समाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक अपनी भूख हड़ताल के 26वें दिन भी गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती हैं। इस बीच उन्होंने गुरुवार को अपने समर्थकों से शांति बनाए रखने और किसी भी तरह की हिंसा से दूर रहने की अपील की। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किए गए एक पोस्ट में वांगचुक ने लिखा, "शांति और केवल शांति ही मेरा रास्ता है।" उन्होंने कहा कि प्रदर्शन पूरी तरह अहिंसक होना चाहिए। जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वहां प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे हैं, लेकिन कुछ समाज-विरोधी तत्व दूसरी जगहों पर हिंसा भड़काकर इस आंदोलन का फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं।
सोनम वांगचुक ने की ये अपील
सोनम वांगचुक ने कहा, "जंतर-मंतर पर प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण हैं, लेकिन यह जानकर दुख हुआ कि कुछ समाज-विरोधी तत्व दूसरी जगहों पर इन आंदोलनों का फायदा उठाकर हिंसा फैलाने की कोशिश कर रहे हैं।" उन्होंने समर्थकों से संयम बनाए रखने की अपील करते हुए कहा, "सामने वाला चाहे जैसा भी व्यवहार करे, हमारी ओर से जवाब सिर्फ फूलों का होना चाहिए। हर हाल में शांति और अहिंसा का रास्ता अपनाएं।" वांगचुक की यह अपील ऐसे समय आई है, जब एक दिन पहले ही उन्होंने दोहराया था कि वह अपना भूख हड़ताल तभी खत्म करेंगे, जब सरकार यह भरोसा देगी कि प्रदर्शन में शामिल लोगों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी।
इस बीच, गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल ने बताया कि सफदरजंग अस्पताल से लाए जाने के बाद सोनम वांगचुक की हालत फिलहाल स्थिर है। अस्पताल की ओर से गुरुवार को जारी बयान में कहा गया कि डॉक्टरों की अलग-अलग विशेषज्ञताओं वाली टीम उनका इलाज कर रही है। अस्पताल के अनुसार, सोनम वांगचुक पूरी तरह होश में हैं और उनकी हालत स्थिर बनी हुई है। उनके सभी जरूरी स्वास्थ्य संकेत (वाइटल्स) सामान्य स्तर पर हैं और उनकी लगातार निगरानी की जा रही है।
25 दिन से जारी के भूख हड़ताल
अस्पताल ने यह भी साफ किया कि सोनम वांगचुक को दिया जा रहा हर इलाज उनकी सहमति से ही किया जा रहा है। बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी एक वीडियो संदेश में वांगचुक ने बताया कि उनका 25 दिन का अनशन पूरा हो चुका है। उन्होंने कहा कि इस दौरान उनका करीब 11 किलो वजन कम हो गया है और मांसपेशियां भी कमजोर हुई हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि उनकी हालत ठीक है। वांगचुक ने कहा, "मैं अभी भी जीवित हूं। 25 दिनों के अनशन में मेरा 11 किलो वजन कम हुआ है, लेकिन मैं ठीक हूं।" उन्होंने 20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के 'चलो संसद' मार्च का भी जिक्र किया और पुलिस कार्रवाई के बावजूद प्रदर्शनकारियों के शांतिपूर्ण रवैये की सराहना की। वांगचुक ने कहा, "मैं उन छात्रों की तारीफ करता हूं जिन्होंने लाठीचार्ज के बावजूद शांतिपूर्वक प्रदर्शन किया।" उन्होंने आगे कहा कि कुछ लोगों ने माहौल बिगाड़ने और पत्थरबाजी के लिए उकसाने की कोशिश की, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने संयम बनाए रखा। उन्होंने कहा, "आप सभी का धैर्य देखकर मेरा दिल भर आया।"
सोनम वांगचुक ने कहा कि कई केंद्रीय मंत्रियों और विपक्षी नेताओं ने उनसे भूख हड़ताल खत्म करने की अपील की है। उन्होंने बताया कि 65 सांसदों के हस्ताक्षर वाला एक पत्र भी उन्हें मिला, जिसमें उनसे अनशन समाप्त कर देश की सेवा के अपने काम पर लौटने का अनुरोध किया गया। वांगचुक ने कहा, "मैं भी अपने काम पर लौटना चाहता हूं, क्योंकि मेरा काम भी महत्वपूर्ण है।" हालांकि, उन्होंने साफ किया कि जब तक प्रदर्शनकारियों को सुरक्षा का भरोसा नहीं मिलता, तब तक वह अपना विरोध खत्म नहीं करेंगे। वांगचुक ने सरकार से अपील करते हुए कहा, "बच्चों के खिलाफ बल प्रयोग न किया जाए। मैं यह आश्वासन चाहता हूं कि प्रदर्शनकारियों पर कोई मामला या एफआईआर दर्ज नहीं होगी और उन्हें पुलिस या जेल की धमकी नहीं दी जाएगी। अगर सरकार जल्द यह भरोसा दे देती है, तो मैं आज ही अपनी भूख हड़ताल खत्म कर सकता हूं। लेकिन ऐसा आश्वासन नहीं मिलने पर मुझे अपना अनशन जारी रखना पड़ेगा।"