क्रिटिकल थिंकिंग का विकल्प नहीं है AI, जॉब्स और स्किल्स को लेकर अप्रोच पर फिर से सोचने की जरूरत: विशाल सिक्का

Rising Bharat Summit 2026: सिक्का ने आर्ट्स, ह्यूमैनिटीज और मानव केंद्रित प्रोफेशन्स की बढ़ती जरूरत पर जोर दिया। जोर देकर कहा कि AI के दौर में इंजीनियरिंग के फील्ड और भी जरूरी होते जा रहे हैं। यह भी कहा कि मैथ्स की मदद वाले AI और कंप्यूटिंग का भविष्य बहुत अच्छा है

अपडेटेड Feb 28, 2026 पर 2:04 PM
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जैसे-जैसे AI इंडस्ट्रीज को नया आकार दे रहा है, रोजगार की पारंपरिक समझ तेजी से पुरानी होती जा रही है।

राइजिंग भारत समिट 2026 के दूसरे दिन आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस (AI) और काम करने के तरीकों में तेजी से आ रहे बदलाव पर फोकस रहा। वियानाई सिस्टम्स के फाउंडर और इंफोसिस के पूर्व CEO विशाल सिक्का ने कहा कि भारत को जॉब्स और स्किल्स को लेकर अपनी अप्रोच पर फिर से सोचना चाहिए। ऐसा जल्द से जल्द करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे AI इंडस्ट्रीज को नया आकार दे रहा है, रोजगार की पारंपरिक समझ तेजी से पुरानी होती जा रही है।

सिक्का ने कहा कि जॉब्स और स्किल्स को लेकर अप्रोच पर जल्द से जल्द फिर से सोचने की जरूरत है। ऑटोमेशन तेजी से बढ़ रहा है और नए रोल्स सामने आ रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि AI के दौर में इंजीनियरिंग के फील्ड और भी जरूरी होते जा रहे हैं। सिविल इंजीनियरिंग, मैकेनिकल सिस्टम्स, एनर्जी, पावर और एनवायरनमेंटल इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े फील्ड्स की अहमियत बढ़ रही है।

नर्सिंग और पर्सनल केयर जैसे मानव केंद्रित प्रोफेशन्स की बढ़ेगी जरूरत


सिक्का ने आर्ट्स, ह्यूमैनिटीज और मानव केंद्रित प्रोफेशन्स की बढ़ती जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि नर्सिंग और पर्सनल केयर जैसे रोल्स ऐसे समाज में जरूरी हो जाएंगे, जहां टेक्नोलॉजी बार-बार होने वाली प्रोसेस को संभालती है लेकिन इंसानी हमदर्दी और फैसले की जगह कोई नहीं ले सकता।

उन्होंने मैथ्स से चलने वाले AI और एडवांस्ड कंप्यूटिंग की बड़ी संभावनाओं पर भी जोर दिया। कहा कि मैथ्स की मदद वाले AI और कंप्यूटिंग का भविष्य बहुत अच्छा है। यह भी बताया कि जिन चीजों में कल्पना और क्रिएटिविटी की जरूरत होती है, उन्हें उन कामों से अलग करना जरूरी है जो हमने किए हैं।

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कोई शक नहीं कि AI से नौकरियां जाएंगी

विशाल सिक्का ने यह भी कहा कि AI क्रिटिकल थिंकिंग का विकल्प नहीं है। हम अपनी सोच को आउटसोर्स नहीं कर सकते। यह भी कहा कि एक समाज के तौर पर मैं AI को लेकर चिंतित हूं। इसमें कोई शक नहीं कि इससे नौकरियां जाएंगी। उन्होंने कहा कि भारत के लिए चुनौती यह है कि वह अपने कर्मचारियों को इस नई सच्चाई में आगे बढ़ने के लिए जरूरी स्किल्स से लैस करे। न कि ऐसा हो कि वे इसके कारण पीछे छूट जाएं या अपनी जगह खो दें।

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