RBI MPC meet June 2026 : भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) शुक्रवार, 5 जून को अपनी जून की मौद्रिक नीति बैठक के नतीजों का ऐलान करने वाला है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और कमजोर होते रुपये के बीच,बाज़ार ब्याज दरों,महंगाई और आर्थिक विकास से जुड़े संकेतों पर बारीकी से नजर रखे हुए हैं। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता वाली छह-सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने 3 जून को अपनी तीन-दिवसीय बैठक शुरू की और 5 जून को सुबह 10 बजे अपने फैसलों की घोषणा करेगी।
RBI MPC बैठक: तारीख और समय
RBI की हर दो महीने में होने वाली MPC बैठक 3 जून से 5 जून, 2026 तक होनी है। इस बैठक में लिए गए फैसलों का ऐलान शुक्रवार,5 जून को सुबह 10 बजे किया जाएगा। इसके बाद दोपहर 12 बजे गवर्नर संजय मल्होत्रा की प्रेस कॉन्फ्रेंस होगी।
अप्रैल में अपनी पिछली पॉलिसी मीट में,MPC ने सर्वसम्मति से रेपो रेट को 5.25% पर बरकरार रखने का फैसला लिया था। साथ ही इसने अपने तटस्थ पॉलिसी रुख को बनाए रखा था। स्टैंडिंग डिपॉज़िट फ़ैसिलिटी (SDF) रेट और मार्जिनल स्टैंडिंग फ़ैसिलिटी (MSF) रेट को भी 5% और 5.5% पर बनाए रखा गया था।
RBI की नीति ऐलान लाइव कहां देखें?
पॉलिसी पर RBI गवर्नर का बयान सुबह 10 बजे से RBI के आधिकारिक YouTube चैनल पर लाइव स्ट्रीम किया जाएगा। इसके बाद दोपहर में होने वाली मीडिया ब्रीफिंग भी इसी प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगी और सभी प्रमुख बिज़नेस न्यूज़ नेटवर्क द्वारा कवर की जाएगी।
पिछली MPC बैठक में क्या हुआ?
अप्रैल की पॉलिसी मीट में आरबीआई ने वित्त वर्ष 2027 में भारत की GDP ग्रोथ 6.9 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया था। जबकि वित्त वर्ष 2026 के लिए यह अनुमान 7.6 प्रतिशत था। RBI ने वित्त वर्ष 2027 के अपने रिटेल महंगाई अनुमान को भी पहले के 4.2 प्रतिशत से बढ़ाकर 4.6 प्रतिशत कर दिया है।
बाज़ार को क्या है उम्मीद?
जून की पॉलिसी मीट पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच हो रही है। इस संकट के चलते ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है और भारतीय रुपये पर दबाव बढ़ा है। इस साल की शुरुआत में इस लड़ाई के छिड़ने के बाद से रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया है,जबकि एनर्जि की बढ़ती कीमतों ने दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी तेल-आयात करने वाली अर्थव्यवस्था में महंगाई को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं।
इस बीच,16 अर्थशास्त्रियों,फिक्स्ड-इनकम हेड्स और ट्रेजरी हेड्स के बीच कराए गए मनीकंट्रोल के पोल में यह सामने आया है कि बढ़ती महंगाई के जोखिमों, कमज़ोर होते रुपये और ब्रेंट क्रूड ऑयल की ऊंची कीमतों के बावजूद भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) इस हफ़्ते होने वाली मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी (MPC) की बैठक में बेंचमार्क ब्याज दरों को जैसे का तैसा रख सकता है।
ICRA की चीफ इकोनॉमिस्ट अदिति नायर का कहना है कि जून में रिटेल महंगाई बढ़कर 5 प्रतिशत तक पहुंच सकती है,क्योंकि ईंधन की बढ़ती कीमतों का असर धीरे-धीरे उपभोक्ताओं तक पहुंच रहा है। वहीं,कई अर्थशास्त्रियों का मानना है कि RBI कोई भी नीतिगत कदम उठाने से पहले इस बात पर और स्पष्टता आने का इंतज़ार कर सकता है कि महंगाई का यह असर अस्थायी है या लंबे समय तक बना रहने वाला है।
यह MPC बैठक क्यों है महत्वपूर्ण ?
जून की पॉलिसी मीट पर निवेशकों,बैंकों और कारोबारियों की बारीकी से नज़र बनी हुई है,क्योंकि इससे RBI के महंगाई,ग्रोथ और महंगाई के आकलन पर नई दिशा मिल सकती है। हालांकि अब तक महंगाई की दर काफ़ी हद तक काबू में रही है,जिससे सेंट्रल बैंक को अपनी मौजूदा पॉलिसी को बनाए रखने में मदद मिली है,लेकिन कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और रुपये की कमज़ोरी से पड़ रहे लगातार दबाव का असर आने वाले महीनों में RBI के नज़रिए पर पड़ सकता है। बाज़ार के जानकार,ब्याज़ दरों पर आगे के रुख़ और नए आर्थिक जोखिमों पर सेंट्रल बैंक की प्रतिक्रिया से जुड़े किसी भी संकेत पर नजरें बनाए हुए हैं।