टाटा संस के चेयरमैन एन.चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति से टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस के बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स के बीच मतभेद पैदा हो गए हैं। इसी पृष्ठभूमि में नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (शरद चंद्र पवार) के प्रेसिडेंट शरद पवार ने सोशल मीडिया मीडियम X पर एक पोस्ट किया है। इस पोस्ट में टाटा ग्रुप के संगठनात्मक ढ़ाचे पर टिप्पणी करते हुए शरद पवार ने कहा कि टाटा ग्रुप की परंपरा और टाटा ट्रस्ट्स के सामाजिक प्रतिबद्धता को बचाकर रखना चाहिए।
शरद पवार ने 22 सितंबर को टाटा संस और टाटा ट्रस्ट्स के बीच चल रहे विवाद पर अपनी राय रखते हुए नोएल टाटा के रुख का समर्थन किया और महाराष्ट्र व भारत के विकास में टाटा ग्रुप की भूमिका की तारीफ की। उन्होंने जमशेदजी टाटा के विचारों का जिक्र करते हुए कहा कि टाटा परिवार ने इंडस्ट्री को समाज सेवा की दिशा दी है। उन्होंने लिखा कि इस सोच का मूल यह है कि इंडस्ट्री से पैदा हुई संपत्ति का इस्तेमाल समाज के हित के लिए किया जाना चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि टाटा संस में टाटा ट्रस्ट्स की लगभग 66 फीसदी हिस्सेदारी एक सोचा-समझा स्ट्रक्चर है। इस ओनरशिप स्ट्रक्चर की वजह से ही टाटा ग्रुप के बिज़नेस से मिलने वाले डिविडेंड का इस्तेमाल हेल्थ,एजुकेशन,रिसर्च और ग्रामीण इलाकों की रोज़ी-रोटी जैसे सामाजिक कल्याण के कामों के लिए किया जाता है।
टाटा ग्रुप की विरासत को बचाकर रखना आज की जरूरत
शरद पवार ने अपने एक्स पोस्ट में कहा है कि टाटा ग्रुप की लीडरशिप के बारे में फैसले लेते समय इंस्टीट्यूशनल प्रोसेस और टाटा ट्रस्ट की भूमिका का सम्मान किया जाना चाहिए। टाटा ग्रुप का देश और खासकर महाराष्ट्र के विकास से पुराना नाता रहा है। इसलिए, टाटा ग्रुप के अंदर के झगड़ों को बातचीत और सही कानूनी प्रक्रिया से सुलझाने की जरूरत है। इसके लिए शेयरहोल्डर्स के हितों की रक्षा करते हुए कंपनी के बायलॉज में बताए गए प्रोसेस का सम्मान करना जरूरी है।
बताते चलें कि 17 सितंबर को टाटा संस के बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स ने एन.चंद्रशेखरन को फरवरी 2027 से अगले पांच साल के लिए एग्जीक्यूटिव चेयरमैन के तौर पर फिर से अपॉइंट करने का फैसला लिया था। यह फैसला 4 के मुकाबले 1 वोट से हुआ था। उसी मीटिंग में टाटा संस को स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट करने का भी फैसला किया गया।
टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने चंद्रशेखरन के दोबारा अपॉइंटमेंट का विरोध किया था। हालांकि,ट्रस्ट के दूसरे नॉमिनेटेड डायरेक्टर,वेणु श्रीनिवासन ने इस प्रस्ताव के पक्ष में वोट किया। टाटा ट्रस्ट्स ने इस फैसले की वैधता पर सवाल उठाया है और कहा है कि ट्रस्ट के नॉमिनेटेड डायरेक्टर्स की भूमिका पर कंपनी के आर्टिकल्स ऑफ़ एसोसिएशन के मुताबिक ठीक से विचार किया जाना चाहिए।
टाटा ग्रुप की विरासत को संजोना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी
शरद पवार ने यह भी कहा कि अगर टाटा ट्रस्ट्स की सामाजिक और संस्थागत भूमिका कमजोर होती है तो इसका असर हेल्थ,एजुकेशन और रिसर्च सेक्टर के अलग-अलग संस्थाओं पर पड़ सकता है। उन्होंने इस बात का ज़िक्र किया कि टाटा ट्रस्ट्स ने टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल,TIFR और TISS जैसी प्रतिष्ठित संथाओं के ज़रिए लंबे समय तक सामाजिक क्षेत्र में काम किया है। इसलिए,यह सबकी ज़िम्मेदारी है कि हम इस ग्रुप के संस्थागत स्वरूप और मूल्य आधारित परंपरा को बचाकर रखें,जिसने खुद को भारत के विकास के लिए समर्पित कर दिया है।