Stray Dogs Case: 'सुबह कौन सा कुत्ता किस मूड में होगा, यह कोई नहीं जानता...': सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा क्यों कहा?

Stray Dogs Case: सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सड़कों पर कुत्ते और आवारा जानवर नहीं होने चाहिए। कुत्तों के काटने की घटनाएं ही नहीं। बल्कि सड़कों पर आवारा जानवरों का घूमना भी खतरनाक साबित हो रहा है। दुर्घटनाओं का कारण बन रहा है। साथ ही अदालत ने कहा कि सुबह-सुबह कौन सा कुत्ता किस मूड में होगा, यह कोई नहीं जानता

अपडेटेड Jan 07, 2026 पर 6:33 PM
Story continues below Advertisement
Stray Dogs Case: सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सुबह-सुबह कौन सा कुत्ता किस मूड में होगा, यह कोई नहीं जानता

Stray Dogs Case: सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (7 जनवरी) को नगर निकायों की तरफ से नियमों और निर्देशों का अनुपालन न करने की ओर ध्यान दिलाया। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि देश में न केवल कुत्तों के काटने से बल्कि सड़कों पर आवारा जानवरों के कारण होने वाली दुर्घटनाओं से भी लोगों की मौत हो रही है। जस्टिस विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एन.वी. अंजारिया की पीठ कुत्ता प्रेमियों और और आदेशों का सख्ती से पालन करने की मांग करने वालों की तरफ से दायर सुप्रीम कोर्ट के पिछले आदेशों में बदलाव की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी।

पीठ ने कहा कि वे इस मामले की सुनवाई इसलिए कर रहे हैं। अदालत ने कहा कि कई वकीलों और पशु कार्यकर्ताओं ने दावा किया है कि 7 नवंबर के आदेश पारित होने से पहले उनकी बात नहीं सुनी गई थी। पीठ ने कहा, "सड़कों पर कुत्ते और आवारा जानवर नहीं होने चाहिए। कुत्तों के काटने की घटनाएं ही नहीं। बल्कि सड़कों पर आवारा जानवरों का घूमना भी खतरनाक साबित हो रहा है। दुर्घटनाओं का कारण बन रहा है। सुबह-सुबह कौन सा कुत्ता किस मूड में होगा, यह कोई नहीं जानता। नगर निकायों को नियमों, कार्य प्रणालियों और निर्देशों का सख्ती से पालन करना होगा।"

जस्टिस मेहता ने बताया कि पिछले 20 दिनों में राजस्थान हाई कोर्ट के दो जज दुर्घटनाओं का शिकार हुए हैं। उनमें से एक जज अब भी रीढ़ की हड्डी की चोटों से जूझ रहे हैं। उन्होंने मामले में पेश हुए वकीलों से कहा, "यह एक गंभीर मुद्दा है।"


कपिल सिब्बल की दलील

मामले में अदालत के पूर्व आदेश में संशोधन का अनुरोध करने वाले याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि समाधान सभी कुत्तों को पकड़ना नहीं है। बल्कि पशु-मानव संघर्ष को कम करने के लिए विश्व स्तर पर स्वीकृत वैज्ञानिक फार्मूला अपनाना है।

उन्होंने तर्क दिया कि अदालत आवारा कुत्तों की आबादी को मैनेज और कंट्रोल करने के लिए CSVR (पकड़ना, नसबंदी करना, वैक्सीनेशन करना और छोड़ना) के फार्मूले को अपना सकती है। इससे धीरे-धीरे कुत्ते के काटने की घटनाओं में कमी आएगी।

कोर्ट का जवाब

इस पर जस्टिस नाथ ने कहा, "इलाज से परहेज बेहतर है..." साथ ही बताया कि इस मामले में बहस करने के लिए कुछ खास नहीं है क्योंकि अदालत ने केवल संस्थागत क्षेत्रों से आवारा कुत्तों को हटाने का निर्देश दिया है। उसने किसी भी नियम में हस्तक्षेप नहीं किया है।

बेंच ने कहा कि वह इस मामले में राज्यों और नगर निकायों द्वारा नियमों, प्रोटोकॉल और स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOPs) को सख्ती से लागू करवाना चाहती है। शीर्ष अदालत ने कहा, "कुछ राज्यों ने हमारे आदेशों का पालन करने और तर्कों को लागू करने में कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। हम उन राज्यों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेंगे। सभी नियमों और मानक प्रक्रियाओं का पालन करना अनिवार्य है।"

'लोगों को कुत्ते काट रहे हैं'

जब विभिन्न पक्षों की ओर से पेश हुए कुछ वकीलों ने यह बताया कि कुत्तों के हमले हो रहे हैं। तो पीठ ने कहा कि वह समझती है कि बच्चों और वयस्कों को कुत्ते काट रहे हैं। उनकी जान जा रही है। शुरुआत में इस मामले में 'न्याय मित्र' के रूप में नियुक्त किए गए वरिष्ठ वकील गौरव अग्रवाल ने कहा कि नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने अदालत के आदेश को लागू करने के लिए एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) तैयार की है।

अग्रवाल ने कहा, "उन्होंने 1,400 किलोमीटर सड़क को संवेदनशील क्षेत्र के रूप में चिह्नित किया है। हालांकि, पहचान के बाद, एनएचएआई का कहना है कि इसकी देखभाल राज्य सरकारों को करनी होगी।" पीठ ने सुझाव दिया कि आवारा पशुओं को सड़कों पर आने से रोकने के लिए सड़कों और एक्सप्रेस-वे पर बाड़ लगाई जाए।

ये भी पढ़ें- Vaishno Devi Medical College: श्री माता वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज की मान्यता क्यों रद्द हुई? मुसलमानों के एडमिशन को लेकर हुआ था विवाद

अग्रवाल ने कहा कि मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और पंजाब जैसे राज्यों ने अभी तक कंप्लायंस एफिडेविट दाखिल नहीं किए हैं। जबकि कुछ राज्यों ने बेहद“निराशाजनक हलफनामे दाखिल किए हैं। जस्टिस नाथ ने कहा कि अदालत उन राज्यों से निपटेगी।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।