निठारी हत्याकांड के मुख्य आरोपी सुरेंद्र कोली की मौत, हरिद्वार में फांसी लगाकर दी जान
देशभर में बहुचर्चित रहे 2006 के निठारी सीरियल हत्याकांड के मुख्य आरोपी सुरेंद्र कोली ने शुक्रवार को हरिद्वार में कथित तौर पर आत्महत्या कर ली। वहीं, घटना की जानकारी मिलने के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है।
निठारी हत्याकांड के मुख्य आरोपी सुरेंद्र कोली की मौत
देशभर में बहुचर्चित रहे 2006 के निठारी सीरियल हत्याकांड के मुख्य आरोपी सुरेंद्र कोली ने शुक्रवार को हरिद्वार में कथित तौर पर आत्महत्या कर ली। CNN-News18 की रिपोर्ट के मुताबिक, कोली उत्तर हरिद्वार के भूपतवाला इलाके में काफी समय से रह रहा था। वहीं, घटना की जानकारी मिलने के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। फिलहाल, उसकी मौत किन परिस्थितियों में हुई, इसे लेकर ज्यादा जानकारी सामने नहीं आई है।
बताया जा रहा है कि, कोली की मौत सुप्रीम कोर्ट से आखिरी मामले में बरी होने और जेल से रिहा होने के एक साल से भी कम समय बाद हुई है।
क्या है पूरा मामला?
कोली को नोएडा के निठारी में 2005 और 2006 के बीच महिलाओं और बच्चों की मौत और उनके लापता होने से जुड़े कई मामलों में दोषी ठहराया गया था। बाद में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 2023 में उसे 12 मामलों में बरी कर दिया, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2025 में आखिरी लंबित मामले में उसकी दोषसिद्धि को पलट दिया।
नवंबर 2025 में, तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई की अध्यक्षता वाली पांच-न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने किशोरी रिम्पा हलदर की हत्या के मामले में कोली की क्यूरेटिव याचिका को मंजूरी दे दी। जिसके तहत कोर्ट ने उसकी दोषसिद्धि और मौत की सजा को बरकरार रखने वाले अपने पहले के फैसले को वापस ले लिया और आदेश दिया कि अगर वह किसी अन्य मामले में वांछित नहीं है तो उसे रिहा कर दिया जाए।
बता दें कि यह फैसला तब आया जब सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई 2025 में 12 अन्य मामलों में कोली और उसके पूर्व नियोक्ता मोनिंदर सिंह पंढेर को इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा बरी किए जाने के फैसले को बरकरार रखा था।
वहीं, आखिरी मामले की सुनवाई के दौरान, कोर्ट ने अभियोजन पक्ष द्वारा कोली के कबूलनामे, कथित बरामदगी और फोरेंसिक सबूतों पर किए गए दावों की बारीकी से जांच की। कोर्ट ने जांच और उन सबूतों में कई कमियां पाईं, जिनके आधार पर कोली को दोषी ठहराया गया था।
जानकारी के मुताबिक, निठारी हत्याकांड का पता दिसंबर 2006 में चला, जब निठारी में पंढेर के घर के पीछे एक नाले के पास इंसानी अवशेष मिले।
जांच के दौरान कोली (जो पंढेर के यहां घरेलू काम करता था) और पंढेर को गिरफ्तार किया गया। यह मामला इलाके से महिलाओं और बच्चों के गायब होने और उनकी कथित हत्याओं से जुड़ा था।
इसके बाद कोली को कई मामलों में दोषी ठहराया गया, जिनमें से कुछ मामलों में उसे मौत की सजा सुनाई गई। पंढेर को भी कुछ मामलों में दोषी ठहराया गया था, लेकिन बाद में ऊपरी अदालतों में चली कार्यवाही में उसे बरी कर दिया गया।
जुलाई 2025 में, सुप्रीम कोर्ट ने 12 मामलों में बरी किए जाने के खिलाफ CBI और पीड़ितों के परिवारों द्वारा दायर 14 अपीलें खारिज कर दीं।
उस समय सुनवाई के दौरान, तत्कालीन CJI गवाई ने इस मामले पर मीडिया के बहुत ज़्यादा ध्यान दिए जाने का जिक्र किया। गवाई ने कहा, "मीडिया का काफ़ी दबाव वगैरह रहा होगा," और सवाल उठाया कि क्या ट्रायल कोर्ट का फ़ैसला "मीडिया ट्रायल" से प्रभावित था।
उस समय सुनवाई के दौरान तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई ने इस मामले को मिली जबरदस्त मीडिया कवरेज का भी जिक्र किया। गवाई ने कहा, "मीडिया का काफी दबाव वगैरह रहा होगा," और सवाल उठाया कि क्या ट्रायल कोर्ट का फैसला "मीडिया ट्रायल" से प्रभावित था।
वहीं, उस फैसले के बाद भी कोली जेल में ही रहा क्योंकि रिम्पा हलदर मामले में उसे मिली उम्रकैद की सजा अभी भी लागू थी। हालांकि, नवंबर 2025 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उसकी रिहाई में बची आखिरी कानूनी अड़चन भी दूर हो गई।
सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले के बाद कोली को रिहा कर दिया गया। जेल से रिहाई के कुछ महीनों बाद अब हरिद्वार से उसकी कथित मौत की खबर सामने आई है।