लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने मंगलवार को एक अहम फैसला लिया है। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने अपने खिलाफ विपक्ष द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर निर्णय होने तक सदन में नहीं आने का फैसला किया है। बताया जा रहा है कि जब तक उनके खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा और फैसला नहीं हो जाता, तब तक वे सदन की कार्यवाही में हिस्सा नहीं लेंगे। हालांकि नियमों के अनुसार ऐसा करना जरूरी नहीं है, फिर भी उन्होंने खुद सदन में न आने का निर्णय लिया है।
सूत्रों का कहना है कि अगर सरकार या विपक्ष उन्हें मनाने की कोशिश भी करे, तब भी वे अपने फैसले पर कायम रहेंगे। संभावना जताई जा रही है कि बजट सत्र के दूसरे चरण के पहले दिन, यानी 9 मार्च को, स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर चर्चा हो सकती है। यह मामला इन दिनों संसद में चल रहे राजनीतिक तनाव के बीच सामने आया है। संविधान के अनुच्छेद 96(1) के मुताबिक, जब किसी स्पीकर को हटाने का प्रस्ताव विचाराधीन होता है, तो वह सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता नहीं कर सकता, चाहे वह सदन में मौजूद ही क्यों न हो।
हालांकि, उन्हें यह अधिकार है कि वह उस प्रस्ताव पर चल रही चर्चा में भाग ले और अपनी बात रख सके, ताकि वह अपने ऊपर लगे आरोपों का जवाब दे सके। अब सभी की नजर 9 मार्च पर टिकी है, जब इस प्रस्ताव पर चर्चा होने की संभावना है। इससे यह तय होगा कि सदन की आगे की कार्यवाही किस दिशा में जाएगी।
118 सांसदों ने किया है साइन
बता दें कि, कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने बताया कि अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दोपहर 1 बजकर 14 मिनट पर लोकसभा में नियम 94C (रूल्स ऑफ प्रोसीजर एंड कंडक्ट ऑफ बिजनेस) के तहत आधिकारिक तौर पर दिया गया। कांग्रेस के अनुसार, इस नोटिस पर कुल 118 सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। इस प्रस्ताव को कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) समेत कई दलों का समर्थन मिला है। हालांकि, तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने अभी तक इस पर साइन नहीं किए हैं। नोटिस में विपक्षी सांसदों ने आरोप लगाया है कि स्पीकर उन्हें बार-बार सार्वजनिक महत्व के मुद्दे उठाने का मौका नहीं दे रहे हैं।