करोड़ों का घर खरीदने में बचत होती है या किराए के घर में रहने से? भारत में कई लोगों को लगता है कि किराए पर रहने से पैसे बर्बाद होते हैं और अपना घर खरीदने से बचत होती है। इसलिए परिवार नौकरी लगते ही घर खरीदने की सलाह देने लगते हैं। लेकिन क्या घर खरीदना हमेशा सही फैसला होता है? बेंगलुरु के एक युवक ने अपना एक्सपीरियंस शेयर कर इस सवाल पर चर्चा शुरू की है।
युवक ने बताया कि दो साल पहले वह 29 साल का था और बेंगलुरु में नौकरी करता था। वह हर महीने 38 हजार रुपये किराया देता था। उसके माता-पिता चाहते थे कि वह अपना घर खरीद ले। इसके बाद उसने घर देखना शुरू किया और उसे 1.2 करोड़ रुपये का 2BHK फ्लैट पसंद आया। लेकिन लोन का हिसाब लगाने पर उसे लगा कि घर खरीदना काफी महंगा पड़ेगा।
₹90 लाख के लोन पर कितनी EMI?
युवक के हिसाब से, अगर वह 90 लाख रुपये का होम लोन लेता, तो उसे हर महीने करीब 78 हजार रुपये EMI देनी पड़ती। 20 साल में वह लगभग 1 करोड़ रुपये ब्याज भी चुकाता।
वहीं, किराए पर रहने का उसका खर्च हर महीने 38 हजार रुपये था। यानी EMI और किराए के बीच करीब 40 हजार रुपये का अंतर था।
घर खरीदें या किराए पर रहें?
यह निष्कर्ष reddit पर शेयर की गई एक युवक की पोस्ट और उस पर हुई चर्चा के आधार पर निकाला गया है।
युवक के मुताबिक, घर खरीदने और किराए पर रहने, दोनों के अपने फायदे हैं। अपना घर खरीदने से लंबे समय में संपत्ति बन सकती है और बार-बार घर बदलने की परेशानी भी नहीं रहती। वहीं, किराए पर रहने से जरूरत पड़ने पर नौकरी या दूसरी वजह से शहर बदलना आसान होता है। हालांकि, किराए के घर में रहने पर समय के साथ किराया भी बढ़ता है।
घर खरीदने से पहले सिर्फ EMI नहीं, बल्कि घर की मरम्मत, सोसायटी का खर्च और लोन पर लगने वाले ब्याज को भी समझना जरूरी है। दूसरी ओर, किराए पर रहने से बचने वाले पैसों को बचत या निवेश में लगाया जा सकता है, हालांकि इससे मिलने वाला मुनाफा तय नहीं होता। इसलिए सिर्फ यह सोचकर घर खरीदने की जल्दी नहीं करनी चाहिए कि किराया देना पैसे बर्बाद करना है। फैसला अपनी कमाई, बचत, भविष्य की योजनाओं और घर की कीमत को देखकर लेना चाहिए।
घर खरीदने से पहले इन बातों पर दें ध्यान
• महीने का खर्च: EMI के अलावा घर की मरम्मत और सोसायटी का खर्च भी हो सकता है।
• ब्याज: होम लोन लेने पर मूल रकम के साथ ब्याज भी चुकाना पड़ता है।
• बचत: किराए पर रहने से बचने वाले पैसे को निवेश किया जा सकता है, लेकिन उससे होने वाला मुनाफा तय नहीं होता।
• भविष्य की जरूरतें: नौकरी, शहर बदलने और परिवार की जरूरतों को ध्यान में रखकर फैसला लेना चाहिए।
ध्यान दें: EMI और ब्याज की रकम लोन की ब्याज दर और अवधि पर निर्भर करती है।