क्या है 84 हजार करोड़ का भारत का समुद्र मंथन मिशन जिसे आज मिल सकती है मंजूरी? 5 पॉइंट में समझिए किस खजाने की होगी खोज

जानकारी के मुताबिक प्रस्तावित समुद्र मंथन योजना के पहले चरण में करीब 84000 करोड़ रुपये का आउटले शामिल है। इस भारी-भरकम बजट के जरिए देश में ऑफशोर एक्सप्लोरेशन को स्पीडअप किया जाएगा। अगर कैबिनेट से इसे मंजूरी मिल जाती है तो यह हाल के वर्षों में भारत के अपस्ट्रीम ऑयल एंड गैस सेक्टर के लिए सरकार का सबसे बड़ी पॉलिसी सपोर्ट इनिशिएटिव्स में से एक होगा

अपडेटेड Jul 31, 2026 पर 12:03 PM
केंद्र सरकार देश को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए एक बेहद महत्वाकांक्षी और ऐतिहासिक कदम उठाने जा रही है।

Samudra Manthan Mission Deep Sea Exploration Scheme: केंद्र सरकार देश को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए एक बेहद महत्वाकांक्षी और ऐतिहासिक कदम उठाने जा रही है। केंद्रीय कैबिनेट शुक्रवार 31 जुलाई को सरकार के महत्वाकांक्षी समुद्र मंथन कार्यक्रम के पहले चरण को मंजूरी देने के प्रस्ताव पर विचार कर सकती है। हमारे सहयोगी न्यूज चैनल सीएनबीसी-टीवी18 ने सूत्रों के हवाले से ये जानकारी दी है। रिपोर्ट के मुताबिक इस योजना का मुख्य उद्देश्य गहरे समुद्र में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की खोज को तेज करना और भारत के ऊर्जा क्षेत्र को एक नई दिशा देना है।

आइए 5 पॉइंट में समझते हैं कि करीब 84000 करोड़ रुपये का यह समुद्र मंथन मिशन क्या है, इसका उद्देश्य क्या है और इसके जरिए किस समुद्री खजाने की तलाश की जाएगी।

  • 1- 84000 करोड़ रुपये का बजट और पहला चरण

सीएनबीसी-टीवी18 को सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक प्रस्तावित समुद्र मंथन योजना के पहले चरण में करीब 84000 करोड़ रुपये का आउटले शामिल है। इस भारी-भरकम बजट के जरिए देश में ऑफशोर एक्सप्लोरेशन को स्पीडअप किया जाएगा। अगर कैबिनेट से इसे मंजूरी मिल जाती है तो यह हाल के वर्षों में भारत के अपस्ट्रीम ऑयल एंड गैस सेक्टर के लिए सरकार का सबसे बड़ी पॉलिसी सपोर्ट इनिशिएटिव्स में से एक होगा।

  • 2- किस खजाने की होगी खोज?


इस मिशन का मुख्य लक्ष्य समुद्र की गहराइयों में छिपे कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के विशाल भंडारों की खोज करना है। यह योजना भारत के गहरे समुद्री तलछटी बेसिनों में एक्सप्लोरेशन को पुश करेगी। इसके जरिए देश में हाइड्रोकार्बन का घरेलू उत्पादन बढ़ाया जाएगा ताकि विदेशी कच्चे तेल और गैस के आयात पर भारत की निर्भरता को कम किया जा सके।

  • 3- हाई-रिस्क वाले डीप-वाटर प्रोजेक्ट्स को मिलेगी पॉलिसी सपोर्ट

गहरे समुद्र और बेहद गहरे समुद्र के इलाकों में तेल-गैस की खोज करना न सिर्फ तकनीक के लिहाज से काफी जटिल है बल्कि इसमें वित्तीय और भूगर्भीय जोखिम भी बहुत अधिक होता है। इन क्षेत्रों में एक्सप्लोरेशन की लागत काफी अधिक आती है। समुद्र मंथन योजना का एक बड़ा उद्देश्य इन हाई रिस्क वाली खोज गतिविधियों को मजबूत पॉलिसी सपोर्ट देना है ताकि कंपनियों को गहरे पानी में उतरने का प्रोत्साहन मिल सके।

  • 4- पीएम मोदी के राष्ट्रीय डीप वाटर एक्सप्लोरेशन मिशन का हिस्सा

सीएनबीसी-टीवी18 की रिपोर्ट के मुताबिक इस कदम की नींव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 15 अगस्त 2025 को अपने स्वतंत्रता दिवस के भाषण के दौरान रखी गई थी। पीएम मोदी ने ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में देश के प्रयासों के तहत समुद्र मंथन नाम से राष्ट्रीय डीप वाटर एक्सप्लोरेशन मिशन शुरू करने की घोषणा की थी। उन्होंने कहा था कि समुद्र के नीचे तेल और गैस भंडारों की खोज के लिए इसे मिशन मोड में शुरू किया जाएगा।

  • 5- कैबिनेट बैठक के बाद आधिकारिक ऐलान संभव

अपस्ट्रीम एनर्जी सेक्टर में निवेश और रिसर्च को बढ़ावा देने वाले इस मेगा प्लान पर आज केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में मुहर लग सकती है। सूत्रों का कहना है कि कैबिनेट की बैठक पूरी होने के बाद सरकार की ओर से इस 84000 करोड़ रुपये के समुद्र मंथन मिशन का औपचारिक और आधिकारिक ऐलान किए जाने की पूरी संभावना है।

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