Su-57 या F-35...इंडियन एयर फोर्स के कौन बनेगा गेमचेंजर? 5th जेनरेशन जेट के लिए इधर कदम बढ़ा रहा भारत

भारत का स्वदेशी एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) प्रोग्राम अब तेजी पकड़ रहा है, लेकिन इसका प्रोडक्शन शुरू होने में करीब 7 से 8 साल लग सकते हैं। ऐसे में वायु सेना की घटती स्क्वाड्रन संख्या को संभालने के लिए डसॉल्ट राफेल और HAL तेजस Mk1A जैसे विमानों को शामिल किया जा रहा है

अपडेटेड Feb 24, 2026 पर 6:52 PM
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रिपोर्ट्स की मानें तो भारत का झुकाव रूस की Su-57 की तरफ ज्‍यादा है।

ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय वायुसेना के हाथों पिटने के बाद पाकिस्‍तान ने चीन से पांचवीं पीढ़ी का विमान खरीदने की योजना बनाई है। आने वाले 4 से 5 साल में पाकिस्‍तान को 5th जेनरेशन फाइटर जेट की खेप मिलने की उम्‍मीद जताई जा रही है। ऐसे में भारतीय वायु सेना भी 5th जेनरेशन फाइटर जेट को अपने बेड़े में शामिल करने के लिए तेजी से कदम  बढ़ा रहा है। भारत के लिए, 5th जेनरेशन फाइटर जेट अब सिर्फ योजना नहीं, बल्कि ऑपरेशनल जरूरत बनती जा रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिलहाल चर्चा के केंद्र में रूस का सुखोई Su-57 फाइटर जेट है।

Su-57 की तरफ बढ़ रहा है भारत

रिपोर्ट्स की मानें तो भारत का झुकाव रूस की Su-57 की तरफ ज्‍यादा है। इस पर विचार करने की मुख्य वजह इसकी लागत और भारत का सुखोई Su-30MKI बेड़े को लंबे समय से चलाने का अनुभव है। भारतीय वायु सेना पहले से ही रूसी तकनीक के साथ काम करती रही है, इसलिए अधिकारियों का मानना है कि अगर भारत रूसी प्लेटफॉर्म चुनता है, तो नई तकनीक को अपनाने और उसे मौजूदा सिस्टम में शामिल करने की प्रक्रियाआसान हो सकती है। सरल शब्दों में कहें तो, IAF अपनी भविष्य की जरूरतों को देखते हुए मॉर्डन स्टील्थ फाइटर जेट शामिल करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है।


इस मामले की जानकारी रखने वाले एक वरिष्ठ रक्षा अधिकारी ने न्यूज 18 को बताया, “हमारे पास बहुत ज्यादा विकल्प नहीं हैं और हमने अपने मापदंड तय कर रखे हैं। जो देश या प्लेटफॉर्म हमें ज्यादा रणनीतिक फायदा देगा, हम उसी के पक्ष में फैसला करेंगे।” उन्होंने यह भी साफ किया कि अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। इस तेजी की वजह क्षेत्र में बदलती स्थिति है। खबरें हैं कि चीन ने 6th जेनरेशन फाइटर जेट की टेस्टिंग शुरू कर दी है और पाकिस्तान को पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट देने की तैयारी कर रहा है।

AMCA के आने में अभी के काफी वक्त

भारत का स्वदेशी एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) प्रोग्राम अब तेजी पकड़ रहा है, लेकिन इसका प्रोडक्शन शुरू होने में करीब 7 से 8 साल लग सकते हैं। ऐसे में वायु सेना की घटती स्क्वाड्रन संख्या को संभालने के लिए डसॉल्ट राफेल और HAL तेजस Mk1A जैसे विमानों को शामिल किया जा रहा है, जिससे कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। इसी बीच अमेरिका में बना लॉकहीड मार्टिन F-35 लाइटनिंग II भी विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि इसकी खरीद लागत काफी ज्यादा है और भारतीय हथियारों को इसमें जोड़ने पर कुछ पाबंदियां लग सकती हैं, जिसको लेकर चिंता जताई जा रही है।

दूसरी ओर, रूस ने Su-57 के एक्सपोर्ट वर्जन के लिए एक पूरा पैकेज पेश किया है। इसमें आधुनिक हथियार, भारत में लाइसेंस के तहत उत्पादन और “बिना किसी रोक” के टेक्नॉलिजी ट्रांसफर का प्रस्ताव शामिल है। रूस का दावा है कि यह विमान पांचवीं पीढ़ी के मानकों पर खरा उतरता है। इसमें कंपोजिट मटेरियल का ज्यादा इस्तेमाल, रडार से बचाने वाली खास कोटिंग और हथियारों को अंदर रखने की सुविधा (इंटरनल वेपन बे) जैसी खूबियां दी गई हैं, जो इसकी स्टेल्थ क्षमता को बढ़ाती हैं।

राफेल को मिल चुकी है मंजूरी

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल ने भारतीय वायु सेना के लिए 114 और राफेल लड़ाकू विमान खरीदने की मंजूरी दे दी है। फिलहाल इन विमानों की कीमत को लेकर बातचीत चल रही है। साथ ही यह भी तय किया जा रहा है कि इन राफेल जेट में भारतीय हथियारों को जोड़ने की पूरी सुविधा मिल सके। माना जा रहा है कि इस पूरी जांच और मूल्यांकन प्रक्रिया में कुछ महीने लग सकते हैं और अगले वित्तीय वर्ष तक डील हो सकता है। यह फैसला आने वाले समय में वायु सेना की ताकत और रणनीतिक क्षमता को काफी मजबूत कर सकता है। इससे पहले रूस भी कह चुका है कि वह भारत की भविष्य की फाइटर जेट जरूरतों को पूरा करने के लिए तैयार है।

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