SIR देशभर में चलता रहेगा, सुप्रीम कोर्ट ने इसे लेकर जो फैसला सुनाया उसे 5 पॉइंट्स में समझिए

SIR Row: सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (27 मई) को वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) पर सुनवाई करते हुए कहा कि हम इस बात से भी पूरी तरह संतुष्ट हैं कि एसआईआर का उद्देश्य स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों के संवैधानिक लक्ष्य से सीधा जुड़ा हुआ है। इस फैसले से चुनाव आयोग को बड़ी राहत मिली है

अपडेटेड May 27, 2026 पर 11:49 AM
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SIR Row: सुप्रीम कोर्ट ने SIR प्रक्रिया की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा है

SIR Row: सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग (RCI) की वोटर लिस्ट का स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) करने की शक्ति को सही ठहराया है। CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने बड़ा फैसला देते हुए कहा कि SIR प्रक्रिया को सिर्फ इसलिए 'अल्ट्रा वायर्स' (गैर-कानूनी) कहकर रद्द नहीं किया जा सकता क्योंकि यह वोटर लिस्ट के आम रिवीजन की प्रक्रिया से अलग है। कोर्ट ने SIR को एक वैध और संवैधानिक प्रक्रिया बताया है। कोर्ट ने आगे कहा, "यह प्रक्रिया कानूनी रूप से मान्य है।"

शीर्ष अदालत ने बुधवार (27 मई) को अपने फैसले में कहा, "हम इस बात से पूरी तरह संतुष्ट हैं कि SIR का जो उद्देश्य है, उसका सीधा संबंध स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों के संवैधानिक लक्ष्य से है।" यह फ़ैसला उन याचिकाओं पर आया है, जिनमें चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया की वैधता को चुनौती दी गई थी। यह प्रक्रिया 2025 में बिहार में और इस साल की शुरुआत में पश्चिम बंगाल में चलाई गई थी।

याचिकाओं में यह तर्क दिया गया था कि चुनाव आयोग के पास बिहार में अपनाए गए तरीके से SIR जैसा व्यापक अभियान चलाने का कोई वैधानिक या संवैधानिक अधिकार नहीं है। इन याचिकाओं में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जाने और चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र को लेकर चिंताएँ जताई गई थीं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "हम इस बात से भी पूरी तरह संतुष्ट हैं कि एसआईआर का उद्देश्य स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों के संवैधानिक लक्ष्य से सीधा जुड़ा हुआ है।"


सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव केवल मतदान की प्रक्रिया पर निर्भर नहीं करते। शीर्ष अदालत ने कहा, "स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव मतदाता सूचियों की सत्यनिष्ठा, सटीकता और विश्वसनीयता पर निर्भर करते हैं।" अदालत ने एसआईआर के लिए निर्वाचन आयोग के कारणों से सहमति जताते हुए कहा कि तेजी से शहरीकरण और प्रवासन इसके वैध कारण हैं।

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) ने फैसला सुनाते हुए कहा, "हमारा मानना ​​है कि चुनावी एसआईआर स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों की संवैधानिक अनिवार्यता को आगे बढ़ाता है।" सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में आगे कहा, "हम इस निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकते कि विवादित प्रक्रिया केवल प्रशासनिक सुविधा के लिए अपनाई गई है।"

SIR पर सुनवाई की बड़ी बातें

सवाल

1. क्या ECI के पास SIR करने की शक्तियां हैं?

2. क्या SIR के तहत जांच का कोई वैध मकसद है? और अगर है तो क्या चुनाव आयोग द्वारा उठाए गए कदम उस मकसद के हिसाब से सही अनुपात में हैं?

3. क्या SIR के तहत जांच करने में चुनाव आयोग द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया Representation of the People Act, 1950 के प्रावधानों के खिलाफ या उनका उल्लंघन है?

4. क्या ECI वोटर लिस्ट में नाम शामिल करने के लिए नागरिकता की जांच कर सकता है?                     5. एसआईआर प्रक्रिया को क्यों रद्द नहीं किया जा सकता?

सुप्रीम कोर्ट का जवाब

सुप्रीम कोर्ट- धारा 23 पर विचार करते हुए, हम इन सवालों के जवाब देते हैं।

SC- संसद ने एक सक्षम प्रावधान जोड़ा था।

SC- इस प्रक्रिया को सिर्फ इसलिए रद्द नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह आम वोटर लिस्ट से अलग है।

SC- इस प्रक्रिया का स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों से सीधा संबंध है।

SC- हम इस बात से पूरी तरह संतुष्ट हैं कि SIR का जो मकसद हासिल करना है, उसका स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों के संवैधानिक लक्ष्य से सीधा संबंध है।

SC- हम यह मानते हैं कि चुनावी SIR स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों की संवैधानिक अनिवार्यता को आगे बढ़ाता है।

SC- इसलिए हम संतुष्ट हैं कि यह विवादित प्रक्रिया सभी शर्तों को पूरा करती है।

SC- चुनाव आयोग द्वारा उठाए गए कदमों का हासिल किए जाने वाले लक्ष्यों से एक उचित संबंध है। वे साफ तौर पर जरूरत से ज्यादा नहीं हैं। उनके साथ पर्याप्त प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपाय भी हैं, ताकि किसी को भी मनमाने ढंग से बाहर न किया जा सके।

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