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RBI Policy : RBI रुपये को स्थिर करने के लिए कई उपायों पर कर रहा विचार, ब्याज दरों में भी हो सकती है बढ़ोतरी

RBI Policy : सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​सहित RBI के शीर्ष अधिकारियों इस हफ्ते रुपये के गिरकर डॉलर के मुकाबले लगभग 97 के नए निचले स्तर पर पहुंचने के बाद,आगे उठाए जा सकने वाले संभावित कदमों पर चर्चा करने के लिए कई बैठकें की हैं। सूत्रों का कहना है कि उपलब्ध विकल्पों में से एक विकल्प ब्याज दरें बढ़ाना भी है

Edited By: Sudhanshu Dubeyअपडेटेड May 21, 2026 पर 1:01 PM
RBI Policy : RBI रुपये को स्थिर करने के लिए कई उपायों पर कर रहा विचार, ब्याज दरों में भी हो सकती है बढ़ोतरी
RBI Policy : RBI की छह-सदस्यीय MPC की बैठक 3-5 जून को होनी है। MPC ने इस साल अपनी बेंचमार्क दर को 5.25% पर बरकरार रखा है,हालांकि ज़्यादातर अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि आने वाले महीनों में महंगाई बढ़ने के साथ ही इस दर में बढ़ोतरी की जाएगी

RBI Policy : भारतीय रिज़र्व बैंक रुपये को स्थिर करने के लिए अपने सभी उपलब्ध विकल्पों पर विचार कर रहा है,जिनमें ब्याज दरों में बढ़ोतरी,अधिक करेंसी स्वैप और विदेशों में निवेशकों से डॉलर जुटाना शामिल है। सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​सहित RBI के शीर्ष अधिकारियों इस हफ्ते रुपये के गिरकर डॉलर के मुकाबले लगभग 97 के नए निचले स्तर पर पहुंचने के बाद,आगे उठाए जा सकने वाले संभावित कदमों पर चर्चा करने के लिए कई बैठकें की हैं।

सूत्रों का कहना है कि उपलब्ध विकल्पों में से एक विकल्प ब्याज दरें बढ़ाना भी है। मौद्रिक नीति पर अगला फैसला 5 जून को होना है,हालांकि RBI ने इससे पहले मई 2022 में भी तय समय से अलग हटकर (out-of-cycle) बदलाव किया था।

इसके अलावा दूसरे विकल्पो में अनिवासी भारतीयों के लिए एक डिपॉजिट योजना के ज़रिए विदेशों से डॉलर जुटाना और सॉवरेन डॉलर बॉन्ड बेचना शामिल है। इन दूसरे उपायों पर फैसला सरकार करेगी।

अभी जिन उपायों पर विचार किया जा रहा है वे कुछ हद तक 2013 के'टेपर टैंट्रम'(taper tantrum) दौर में उठाए गए कदमों जैसे ही हैं। उस समय भारत ने विदेशी मुद्रा के निवेश को बढ़ाने के लिए स्थानीय बैंकों के ज़रिए अनिवासी भारतीयों के लिए एक जमा योजना शुरू की थी। एक सूत्र मुताबिक RBI का अनुमान है कि इस बार ये जमा योजनाएं लगभग 50 अरब डॉलर तक की राशि जुटा सकती हैं,जबकि पिछली बार यह आंकड़ा लगभग 30 अरब डॉलर रहा था।

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