Supreme Court on Form 6: वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर चल रहे विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (5 अक्टूबर) को Form 6 में किए गए बदलाव को लेकर अहम टिप्पणी की। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत ने स्पष्ट तौर पर कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने फॉर्म 6 के किसी संशोधित फॉर्मेट को मंजूरी नहीं दी है। चीफ जस्टिस ने यह टिप्पणी मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान की।
'लाइव लॉ' के अनुसार, CEC ज्ञानेश कुमार से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई के दौरान CJI ने कहा, "बदले हुए 'फॉर्म 6' को हमने मंजूरी नहीं दी है, यह बात बिल्कुल साफ होनी चाहिए।" उन्होंने यह भी कहा कि रिकॉर्ड सामने आने के बाद अदालत यह देखना चाहेगी कि Form 6 में बदलाव किसने किया।
Form 6 का इस्तेमाल नए मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट में जोड़ने के लिए किया जाता है। हाल में SIR प्रक्रिया के दौरान ऑनलाइन Form 6 के साथ एक अतिरिक्त घोषणा-पत्र (Declaration) जोड़े जाने को लेकर विवाद शुरू हुआ। इस अतिरिक्त घोषणा में आवेदक से यह जानकारी मांगी जा रही थी कि वह या उसके माता-पिता पिछली SIR वोटर लिस्ट में शामिल थे या नहीं। विवाद तब बढ़ा जब रिपोर्टों में सामने आया कि चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने फॉर्म 6 में बदलाव को लेकर आपत्ति जताई थी। उनकी आपत्ति का आधार यह था कि निर्धारित वैधानिक Form 6 में बदलाव के लिए Registration of Electors Rules, 1960 में संशोधन की जरूरत हो सकती है।
चुनाव आयोग ने 26 सितंबर को कहा था कि SIR से जुड़ा Form 6 का अतिरिक्त Declaration सुप्रीम कोर्ट के फैसले में कायम रखा गया था। हालांकि, सोमवार की सुनवाई में CJI की टिप्पणी से यह स्पष्ट हुआ कि मई 2026 के SIR फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने इस नए संशोधित Form 6 को मंजूरी नहीं दी थी। लाइव लॉ के मुताबिक, यह अतिरिक्त घोषणा उस फैसले के बाद लागू की गई थी। चुनाव आयोग ने इससे पहले यह भी कहा था कि मूल Form 6 में कोई बदलाव नहीं किया गया है। SIR से जुड़ी जानकारी अलग Annexure के तौर पर जोड़ी गई है।
CEC ज्ञानेश कुमार पर भी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को निर्वाचन आयोग और केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर एक हफ्ते में जवाब मांगा है। यह नोटिस उस याचिका पर भेजा गया है जिसमें मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार की अगुवाई वाले निर्वाचन आयोग के कामकाज के उस तरीके को चुनौती दी गई है, जिसमें कथित तौर पर दो चुनाव आयुक्तों की मंजूरी के बिना फैसले लिए गए थे।
CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची तथा जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने वरिष्ठ वकील विकास सिंह की दलीलों पर गौर करते हुए नोटिस जारी किया। पीठ ने कहा कि निर्वाचन आयोग के फैसले या तो सर्वसम्मति से या बहुमत के आधार पर लिए जाने चाहिए। अदालत ने यह भी कहा कि वह यह मानकर चल रही है कि आयोग के सभी फैसले इसी प्रक्रिया के तहत लिए गए।
पटना निवासी राकेश कुमार सिंह द्वारा दायर जनहित याचिका में अदालत से यह तय करने का अनुरोध किया गया है कि क्या सीईसी ज्ञानेश कुमार उन शक्तियों का अकेले इस्तेमाल कर रहे हैं, जो कानूनी रूप से पूरे निर्वाचन आयोग को प्राप्त हैं। याचिका में कहा गया है कि यदि ऐसा पाया जाता है तो ऐसे कार्यों को अनधिकृत घोषित किया जाए और उचित कानूनी कार्रवाई की जाए।