लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के महज 13 दिन बाद ही इसकी सड़क दो जगहों पर धंस गई है। 13 जुलाई को शुरू हुए इस एक्सप्रेसवे पर करीब 9 मीटर हिस्से में सड़क बैठ गई, जिससे निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं। उन्नाव से लखनऊ जाने वाली लेन में कोरारी के पास सड़क धंसने से गहरे गड्ढे बन गए हैं। लगातार बारिश के कारण इन गड्ढों में पानी भर गया है, जिससे वाहन चालकों के लिए खतरा बढ़ गया है। इसके अलावा इसी लेन में टोल प्लाजा से करीब एक किलोमीटर पहले भी सड़क का लगभग 8 फीट हिस्सा धंस गया है।
एक्सप्रेसवे का निर्माण करने वाली कंपनी पटेल इंफ्रास्ट्रक्चर ने क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत का काम शुरू कर दिया है। साथ ही, हादसों से बचाव के लिए प्रभावित जगहों पर बैरिकेड्स लगाकर वाहनों को सावधानी से गुजरने की सलाह दी जा रही है।
4200 करोड़ की लागत से बना था एक्सप्रेसवे
नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) ने करीब 4,200 करोड़ रुपये की लागत से इस एक्सप्रेसवे का निर्माण कराया है। इसे ऑटोमेटेड इंटेलिजेंस मशीन गाइडेड कंस्ट्रक्शन (AIMGC) तकनीक से तैयार किया गया था। दावा किया गया था कि अमेरिका और जर्मनी के बाद भारत में इस तकनीक से बनने वाला यह पहला एक्सप्रेसवे है। हालांकि, पहली ही मानसूनी बारिश में सड़क पर आई खराबी ने इसकी गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। 45 किलोमीटर लंबे ग्रीनफील्ड सेक्शन में किलोमीटर संख्या 64.200 के पास कई मीटर तक सड़क की डामर परत उखड़ गई है। इस क्षतिग्रस्त हिस्से के वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। लगातार हो रही भारी बारिश के कारण ग्रीनफील्ड सेक्शन के कई हिस्सों में डामर उखड़ने की शिकायत सामने आई है, जिससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ गई है।
इससे पहले भी एक्सप्रेसवे के किनारों पर कई जगह मिट्टी का कटाव देखने को मिला था। वहीं, अचलगंज के पास अप्रोच रोड का एक हिस्सा भी धंस गया था। कई स्थानों पर मरम्मत के लिए किए गए पैचवर्क की वजह से सड़क पहले जैसी समतल नहीं रह गई है। वाहन चालकों का कहना है कि पुलों और पुलियाओं पर बने एक्सपेंशन जॉइंट्स से गुजरते समय तेज झटके महसूस हो रहे हैं। एक्सप्रेसवे के प्रोजेक्ट मैनेजर वी. कुंडू ने बताया कि लगातार हो रही भारी बारिश के कारण कुछ जगहों पर सड़क को नुकसान पहुंचा है। उन्होंने कहा कि मरम्मत का काम तेजी से किया जा रहा है। उनके मुताबिक, नया एक्सप्रेसवे होने के कारण शुरुआती दौर में इस तरह की छोटी-मोटी दिक्कतें असामान्य नहीं हैं और फिलहाल यातायात सामान्य रूप से जारी है।