईओ कर्नल अश्विनी पुंडीर ने टेंडर के वक्त कहा था कि यह कंपनियों के बीच मिलीभगत नहीं है क्योंकि ये कंपनियां इंडिपेंडेंट एंटिटीज हैं। हम किसी कंपनी के पीछे नहीं पड़ते हैं और उनकी बैकग्राउंड चेक नहीं करते है। जिस कंपनी की बोली सबसे ज्यादा होती है, उसे प्रोजेक्ट दे दिया जाता है। इसका मतलब यह है कि कंपनी वैलिड और लीगल है। कंपनी के प्रवक्ता ने भी किसी तरह की मिलीभगत के आरोपों से इनकार किया। उन्होंने कहा कि कंपनी ने अलग-अलग इनवेस्टर्स से पैसे जुटाए हैं। अगर किसी शेयहोल्डर की पैसिव हिस्सेदारी है तो उसे मिलीभगत कहना गलत है।

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