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Aravalli Hills: अरावली की नई परिभाषा और माइनिंग के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान, सोमवार को CJI की बेंच करेगी अहम सुनवाई

Supreme Court On Aravalli Hills: यह पूरा कानूनी विवाद अरावली की उस 'नई परिभाषा' को लेकर है, जिसे केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तावित किया था। केंद्र ने सुझाव दिया था कि केवल उन्हीं भू-आकृतियों को अरावली माना जाए जिनकी ऊंचाई स्थानीय धरातल से 100 मीटर या उससे अधिक है

Curated By: Abhishek Guptaअपडेटेड Dec 28, 2025 पर 8:28 AM
Aravalli Hills: अरावली की नई परिभाषा और माइनिंग के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान, सोमवार को CJI की बेंच करेगी अहम सुनवाई
अरावली केवल पहाड़ ही नहीं बल्कि दिल्ली-एनसीआर की जहरीली हवा को साफ करने में यह 'ग्रीन लंग्स' का भी काम करता है

Aravalli Hills: अरावली पर्वत श्रृंखला के अस्तित्व और वहां चल रहे खनन विवाद को लेकर सोमवार, 29 दिसंबर का दिन बेहद निर्णायक होने वाला है। सुप्रीम कोर्ट ने अरावली की परिभाषा और खनन गतिविधियों को लेकर स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लेते हुए सुनवाई करने का फैसला किया है। पर्यावरण प्रेमियों के लिए यह उम्मीद की एक बड़ी किरण है, क्योंकि हाल के दिनों में 100 मीटर की नई परिभाषा से काफी विवाद देखने को मिला है। इसके साथ ही अरावली की 'गलत परिभाषा' इस प्राचीन पर्वत श्रृंखला के बड़े हिस्से को तबाह कर सकती है।

CJI की अध्यक्षता वाली विशेष बेंच करेगी सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर जारी कार्यसूची के अनुसार, इस संवेदनशील मामले की सुनवाई देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच करेगी। इस बेंच में जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस ए.जी. मसीह भी शामिल होंगे। इस मामले का शीर्षक 'In Re: Definition of Aravalli Hills and Ranges and Ancillary Issues' रखा गया है।

'100 मीटर का फॉर्मूला' बनी हुई है विवाद की असली वजह

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