मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सेवानिवृत्त बैंक कर्मचारी और इस मामले के आरोपी सुभाष श्रीवास्तव दान की गिनती की पूरी प्रक्रिया की निगरानी करते थे। उनकी जिम्मेदारी थी कि दान पात्रों से निकाली गई नकदी सुरक्षित तरीके से गिनती वाले कमरे तक पहुंचे और फिर उसे एसबीआई को सौंपा जाए। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि मंदिर में चढ़ाए गए आभूषणों का कोई व्यवस्थित रिकॉर्ड नहीं रखा जाता था, जिससे उनकी चोरी की आशंका बढ़ जाती थी। रिपोर्ट के अनुसार, इस कथित गड़बड़ी का पता पहली बार फरवरी में चला। बताया गया कि गिनती करने वाली टीम के एक सदस्य ने सुभाष श्रीवास्तव को बताया था कि गिनती के दौरान पैसे चोरी किए जा रहे हैं। आरोप है कि इस पर श्रीवास्तव ने कहा, "भगवान सब देख रहे हैं, यह न तो आपके घर से जा रहा है और न ही मेरे घर से।" इस मामले में अब तक गिरफ्तार किए गए आठ आरोपियों में सुभाष श्रीवास्तव भी शामिल हैं।