Supreme Court On Parsvnath: पार्श्वनाथ डेवलपर्स के प्रोजेक्ट्स में अपने सपनों के घर का इंतजार कर रहे हजारों खरीदारों के लिए सुप्रीम कोर्ट से बहुत बड़ी और राहत भरी खबर आई है। देश की सबसे बड़ी अदालत ने पार्श्वनाथ होमबायर्स मामले की सुनवाई करते हुए एक अहम आदेश जारी किया है। कोर्ट ने उन सभी घर खरीदारों के पक्ष में कन्वेयंस डीड (रजिस्ट्री या मालिकाना हक का ट्रांसफर) करने की इजाजत दे दी है नके फ्लैट का काम पूरा हो चुका है और जिन्हें पजेशन (कब्जा) भी मिल चुका है।
इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कंपनी के फ्रीज (बैंक खातों पर रोक) पड़े खातों से बिजली के बिल भरने और कर्मचारियों की रुकी हुई सैलरी देने के लिए भी सीमित राहत प्रदान की है।
किन घर खरीदारों को मिलेगी रजिस्ट्री की इजाजत?
सुप्रीम कोर्ट के इस अंतरिम आदेश से उन लोगों को सीधा फायदा मिलेगा जो सालों से अपने घर की रजिस्ट्री के लिए भटक रहे थे। प्रोजेक्ट्स का निर्माण कार्य पूरी तरह पूरा हो चुका है और जहां खरीदारों को फ्लैट का कब्जा सौंपा जा चुका है, उनके नाम अब आधिकारिक तौर पर कन्वेयंस डीड जारी हो सकेगी। अदालत ने साफ कहा है कि इस प्रक्रिया के तहत सभी फ्लैट आवंटनों का वेरिफिकेशन करना अनिवार्य होगा। कोर्ट ने यह सख्त हिदायत भी दी है कि इस आदेश की आड़ में किसी भी तरह से नए तीसरे पक्ष को अधिकार नहीं दिए जा सकेंगे।
बिजली के बिल और सैलरी के लिए बैंक खातों पर रोक से छूट
घर खरीदारों को राहत देने के अलावा, सुप्रीम कोर्ट ने अपने 13 जुलाई के पुराने आदेश में बदलाव करते हुए सीमित छूट दी है। 13 जुलाई को कोर्ट ने कंपनी के खातों के इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी। अब कोर्ट ने निर्देश दिया है कि बंद पड़े खातों में जमा जरूरी पैसों का इस्तेमाल बिजली के बिलों को भरने और कर्मचारियों का बकाया वेतन देने के लिए किया जा सकेगा। अदालत ने वित्तीय संस्थानों और लोन देने वाली संस्थाओं से कहा है कि वे रेजोल्यूशन प्रोफेशनल को पर्याप्त फंड उपलब्ध कराएं, ताकि बिजली और कर्मचारियों की सैलरी जैसे जरूरी काम न रुकें।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से जहां एक तरफ पजेशन पा चुके खरीदारों के नाम रजिस्ट्री होने का रास्ता साफ हो गया है, वहीं दूसरी तरफ सोसाइटी के रख-रखाव और दैनिक कामकाज में आ रही बिजली और कर्मचारियों के बकाये की रुकावट भी दूर हो सकेगी।